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एयर स्ट्राइक: गम के आंसू गर्व की खुशी में बदले, शहीदों के परिजन बोले- अब मिला सुकून
Tue, 26 Feb 2019 09:16 PM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Tue, 26 Feb 2019 09:16 PM IST
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शहीद कौशल किशोर के परिजन
चेहरों पर असहाय पीड़ा की बनती-बिगड़ती तमाम लकीरें, जबड़ों में गुस्से की कसावट का उभार, आंखों में आग और पानी साथ-साथ। कभी गुस्से की आग तो कभी वेदना का बरसता पानी। पुलवामा हमले के बाद हर चेहरा एक कहानी सा हो गया था। रुदन और सिसकियों के बीच भरोसा था देश के वीर सैनिकों पर। बदला...बदला और सिर्फ बदला। बस यही आवाज उठ रही थी अमर शहीदों के घरों से। सोमवार की रात में हमारी पराक्रमी सेना ने पाकिस्तान में घुसकर बदला लिया, तब जाकर आंसुओं की धारा थमी। आगरा के शहीदों के परिजनों का कहना है, ऐसा लगा जैसे जख्मों पर मरहम लगा हो...।
शहीद कौशल किशोर की बेटी
पुलवामा हमले में आगरा के गांव कहरई निवासी वीर जवान कौशल कुमार रावत शहीद हुए थे। उनकी बेटी अपूर्वा ने उस समय कहा था, इस हमले का बदला लिया जाना चाहिए। बदला भी ऐसा हो कि आतंकियों के टुकड़े भी न मिलें। अब उनका कहना है कि हमें मोदीजी पर भरोसा था, सेना ने बदला लिया, हमारे मन को शांति मिली, मां की आंखों में पहली बार आंसू थमे, उनके चेहरे पर सुकून की हल्की सी मुस्कान दिखी लेकिन बदला अभी अधूरा है। 40 के बदले 4000 की आवाज उठी थी। यह पूरी होनी चाहिए।
शहीद कौशल किशोर का बेटा
शहीद कौशल कुमार रावत के बड़े बेटे अभिषेक ने पुलवामा हमले के बाद कहा था, यह देश पर हमला है, हमें मोदीजी पर भरोसा है, उन्हें बदला लेना चाहिए और वे लेंगे। अब अभिषेक का कहना है कि आप गांव में देख सकते हैं, लोग खुश हैं, जो चाह रहे थे, वही हुआ है। आतंकियों का यही अंजाम होना चाहिए। यह शुरुआत हुई है, बदला ऐसा होना चाहिए कि फिर से कोई आतंकी पुलवामा जैसे कायराना हमले की सोच भी न पाए।
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शहीद कौशल किशोर के पिता
शहीद कौशल कुमार रावत के पिता 80 वर्षीय गीताराम रावत को मंगलवार सुबह लगभग आठ बजे उनके पौत्रों ने एयर स्ट्राइक के बारे में जानकारी दी। सुनकर उनके चेहरे पर तसल्ली के भाव आए। उनका कहना है कि उनके दोनों पौत्र भी देश की सेवा करना चाहते हैं। गीताराम कहते हैं कि आतंकवादी ठिकाने पर की गई कार्रवाई की खबर सुनकर अच्छा लगा। हमारे सैनिकों ने बेटे के त्रियोदशी संस्कार से पहले बदला ले लिया।
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शहीद देवेंद्र सिंह के बघेल के परिजन
लखनपुर के लाल देवेंद्र सिंह बघेल 15 मई, 2018 को शहीद हुए थे। पाकिस्तानी सीमा की ओर से आतंकी घुसपैठ कर रहे थे। उधर से गोलियां चल रही थीं। देवेंद्र ने गोली का जवाब गोली से दिया। तभी एक गोली उनकी आंख में लगी। वह फिर भी मोर्चे पर डटे रहे। लड़ते-लड़ते वीरगति को प्राप्त हो गई। उनकी पत्नी पिंकी का रो-रोकर बुरा हाल था। अब पिंकी का कहना है कि आज मन को कुछ तसल्ली मिली है। आतंकियों का यही इलाज है। लातों के भूत बातों से सुधरने वाले नहीं। हमारी सेना ने सही किया, सेना को सलाम है।