श्रीराधाकृष्ण की लीला स्थली पर यमुना नदी किनारे चतुर्संप्रदाय संतों का अद्भुत संगम श्रद्धालुओं के लिए वृंदावन कुंभ मेला बैठक को आकर्षण का केंद्र बनाएगा। इस दौरान यहां जगह-जगह पर साधु-संत हठयोग करते दिखाई देंगे। यह धार्मिक आयोजन 16 फरवरी से 25 मार्च चलेगा। कुंभ मेला की ध्वजा भव्य शोभायात्रा के साथ यहीं से निकलेगी। इसमें हाथी, घोड़ा और ऊंटों की सवारी के साथ ठाकुर जी का डोला, संत-महंत, महामंडलेश्वर और भक्तों की टोलियां शामिल होंगी।
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Kumbh Mela 2021: वृंदावन में श्रद्धालुओं को आकर्षित करेगी हठयोगियों की साधना
Wed, 03 Feb 2021 12:12 AM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा-वृंदावन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा-वृंदावन
Published by: मुकेश कुमार
Updated Wed, 03 Feb 2021 12:12 AM IST
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यमुना किनारे हठयोग करता योगी (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
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वृंदावन: डॉ. प्रताप पाल शर्मा, यमुना किनारे बनाई जा रही सड़क
- फोटो : अमर उजाला
वृंदावन में आयोजित हुए कुंभ मेला बैठकों का स्मरण कराते हुए डॉ. प्रताप पाल शर्मा ने बताया कि यहां संतों का संगम बनता है। यहां हठयोगियों के दर्शन सहजता से हो जाते हैं। वृंदावन कुंभ मेला बैठक में एक पैर पर खड़े होकर साधना करते हुए हठयोगियों को देखा है। संपूर्ण धड़ को बालू के अंदर दबाकर और चारों ओर प्रज्ज्वलित कंडों की धूनी रमाकर आराधना भी करते हुए देखने को मिल जाते हैं। अनेक प्रकार से साधना कर इष्ट को रिझाने का अनूठा दृश्य भी इस कुंभ मेला बैठक की विशेषताओं में शामिल रहा है।
वृंदावन: देवेंद्र शर्मा, दूसरी तस्वीर में यमुना किनारे बनाई जा रही सड़क
- फोटो : अमर उजाला
देवेंद्र शर्मा का कहना है कि पौराणिक व ऐतिहासिक तथ्यों के मुताबिक वैष्णव कुंभ मेला बैठक वैष्णवीय परंपरा के साधुओं की तपोस्थली माना गया है। राधाकृष्ण की लीलाभूमि को विभिन्न संप्रदाय के वैष्णव साधकों ने अपनी तपोस्थली बनाया है, जो राम-श्याम की उपासना को सर्वश्रेष्ठ मानते हैं। मध्ययुग में संत बालानंद द्वारा स्थापित तीन अनी के अठारह अखाड़ों में श्रीराम और श्रीश्याम उपासना के भेद से इनकी स्थापना की थी।
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वृंदावन कुंभ मेला: ऐसा होगा कुंभ मेले का द्वार
- फोटो : अमर उजाला
सात अखाड़े रामोपासना व ग्यारह अखाड़े श्यामोपासना प्रधान हैं। इन अखाड़ों से जुड़े निम्बार्क, श्रीमाध्वगोडिय, रामानन्दी, रामानुजी, वल्लभकुली संप्रदाय में वैष्णव उपासना पद्धति को प्रधानता दी गई है। जो सहजयोग से प्रभु को रिझाने में विश्वास करते हैं। लेकिन यमुनातट पर हठयोगियों की साधना का साक्षात्कार भी श्रद्धालुओं को होता है। मान्यता है कि हठ योगी एकांत स्थान को अपनी साधना स्थली के रूप में चयनित करते हैं, लेकिन यमुनातट पर साधना का पुण्य अवसर उन्हें भी आकर्षित करता है।
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वृंदावन: रासविहारी दास काठिया बाबा
- फोटो : अमर उजाला
ब्रजविदेही चतु:संप्रदायी श्रीमहंत रासविहारी दास काठिया बाबा ने बताया कि यह उनके लिए चौथा वृंदावन कुंभ मेला है, जिसकी ध्वजा लेकर वह आश्रम से जाएंगे। इससे पहले इस आश्रम की गुरु परंपरा इसे निभाती आ रही है। रासविहारी दास बताते हैं कि बसंत पंचमी के दिन कुंभ मेला बैठक की ध्वजा भव्य शोभायात्रा के साथ नगर भ्रमण करते हुए मेला स्थल पहुंचेगी। इसमें दो हाथी, 11 घोड़े और चार ऊंटों की भी सवारी होंगी।