राखी के साथ पाती भेजकर अपने कन्हैया से दुख बांट रहीं हैं बहनें। कोई स्कूल-कालेज जाते वक्त रास्तों में खड़े होने वाले गुंडों से तंग है। तो किसी मां ने अपनी बेटी के लिए भगवान से सुरक्षा मांगी है। ऐसी कई पाती ठाकुरजी के मंदिरों में हर रोज पहुंच रही हैं। ये राखियां भारत से ही नहीं विदेशों से भी आ रही हैं।
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बांकेबिहारी मंदिर
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बता दें कि रक्षाबंधन पर हर साल भगवान कृष्ण के नाम से राखियां पहुंचती हैं। वृंदावन में श्री बांकेबिहारी मंदिर में तो हर रोज राखियों के लिफाफे आ रहे हैं। रक्षा बंधन पर करीब तीन से चार हजार राखियां आ ही जाती हैं।
श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान के सदस्य गोपेश्वर नाथ चतुर्वेदी का कहना है कि हर साल रक्षाबंधन पर ठाकुरजी के लिए बड़ी संख्या में राखियां पहुंचती हैं। भगवान को भाई मानकर महिलाएं राखी भेजती हैं। चिट्ठियां भेजकर अपने मन की बात भी करती हैं।
द्वारिकाधीश मंदिर में गुजरात और महाराष्ट्र से राखियां आ रही हैं। मीडिया प्रभारी राकेश तिवारी का कहना है कि राखियों की कभी गिनती तो नहीं हुई लेकिन वह हजारों में होती हैं। कई चिट्ठियां इस प्रकार की आती हैं जिसमें महिलाएं अपना दुख ठाकुरजी से कहती हैं।
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POSTAL DEPARTMENT NEW ENVELOPE FOR RAKHI
कई चिट्ठियां ऐसी भी आईं हैं जिनमें लड़कियों ने लिखा है कि कुछ लोगों के कारण वह स्कूल जाने से डरती हैं। यह लोग परेशान करते हैं। क्योंकि यह भाव और भक्ति का रिश्ता होता है लिहाजा उन लोगों को विश्वास होता है कि भगवान उनके कष्ट दूर करेंगे।