मथुरा में राधारानी के गांव बरसाना के बाद बुधवार को श्रीकृष्ण के नंदगांव में लठमार होली का आनंद बरसेगा। इसे लेकर नंदगांव की हुरियारिनों ने मंगलवार को ही अपनी तैयारियां पूरी कर लीं। हुरियारिनें सोलह शृंगार कर लठमार होली चौक पर पहुंचेंगी। इधर, नंदभवन में बरसाना के हुरियारों का भव्य स्वागत किया जाएगा। नंदबाबा मंदिर के सेवायत सोमदत्त भारद्वाज ने बताया कि कई कुंतल टेसू के फूलों से बने रंगों से हुरियारों का स्वागत किया जाएगा। इसके बाद लठमार होली खेली जाएगी।
2 of 5
नंदगांव में छाया होली का उल्लास
- फोटो : अमर उजाला
बरसाना की लठमार होली के अगले दिन सखा स्वरूप ग्वाल (हुरियारे) नंदगांव में होली का फगुआ मांगने आएंगे। यहां हुरियारिनों प्रेमपगी लाठियों से उनका स्वागत करेंगी। लठामार होली चौक में आयोजित होने वाली अलौकिक लीला के दर्शन होंगे। नंदगांव की लठामार होली की तैयारी प्रशासन ने भी कर ली है। पूरे रंगीली चौक को गुलाबी रंग से पुतवाया गया है। चौक के समीप सभी दुकानों पर गुलाबी रंग कराया गया है।
3 of 5
नंदगांव के हुरियारे
- फोटो : अमर उजाला
अबीर-गुलाल की वर्षा और होली के गीतों के बीच नंदगांव की हुरियारिनें बरसाना के हुरियारों पर प्रेमपगी लाठियां बरसाएंगी। द्वापर युग की इस अनूठी परंपरा को लेकर हुरियारिनों में खासा उत्साह है। होली में राधाजी की तरह सुंदर दिखने के लिए हाथों में मेहंदी और पांवों में महावर लगवा रही हैं। पहली बार होली खेल कर आए हुरियारों के घरों में देर रात मंगलगीत गाए गए। घर की महिलाओं ने हुरियारों के लिए ठाकुरजी से मंगल कामना की।
4 of 5
लठामार होली खेलतीं बरसाना की हुरियारिनें
- फोटो : अमर उजाला
मंगलवार को नंदगांव के हुरियारे बरसाना की हुरियारिनों की लाठियों के वार को सहने के लिए हाथों में ढाल लिए घरों से निकले। धोती, बगलबंदी, पीतांबरी से सुसज्जित हुरियारे नंदभवन पहुंचे। यहां हुरियारों ने समाज गायन में भाग लिया। इसके बाद हुरियारों ने बुजुर्गों के पैर छुए और बरसाना जाकर होली खेलने की अनुमति मांगी। इसके बाद बरसाना में जाकर लठामार होली खेली।
5 of 5
हंसी-ठिठोली करते हुरियारे और हुरियारिन
- फोटो : अमर उजाला
लाठी की चोट और ढाल की ओट के बीच होली के रंगों से बरसाना की गलियां सतरंगी हो गईं। हुरियारिनों ने मस्ती में डूबे हुरियारों पर प्रेमपगी लाठियां बरसाईं। हुरियारों ने ढालों पर लाठियों के वार को सहा। जब तड़ातड़ लाठियां हुरियारों पर पड़ रही थी, तब ऐसा लग रहा था कि रंग-रंगीले बरसाना में मानो द्वापर युग सजीव हो उठा है। इस अनूठी परंपरा को देखने के लिए हजारों लोग बरसाना पहुंचे। लठमार होली के दौरान बारिश भी हुई।