कारगिल में पाकिस्तानी सेना के छक्के छुड़ाकर शहीद हुए फतेहाबाद के टीकत खंडेर पुरा निवासी जितेंद्र सिंह चौहान की शहादत को आज भी पूरा गांव याद करता है। उनकी अमर गाथा आज भी ग्रामीणों के मुंह से सुनी जा सकती है। ग्रामीण बताते हैं कि पांच पैरा बिग्रेड के जवान जितेंद्र सिंह चौहान ने कारगिल युद्ध के दौरान पाकिस्तानी सेना से जमकर लोहा लिया था। 21 जुलाई 1999 को वह शहीद हो गए थे।
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शहीद की प्रतिमा के पास खड़े ग्रामीण
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शहादत के बाद सरकार द्वारा कई वायदे शहीद परिवार के लिए किए थे। कुछ को पूरा भी किया गया। शहीद जितेंद्र सिंह की पत्नी सुमन चौहान को अजीविका चलाने के लिए एक पेट्रोल पंप आवंटित किया गया है। ताजनगरी में एक आवास भी दिया गया।
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शहीद की प्रतिमा का शिलांयास पत्थर
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गांव में शहीद का स्मारक बनाने के लिए जमीन आवंटित करने की बात कही गई थी। पर, जमीन का आवंटन न होने पर शहीद की पत्नी ने अपने खर्चे पर स्मारक बनवाया। इसका अनावरण 28 दिसंबर 2000 को किया गया। ग्रामीणों ने बताया कि जितेंद्र की याद में उनकी पत्नी सुमन चौहान हर वर्ष शहादत के दिवस पर भंडारे का आयोजन करती हैं।
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Kargil war (फाइल)फोटो
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फतेहाबाद-बाह रोड से गांव की ओर जाने वाले मार्ग को शहीद जितेंद्र सिंह चौहान मार्ग दिया गया है। यह मार्ग इस समय क्षतिग्रस्त पड़ा है। ग्रामीणों ने इसकी मरम्मत कराए जाने की मांग की है। उनके परिवार की महिला राजा बेटी का कहना है कि कारगिल शहीद का गांव होने के बावजूद गांव में जन सुविधाओं का अभाव है। सड़क पूरी तरह क्षतिग्रस्त है। बिजली भी काफी कम आती है। शौचालय और खड़जे की कोई व्यवस्था नहीं है। उन्होंने शहीद के गांव के समग्र विकास की मांग की है।
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ब्रिगेडियर समीर भदौरिया
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चोटी कब्जाई तो मोटरें छोड़कर भागे थे पाकिस्तानी
7 जुलाई का दिन, बाह के रुदमुली गांव के समीर भदौरिया की टीम ने घपाक पोस्ट पर कब्जा किया। सैनिकों के तेवर और जीत की भूख देखकर पाकिस्तानी सेना की रूह कांप गई। आलम ये था कि पाक फौजियों को जान बचाने के लाले पड़ गए। मौत को करीब देख अपनी मोटरें छोड़कर भाग खडे़ हुए। यह कहना है कारगिल जंग के हीरो रहे समीर भदौरिया का।