धर्म और आस्था की नगरी वृंदावन में यमुना के तट पर वसंत पंचमी को वैष्णव कुंभ का शुभारंभ हो गया। तीनों अनी अखाड़ों के महंतों की अगुवाई में वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ ध्वजारोहण विधि-विधान पूर्वक किया गया। इससे पूर्व भव्यता के साथ श्रीबांकेबिहारी की नगरी में साधु-संतों की शाही सवारी निकली। वहीं यमुना किनारे हठयोगियों ने भी धूनी रमा दी है।
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वृंदावन कुंभ बैठक: ध्वजारोहण से पूर्व पूजन करते महंत व ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा
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सदियों से चली आ रही मान्यता के अनुसार हरिद्वार कुंभ से पहले वैष्णव संप्रदाय के संत-महंतों के आध्यात्मिक संगम के रूप में होने वाली कुंभ बैठक का शुभारंभ वसंत पंचमी को वृंदावन के यमुना तट पर हो गया।
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वृंदावन कुंभ बैठक मेला 2021: अनी अखाड़े में पूजा-अर्चना करते महंत
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ध्वजारोहण के साथ शुरू हुए इस धार्मिक आयोजन में पहले निर्मोही, दिगंबर, निर्वाणी अनी अखाड़ों के महंतों ने पुरोहित गौड़ सरदार के आचार्यत्व में पूजन किया। इसमें सबसे पहले महंत धर्मदास ने निर्वाणी अखाड़े में संतों के साथ पूजा-अर्चना कर धर्मध्वजा स्थापित की।
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वृंदावन कुंभ बैठक मेला 2021: अनी अखाड़े में पूजा-अर्चना करते महंत
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विजयबिहारी गौड़ सरदार के आचार्यत्व में हनुमतध्वज की पूजा-अर्चना की। ग्यारह मीटर लंबी ध्वजा को स्थापित किया गया। सुदामाकुटी के महंत सुतीक्ष्ण दास अन्य संतों के साथ मौजूद रहे। इसके बाद दिगंबर अखाड़े में महंत कृष्णदास, महंत गौरी शंकर ने पुरोहित शरद बिहारी गौड़ के आचार्यत्व में पूजन अर्चन कराया। हनुमत ध्वजा स्थापित की गई।
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वृंदावन: काठिया बाबा की शोभायात्रा निकली
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निर्मोही अखाड़े के महंत राजेंद्रदास, महंत हरिशंकर दास नागा, महंत रामेश्वर दास आदि महंत ध्वजपूजन में शामिल रहे। इसी के साथ कुंभ क्षेत्र में अन्य अखाड़ों और शिविरों में भी ध्वजारोहण का क्रम शुरू हो गया। संतों के समूह में रामनाम के जयकार गूंजने लगे। यहां मौजूद संतों के अनुयायी भी कुंभ मेला की जयजयकार करने लगे।