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मां का दर्द: कोई कह दे मेरे लाल से मुझे घर ले जाए, वृद्धाश्रम में बुजुर्ग महिलाओं को रुला रही अपनों की याद

Wed, 14 Dec 2022 01:41 PM IST
मुकेश कुमार रंजना शर्मा, संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
रंजना शर्मा, संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा Published by: मुकेश कुमार Updated Wed, 14 Dec 2022 01:41 PM IST
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many elderly persons living in the old age home after his sons out of the house in Agra
वृद्धाश्रम में रहने वाली बुजुर्ग महिलाएं - फोटो : अमर उजाला

लेती नहीं दवाई अम्मा, जोड़े पाई-पाई अम्मा, दुख थे पर्वत राई अम्मा, हारी नहीं लड़ाई अम्मा। यह कविता एक मां का जीवन बताती है। इससे उसके त्याग और बड़प्पन को समझा जा सकता है। जीवन के तमाम झंझावातों को झेलने वाली माएं अब अपनों के दिए दर्द को सहन नहीं कर पा रही हैं। 



जिन औलादों के लिए अपनी खुशियों का त्याग किया, जिनकी सलामती के लिए न जाने कितनी बार मन्नतें मांगी। व्रत रखा और पाल-पोस कर बड़ा किया। उन्होंने बुढ़ापे की लाठी बनने के बजाय बेगाना कर दिया है। लिहाजा वृद्धाश्रम में शरण लेना पड़ रहा है। इन मांओं का दिल अभी भी इसको स्वीकार नहीं कर रहा है और हर किसी से कहती हैं कि कोई कह दे मेरे लाल से कि वह उन्हें घर ले जाए।

आगरा के रामलाल वृद्धाश्रम में बीते एक सप्ताह में मनोरमा देवी, कपूरी वर्मा, रामकुमार शर्मा आदि 10 बुजुर्ग आएं हैं। इसमें आठ महिलाएं और दो पुरुष हैं। बेटे-बहू ने इनके साथ बुरा व्यवहार किया, लेकिन  फिर भी अपने घर लौटने के लिए आतुर हैं। उन्हें अपनों की याद सता रही है। माएं रोकर कहती हैं कि बेटा आ जाए तो घर चले जाएं। 

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दिल्ली की रामवती - फोटो : अमर उजाला

बहू कराती काम, बेटा डांटता है

दिल्ली की रहने वाली रामवती (78) तीन दिन पहले आश्रम में आईं हैं। जब से वह आश्रम आई हैं वह किसी से ज्यादा बात भी नहीं कर रही हैं। अपनों का दिया हुआ जख्म इतना गहरा है कि वह कहते हुए रो पड़ती हैं। वह बताती हैं कि उनके दो बेटे हैं, लेकिन उन्हें कोई भी अपने साथ रखना नहीं चाहता है। बहू पूरा दिन काम कराती थी और बेटों से कुछ कहती तो वह मुझे ही डांट देते। अब वह मुझे यहां छोड़ गए हैं। 
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आगरा की डेजीरानी - फोटो : अमर उजाला

बेटे नहीं ले गए साथ

शहीद नगर की डेजीरानी कहती है कि उनके दो बेटे हैं, लेकिन अब वह दुनिया में खुद को अकेला महसूस करती हैं। दोनों बेटे बाहर रहते हैं। मैंने बेटों से कई बार कहा कि अपने साथ ले जाए। लेकिन वह लेने नहीं आए। पहले तो अकेली ही रहती थी। लेकिन तबीयत खराब हुई तो कोई पानी देने वाला भी नहीं था। इसलिए आश्रम में आना पड़ा। मुझे अपने घर की बहुत याद आती है।  
 
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आगरा की कमला देवी - फोटो : अमर उजाला

अकेले में ज्यादा रोना आता है

राजामंडी की रहने वाली कमला देवी कहते हुए रो पड़ी कि मन्नतों के बाद बेटा पैदा हुआ था। न जाने कहां कहां सिर नहीं झुकाया बेटे के लिए लेकिन बेटा, बहू मुझे अब घर में नहीं रहने देते। आए दिन मेरे साथ मारपीट करते हैं। परेशान होकर घर छोड़ना पड़ा। कभी कभी अकेले में बहुत रोती हूं। मैं भी अपने घर में आखिरी सांस लूं यह चाहती थी। लेकिन अब यह सपना सा ही लगता है।
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रामलाल वृद्धाश्रम - फोटो : अमर उजाला

मन बहलाने का करते हैं प्रयास

रामलाल वृद्धाश्रम के अध्यक्ष शिव प्रसाद शर्मा ने बताया कि एक सप्ताह में यहां 10 बुजुर्ग आए हैं। इनमें आठ महिलाएं और दो पुरुष हैं। नए आने वाले बुजुर्गों को अपनो की याद सता रही है। कैसे भी करके उनके मन को बहलाने और घरवालों को बुलाकर उनके साथ भेजने का प्रयास किया जाता है। 
 
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