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फ्रेंच ओपन के फाइनल में पीवी सिंधू को झटका: लगातार 11वीं बार एन से यंग से हारीं, उम्मीदों पर फिरा पानी
Sun, 25 Oct 2026 05:34 PM IST
मयंक त्रिपाठी
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, पेरिस
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, पेरिस
Published by: मयंक त्रिपाठी
Updated Sun, 25 Oct 2026 05:34 PM IST
सार
- पीवी सिंधू फ्रेंच ओपन 2026 के फाइनल में एन से यंग से हार गईं।
- पहला गेम जीतने के बावजूद उन्हें 21-16, 11-21, 12-21 से शिकस्त मिली और उपविजेता बनकर संतोष करना पड़ा।
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पीवी सिंधू
- फोटो : ANI
विस्तार
भारत की स्टार बैडमिंटन खिलाड़ी पीवी सिंधू का बीडब्ल्यूएफ फ्रेंच ओपन सुपर 750 टूर्नामेंट में शानदार अभियान उपविजेता बनने के साथ समाप्त हो गया। रविवार को खेले गए महिला एकल के फाइनल में दो बार की ओलंपिक पदक विजेता सिंधू को दक्षिण कोरिया की विश्व नंबर-1 खिलाड़ी एन से यंग के खिलाफ 21-16, 11-21, 12-21 से हार का सामना करना पड़ा। सिंधू ने फाइनल में दमदार शुरुआत करते हुए पहला गेम 21-16 से अपने नाम किया, लेकिन इसके बाद एन से यंग ने जोरदार वापसी की। दक्षिण कोरियाई खिलाड़ी ने अगले दोनों गेम 21-11 और 21-12 से जीतकर खिताब अपने नाम कर लिया।
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पीवी सिंधू
- फोटो : PTI
1998 के बाद इतिहास रचने से चूकीं सिंधू
इस हार के साथ ही सिंधू फ्रेंच ओपन महिला एकल का खिताब जीतने वाली 1998 के बाद पहली भारतीय महिला खिलाड़ी बनने से चूक गईं। भारत की अपर्णा पोपट ने 1998 में यह खिताब जीता था। इसके बाद से कोई भी भारतीय महिला खिलाड़ी फ्रेंच ओपन का महिला एकल खिताब नहीं जीत सकी है।
एन से यंग के खिलाफ लगातार 11वीं हार
एन से यंग के खिलाफ सिंधू का संघर्ष फाइनल में भी जारी रहा। दक्षिण कोरियाई खिलाड़ी ने इस जीत के साथ भारतीय शटलर के खिलाफ अपना जीत-हार का रिकॉर्ड 11-0 कर लिया। यानी सिंधू अब तक एन से यंग को एक भी मुकाबले में नहीं हरा सकी हैं। एन से यंग ने इस साल भी अपना शानदार प्रदर्शन जारी रखा है। फाइनल से पहले 2026 में उनका जीत-हार का रिकॉर्ड 65-1 था। फ्रेंच ओपन का खिताब जीतने के बाद उनकी लगातार जीत का सिलसिला 50 मैचों तक पहुंच गया।
इस हार के साथ ही सिंधू फ्रेंच ओपन महिला एकल का खिताब जीतने वाली 1998 के बाद पहली भारतीय महिला खिलाड़ी बनने से चूक गईं। भारत की अपर्णा पोपट ने 1998 में यह खिताब जीता था। इसके बाद से कोई भी भारतीय महिला खिलाड़ी फ्रेंच ओपन का महिला एकल खिताब नहीं जीत सकी है।
एन से यंग के खिलाफ लगातार 11वीं हार
एन से यंग के खिलाफ सिंधू का संघर्ष फाइनल में भी जारी रहा। दक्षिण कोरियाई खिलाड़ी ने इस जीत के साथ भारतीय शटलर के खिलाफ अपना जीत-हार का रिकॉर्ड 11-0 कर लिया। यानी सिंधू अब तक एन से यंग को एक भी मुकाबले में नहीं हरा सकी हैं। एन से यंग ने इस साल भी अपना शानदार प्रदर्शन जारी रखा है। फाइनल से पहले 2026 में उनका जीत-हार का रिकॉर्ड 65-1 था। फ्रेंच ओपन का खिताब जीतने के बाद उनकी लगातार जीत का सिलसिला 50 मैचों तक पहुंच गया।
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पीवी सिंधू
- फोटो : IANS
जापान ओपन के बाद दूसरा बड़ा फाइनल
पीवी सिंधू के लिए यह साल का दूसरा सुपर 750 फाइनल था। इससे पहले उन्होंने जुलाई में जापान ओपन का खिताब जीता था। उस टूर्नामेंट के फाइनल में सिंधू ने जापान की तीन बार की विश्व चैंपियन अकाने यामागुची को हराया था। दिसंबर 2024 के बाद यह सिंधू का पहला बीडब्ल्यूएफ खिताब था और जापान ओपन में उन्होंने अपने करियर का पहला सुपर 750 खिताब भी जीता था।
सेमीफाइनल में जापानी खिलाड़ी को दी थी मात
विश्व रैंकिंग में 11वें स्थान पर काबिज सिंधू ने पहली बार फ्रेंच ओपन के महिला एकल फाइनल में जगह बनाई थी। सेमीफाइनल में उन्होंने जापान की हिना अकेची को कड़े मुकाबले में 21-10, 20-22, 21-16 से हराया था। टूर्नामेंट के शुरुआती दौर में भी सिंधू को थाईलैंड की सुपानिदा कातेथोंग के खिलाफ कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ा था। इसके बाद उन्होंने जापान की रिको गुनजी और चीनी ताइपे की चिउ पिन-चियान को सीधे गेमों में हराकर अगले दौर में प्रवेश किया था। फाइनल में हार के बावजूद सिंधू का प्रदर्शन उनके लिए सकारात्मक रहा। हालांकि, फ्रेंच ओपन का खिताब जीतने और भारतीय बैडमिंटन इतिहास में नया अध्याय जोड़ने का उनका इंतजार अभी जारी है।
पीवी सिंधू के लिए यह साल का दूसरा सुपर 750 फाइनल था। इससे पहले उन्होंने जुलाई में जापान ओपन का खिताब जीता था। उस टूर्नामेंट के फाइनल में सिंधू ने जापान की तीन बार की विश्व चैंपियन अकाने यामागुची को हराया था। दिसंबर 2024 के बाद यह सिंधू का पहला बीडब्ल्यूएफ खिताब था और जापान ओपन में उन्होंने अपने करियर का पहला सुपर 750 खिताब भी जीता था।
सेमीफाइनल में जापानी खिलाड़ी को दी थी मात
विश्व रैंकिंग में 11वें स्थान पर काबिज सिंधू ने पहली बार फ्रेंच ओपन के महिला एकल फाइनल में जगह बनाई थी। सेमीफाइनल में उन्होंने जापान की हिना अकेची को कड़े मुकाबले में 21-10, 20-22, 21-16 से हराया था। टूर्नामेंट के शुरुआती दौर में भी सिंधू को थाईलैंड की सुपानिदा कातेथोंग के खिलाफ कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ा था। इसके बाद उन्होंने जापान की रिको गुनजी और चीनी ताइपे की चिउ पिन-चियान को सीधे गेमों में हराकर अगले दौर में प्रवेश किया था। फाइनल में हार के बावजूद सिंधू का प्रदर्शन उनके लिए सकारात्मक रहा। हालांकि, फ्रेंच ओपन का खिताब जीतने और भारतीय बैडमिंटन इतिहास में नया अध्याय जोड़ने का उनका इंतजार अभी जारी है।