वार्षिक अमृतकुंभ मेला मार्गशीर्ष का अंतिम स्नान पूर्णिमा पर्व पर हुआ। इस अवसर पर लाखों श्रद्धालु उमड़े। ठंड पर आस्था भारी दिखाई दी। गंगा मईया के जयकारों से पूरा कस्बा गूंजता रहा। गंगास्नान के बाद श्रद्धालुओं ने देव दर्शन भी किए। शनिवार के बाद रविवार को भी पूर्णिमा तिथि थी। कस्बा सोरोंजी में राजस्थान, मध्यप्रदेश के अलावा प्रदेश के कई जिलों से लाखों श्रद्धालु सोरों पहुंचे। सुबह ब्रह्म मुहूर्त में श्रद्धालुओं की भीड़ हरि की पौड़ी के घाट पर उमड़ पड़ी। हर-हर गंगे के जयकारों के साथ हरि की पौड़ी के पवित्र जल में श्रद्धालुओं ने डुबकी लगाई। हरि की पौड़ी के वराह घाट, लाल घाट, मानस घाट, सोमेश्वर घाट, बरीवाला घाट, तुलसी घाट सहित सभी घाटों पर श्रद्धालुओं का सैलाब नजर आ रहा था। श्रद्धालुओं ने मां गंगा की पूजा-अर्चना की और दूध चढ़ाया। साधू संतों ने गंगा मईया की आरती उतारी। श्रद्धालुओं ने हरि की पौड़ी घाट की परिक्रमा भी लगाई। गंगास्नान के बाद श्रद्धालु देव दर्शन करने पहुंचे।
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मार्गशीर्ष पूर्णिमा: ठंड पर भारी पड़ी आस्था, मेले के अंतिम स्नान पर्व पर उमड़ा सैलाब, हर-हर गंगे के स्वर से गूंजे घाट
Mon, 20 Dec 2021 12:22 AM IST
Abhishek Saxena
संवाद न्यूज एजेंसी, कासगंज-सोरोंजी
संवाद न्यूज एजेंसी, कासगंज-सोरोंजी
Published by: Abhishek Saxena
Updated Mon, 20 Dec 2021 12:22 AM IST
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सोरों के घाट पर स्नान करते श्रद्धालु
- फोटो : अमर उजाला
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रोशनी से सजा बराह मंदिर
- फोटो : अमर उजाला
वराह मंदिर में पहुंच श्रद्धालुओं ने भगवान वराह लक्ष्मी की दर्शन किए और परिवार की खुशहाली के लिए आशीष मांगा। इसके अलावा भगवान श्याम वराह मंदिर, रघुनाथ मंदिर, गणपति मंदिर, बालाजी दरबार, द्वारिकाधीश, बटुकनाथ, सिद्ध हनुमान, सोमेश्वर,योगेश्वर, पंचमहाशक्ति मंदिर पर भी श्रद्धालु देवदर्शन के लिए पहुंचे।
मेले में उमड़ी भीड़
- फोटो : अमर उजाला
मेला ग्राउंड से सड़कों तक कड़ी निगरानी
भीड़ के दबाव को देखते हुए पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था की कमान संभाली। सीओ सिटी दीपकुमार पंत के अलावा मेला प्रभारी राजीव कुमार के नेतृत्व में अलग-अलग टीमों ने व्यवस्था पर नजर रखी। सड़क से लेकर मेला ग्राउंड तक सुरक्षा और यातायात की व्यवस्था बनाने का प्रयास किया।
भीड़ के दबाव को देखते हुए पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था की कमान संभाली। सीओ सिटी दीपकुमार पंत के अलावा मेला प्रभारी राजीव कुमार के नेतृत्व में अलग-अलग टीमों ने व्यवस्था पर नजर रखी। सड़क से लेकर मेला ग्राउंड तक सुरक्षा और यातायात की व्यवस्था बनाने का प्रयास किया।
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रोशनी से सराबोर सोरोंजी का घाट
- फोटो : अमर उजाला
कछला गंगाघाट पर भी उमड़े श्रद्धालु
मार्गशीर्ष पूर्णिमा के अवसर पर कछला और कादरगंज गंगाघाट पर भी श्रद्धालु पहुंचे। गंगा में डुबकी लगाई और दान देकर पुण्य लाभ कमाया। हर-हर गंगे के स्वर कछला गंगाघाट पर सुनाई देते रहे।
मार्गशीर्ष पूर्णिमा के अवसर पर कछला और कादरगंज गंगाघाट पर भी श्रद्धालु पहुंचे। गंगा में डुबकी लगाई और दान देकर पुण्य लाभ कमाया। हर-हर गंगे के स्वर कछला गंगाघाट पर सुनाई देते रहे।
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भंडारा का प्रसाद ग्रहण करते साधु-संत
- फोटो : अमर उजाला
श्रद्धालुओं ने की पंचकोसीय परिक्रमा
तीर्थनगरी में मार्गशीर्ष मास के पूर्णिमा स्नान पर्व पर धर्म प्रेमियों ने जगह-जगह अन्न क्षेत्रों का आयोजन किया। पौराणिक ग्रंथों के अनुसार मार्गशीर्ष माह को सभी मासों में सर्वश्रेष्ठ माना गया है। इसी माह में भगवान विष्णु सूकरक्षेत्र की धरा पर वराह रूप में अवतरित हुए थे। दूरदराज से धर्म प्रेमी इस माह में यहां आकर भंडारे व अन्य दान कार्य करते हैं। महेश दयानंद सोहम आश्रम, स्वामी अमृतानंद आश्रम, मानस मंदिर, टाटिया बाबा आश्रम, बंशी वाले बाबा आश्रम आदि में दिन भर भंडारे चलते रहे। दिनभर तीर्थनगरी में धार्मिक अनुष्ठान हुए और अन्न क्षेत्र में साधू-संतों ने प्रसाद ग्रहण किया। वहीं, कई आयोजकों ने संत महात्माओं, संयासियों को कंबल और गरम वस्त्र वितरित किए। वातावरण दिनभर भक्तिमय बना रहा। आश्रमों में अन्न क्षेत्रों के अलावा लोगों ने अन्य स्थानों पर भी दान पुण्य किया। जहां एक ओर साधू आश्रमों में अन्न क्षेत्रों का आयोजन हुआ वहीं धार्मिक अनुष्ठानों के साथ प्रवचन भी हुए। साधू संतों ने धर्मप्रेमियों को प्रवचन देते हुए सोरोंजी के धार्मिक महत्व को बताया।
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तीर्थनगरी में मार्गशीर्ष मास के पूर्णिमा स्नान पर्व पर धर्म प्रेमियों ने जगह-जगह अन्न क्षेत्रों का आयोजन किया। पौराणिक ग्रंथों के अनुसार मार्गशीर्ष माह को सभी मासों में सर्वश्रेष्ठ माना गया है। इसी माह में भगवान विष्णु सूकरक्षेत्र की धरा पर वराह रूप में अवतरित हुए थे। दूरदराज से धर्म प्रेमी इस माह में यहां आकर भंडारे व अन्य दान कार्य करते हैं। महेश दयानंद सोहम आश्रम, स्वामी अमृतानंद आश्रम, मानस मंदिर, टाटिया बाबा आश्रम, बंशी वाले बाबा आश्रम आदि में दिन भर भंडारे चलते रहे। दिनभर तीर्थनगरी में धार्मिक अनुष्ठान हुए और अन्न क्षेत्र में साधू-संतों ने प्रसाद ग्रहण किया। वहीं, कई आयोजकों ने संत महात्माओं, संयासियों को कंबल और गरम वस्त्र वितरित किए। वातावरण दिनभर भक्तिमय बना रहा। आश्रमों में अन्न क्षेत्रों के अलावा लोगों ने अन्य स्थानों पर भी दान पुण्य किया। जहां एक ओर साधू आश्रमों में अन्न क्षेत्रों का आयोजन हुआ वहीं धार्मिक अनुष्ठानों के साथ प्रवचन भी हुए। साधू संतों ने धर्मप्रेमियों को प्रवचन देते हुए सोरोंजी के धार्मिक महत्व को बताया।
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