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वृंदावन कुंभ: श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रही देवरहा बाबा समाधि की झिलमिलाहट
Wed, 24 Feb 2021 02:31 PM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा-वृंदावन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा-वृंदावन
Published by: Abhishek Saxena
Updated Wed, 24 Feb 2021 02:31 PM IST
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वृंदावन कुंभ मेला: रंग-बिरंगी रोशनी से जगमगाता देवरहा बाबा घाट
- फोटो : अमर उजाला
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कुंभ को आरंभ हुए एक सप्ताह हो चुका है। इस दौरान संतों के आने की प्रक्रिया निरंतर जारी है। अभी भी अनेक पंडाल सज रहे हैं। लेकिन, इस दरम्यान कुंभ क्षेत्र का मुख्य आकर्षण रात के वक्त देवरहा बाबा आश्रम की झिलमिलाहट बनी हुई है। स्थानीय और आसपास के लोग आश्रम की इस प्रकाश व्यवस्था को देखने के लिए कुंभ क्षेत्र पहुंच रहे हैं। वृंदावन कुंभ का पहला शाही स्नान 27 फरवरी को हैं। संभावना बताई जा रही है कि इसी के साथ कुंभ में संत और भक्तों की भीड़ नजर आने लगेगी। इससे पहले अखाड़े और खालसा के पंडाल सज रहे हैं। विभिन्न सामाजिक संगठन और मंदिर आश्रम भी अपने शिविर सजाने में जुटे हैं। वर्तमान में वृंदावन और आसपास के लोगों को यमुना किनारे स्थित देवरहा बाबा आश्रम अपनी और आकर्षित कर रहा है। इसमें अधिकांश लोग आश्रम की भव्य प्रकाश व्यवस्था को निहारकर वापस लौटते हैं।
वृंदावन कुंभ मेला: रंग-बिरंगी रोशन सी जगमगाता देवरहा बाबा घाट
- फोटो : अमर उजाला
कुंभ क्षेत्र में खामोश रहता है मोबाइल
वृंदावन कुंभ में आते ही मोबाइल खामोश हो जाता है। बीएसएनएल सहित अन्य कंपनियों का नेटवर्क यहां काम नहीं करता है। इससे श्रद्धालु ही नहीं साधु-संत भी परेशान हैं। बड़ी संख्या में लोग मोबाइल सिम भी बदल रहे हैं। लेकिन तमाम प्रयास के बाद भी संचार सेवा के मामले में स्थिति बहुत खराब है।
वृंदावन कुंभ में आते ही मोबाइल खामोश हो जाता है। बीएसएनएल सहित अन्य कंपनियों का नेटवर्क यहां काम नहीं करता है। इससे श्रद्धालु ही नहीं साधु-संत भी परेशान हैं। बड़ी संख्या में लोग मोबाइल सिम भी बदल रहे हैं। लेकिन तमाम प्रयास के बाद भी संचार सेवा के मामले में स्थिति बहुत खराब है।
सौ वर्षीय संत बिहारीदास महाराज
- फोटो : अमर उजाला
सौ वर्ष की आयु में कर रहे घंटों की आराधना
राधाकृष्ण की क्रीड़ा भूमि श्रीधाम वृंदावन के कण-कण में राधाकृष्ण का वास है। यही कारण है कि यहां की पावन भूमि संतों को परम आनंद का अनुभव कराती है। सौ वर्षीय संत बिहारीदास महाराज इस आयु में भी घंटों ठाकुरजी की आराधना करते हैं। वसंत पंचमी से यमुना तट पर लगे कुंभ में वृंदावन प्रवास पर आए संत बिहारीदास ठाकुर जी के भजनों में लीन रहते हैं। इस दौरान वह किसी से भी बात नहीं करते हैं। अखिल भारतीय श्रीपंच दिगंबर अनी अखाड़े के शास्त्र मर्मज्ञ संत बिहारीदास महाराज की दिनचर्या सुबह तीन बजे होती है। सुबह उठने के बाद वह यमुना स्नान करते हैं। इसके बाद अपने अखाड़े में आकर भजन में लग जाते हैं। सुबह से ही श्रीराम चरित्र मानस पाठ, रामायण, हनुमानजी की आराधना में लगे रहते हैं। न खाने की चिंता और न सोने की। दोपहर के तीन बजे यमुना में दोबारा स्नान करने के बाद शाम की पूजा में लीन हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि जब तक वह यहां रहेंगे, जमीन पर ही सोएंगे। भारत के अलग-अलग राज्यों में 50 से अधिक आश्रम और मंदिरों की स्थापना करने वाले संत वृंदावन में एक छोटी की कुटिया में रहकर भजन कर रहे हैं। महंत गिरधारीदास बताते हैं कि संत बिहारीदास यहां सिर्फ आराधना के उद्देश्य से आए हैं। सुबह तीन बजे महाराजश्री का भजन का क्रम शुरू हो जाता है।
राधाकृष्ण की क्रीड़ा भूमि श्रीधाम वृंदावन के कण-कण में राधाकृष्ण का वास है। यही कारण है कि यहां की पावन भूमि संतों को परम आनंद का अनुभव कराती है। सौ वर्षीय संत बिहारीदास महाराज इस आयु में भी घंटों ठाकुरजी की आराधना करते हैं। वसंत पंचमी से यमुना तट पर लगे कुंभ में वृंदावन प्रवास पर आए संत बिहारीदास ठाकुर जी के भजनों में लीन रहते हैं। इस दौरान वह किसी से भी बात नहीं करते हैं। अखिल भारतीय श्रीपंच दिगंबर अनी अखाड़े के शास्त्र मर्मज्ञ संत बिहारीदास महाराज की दिनचर्या सुबह तीन बजे होती है। सुबह उठने के बाद वह यमुना स्नान करते हैं। इसके बाद अपने अखाड़े में आकर भजन में लग जाते हैं। सुबह से ही श्रीराम चरित्र मानस पाठ, रामायण, हनुमानजी की आराधना में लगे रहते हैं। न खाने की चिंता और न सोने की। दोपहर के तीन बजे यमुना में दोबारा स्नान करने के बाद शाम की पूजा में लीन हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि जब तक वह यहां रहेंगे, जमीन पर ही सोएंगे। भारत के अलग-अलग राज्यों में 50 से अधिक आश्रम और मंदिरों की स्थापना करने वाले संत वृंदावन में एक छोटी की कुटिया में रहकर भजन कर रहे हैं। महंत गिरधारीदास बताते हैं कि संत बिहारीदास यहां सिर्फ आराधना के उद्देश्य से आए हैं। सुबह तीन बजे महाराजश्री का भजन का क्रम शुरू हो जाता है।
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श्यामदास नागा
- फोटो : अमर उजाला
हाथ में फरसा और मुंह पर राम का नाम
मथुरा। हाथ में फरसा और श्रीराम का जयकारा लगाते हुए मंगलवार को श्यामदास नागा वृंदावन कुंभ पहुंचे हैं। 39 वर्षीय नागा मूल रूप से ब्रज के ही रहने वाले हैं। नंदगांव निवासी श्यामदास नागा की पांच वर्ष की आयु में ऐसी ईश्वर से लगन लगी कि वह संत हो गए। वह अखिल भारतीय श्रीपंच दिगंबर अनी अखाड़े के अयोध्या आश्रम में बस गए। प्रयागराज माघ मेला के बाद श्यामदास नागा मंगलवार को वृंदावन कुंभ पहुंचे हैं। उन्होंने बताया कि वह वृंदावन कुंभ में रहकर भजन करेंगे।
मथुरा। हाथ में फरसा और श्रीराम का जयकारा लगाते हुए मंगलवार को श्यामदास नागा वृंदावन कुंभ पहुंचे हैं। 39 वर्षीय नागा मूल रूप से ब्रज के ही रहने वाले हैं। नंदगांव निवासी श्यामदास नागा की पांच वर्ष की आयु में ऐसी ईश्वर से लगन लगी कि वह संत हो गए। वह अखिल भारतीय श्रीपंच दिगंबर अनी अखाड़े के अयोध्या आश्रम में बस गए। प्रयागराज माघ मेला के बाद श्यामदास नागा मंगलवार को वृंदावन कुंभ पहुंचे हैं। उन्होंने बताया कि वह वृंदावन कुंभ में रहकर भजन करेंगे।
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वृंदावन कुंभ में गायन करते हुए गायक
- फोटो : अमर उजाला
द्रुपद धमार-समाज गायन के साथ कत्थक प्रस्तुति से गूंजा कुंभ सांस्कृतिक पंडाल
स्वामी हरिदास, राधा वल्लभ संप्रदाय के आचार्य हित हरिवंश महाप्रभु और हरिराम व्यास तीनों ऐसे संत हुए, जिनकी वाणी एवं भक्ति से आस्थावजान लोगों को ईश्वर उपासना में शक्ति प्राप्त हुई। यह बात वृंदावन के यमुना तट पर आयोजित कुंभ पूर्व वैष्णव बैठक के सांस्कृतिक पंडाल में आयोजित हरित्रयी समारोह के उद्घाटन पर एमआर ग्रुप के सीएमडी सुनील अग्रवाल ने व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि कुंभ के माध्यम से देश में सनातन, वैदिक, देव वाणी और आचार्यों की वाणी का प्रचार प्रसार हो रहा है। इससे पूर्व कार्यक्रम का शुभारंभ स्वामी हरिदास के द्रुपद धमार और समाज गायन से हुआ। इसके बाद लखनऊ घराने के आचार्य आशीष द्वारा कत्थक की प्रस्तुति दी गई। उन्होंने पद्मभूषण छन्नू महाराज द्वारा गाई ‘रंग डालूंगी नंद के लालन’ पर सुंदर कत्थक की प्रस्तुति दी। इसके बाद कुमारी भावना ने ‘राधे रानी दे डारो बंसी मोरी’ गीत पर उप शास्त्रीय नृत्य की प्रस्तुति दी। कार्यक्रम में शास्त्री संगीत गायक बलराम एवं उनके साथियों ने स्वामी हरिदास जी के पदों का गायन किया। उन्होंने ‘भानु की किशोरी श्यामा प्यारी राधे राधे’ गीत गाया। आचार्य आदित्य गोस्वामी ने कलाकारों का सम्मान किया। इससे पूर्व मंच पर वैदिक यात्रा गुरुकुल के छात्रों ने कार्यक्रम प्रस्तुत किए। संयोजक देवेंद शर्मा ने बताया कि कुंभ के सांस्कृतिक पंडाल में दी जा रही प्रस्तुति का उद्देश्य ब्रज की सांस्कृतिक धरोहर एवं प्रदेश के विभिन्न अंचलों के लोक संगीत को जन-जन तक पहुंचाना है। रोमेक्स स्कूल, श्रीजी विद्या मंदिर, आरएम सरस्वती विद्या निकेतन, ममता मोंटेसरी ममता जूनियर हाईस्कूल, सुवटी देवी स्कूल के बच्चों ने भी प्रस्तुति दी। कार्यक्रम में संजय शर्मा व अनूप शर्मा का सहयोग रहा।
स्वामी हरिदास, राधा वल्लभ संप्रदाय के आचार्य हित हरिवंश महाप्रभु और हरिराम व्यास तीनों ऐसे संत हुए, जिनकी वाणी एवं भक्ति से आस्थावजान लोगों को ईश्वर उपासना में शक्ति प्राप्त हुई। यह बात वृंदावन के यमुना तट पर आयोजित कुंभ पूर्व वैष्णव बैठक के सांस्कृतिक पंडाल में आयोजित हरित्रयी समारोह के उद्घाटन पर एमआर ग्रुप के सीएमडी सुनील अग्रवाल ने व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि कुंभ के माध्यम से देश में सनातन, वैदिक, देव वाणी और आचार्यों की वाणी का प्रचार प्रसार हो रहा है। इससे पूर्व कार्यक्रम का शुभारंभ स्वामी हरिदास के द्रुपद धमार और समाज गायन से हुआ। इसके बाद लखनऊ घराने के आचार्य आशीष द्वारा कत्थक की प्रस्तुति दी गई। उन्होंने पद्मभूषण छन्नू महाराज द्वारा गाई ‘रंग डालूंगी नंद के लालन’ पर सुंदर कत्थक की प्रस्तुति दी। इसके बाद कुमारी भावना ने ‘राधे रानी दे डारो बंसी मोरी’ गीत पर उप शास्त्रीय नृत्य की प्रस्तुति दी। कार्यक्रम में शास्त्री संगीत गायक बलराम एवं उनके साथियों ने स्वामी हरिदास जी के पदों का गायन किया। उन्होंने ‘भानु की किशोरी श्यामा प्यारी राधे राधे’ गीत गाया। आचार्य आदित्य गोस्वामी ने कलाकारों का सम्मान किया। इससे पूर्व मंच पर वैदिक यात्रा गुरुकुल के छात्रों ने कार्यक्रम प्रस्तुत किए। संयोजक देवेंद शर्मा ने बताया कि कुंभ के सांस्कृतिक पंडाल में दी जा रही प्रस्तुति का उद्देश्य ब्रज की सांस्कृतिक धरोहर एवं प्रदेश के विभिन्न अंचलों के लोक संगीत को जन-जन तक पहुंचाना है। रोमेक्स स्कूल, श्रीजी विद्या मंदिर, आरएम सरस्वती विद्या निकेतन, ममता मोंटेसरी ममता जूनियर हाईस्कूल, सुवटी देवी स्कूल के बच्चों ने भी प्रस्तुति दी। कार्यक्रम में संजय शर्मा व अनूप शर्मा का सहयोग रहा।