कानपुर जिले के बिकरू गांव में हुई पुलिस मुठभेड़ में बदमाशों की गोली से शहीद हुए फतेहाबाद के गांव पोखर पांडेय निवासी सिपाही बबलू कुमार की मौत से परिवार के साथ गांव और रिश्तेदार भी सदमे में हैं। बबलू के सिपाही बनने के बाद परिवार की आर्थिक स्थिति सुधरने की उम्मीद जगी थी, लेकिन डेढ़ साल की नौकरी के बाद ही वो दुनिया से ही चले गए। उनके साथ परिवार के सारे सपने बिखर गए।
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बबलू कुमार के परिजन
- फोटो : अमर उजाला
बबलू के परिवार की आर्थिक स्थित अच्छी नहीं है। उनके पिता छोटे लाल के पास खेत नहीं हैं। चार भाइयों में बबलू तीसरे नंबर का था। पिता राजमिस्त्री का काम करते हैं। बबलू के बड़े भाई दिनेश भी उनके साथ ही काम करते हैं।
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शहीद बबलू कुमार का पार्थिव शरीर घर आने पर विलाप करते परिजन
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शहीद के छोटे भाई उमेश ने इस वर्ष 12वीं की परीक्षा पास की है। बबलू की पांच बहनें हैं। ग्रामीणों ने बताया कि बबलू की पुलिस में नौकरी लगने के बाद परिवार में उम्मीद की किरण जागी थी, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। शुक्रवार की सुबह बबलू की शहीद होने की खबर मिली तो पूरा गांव गमगीन हो गया।
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शहीद सिपाही बबलू कुमार
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मुठभेड़ में शहीद हुए सिपाही बबलू कुमार ने अभाव में जीवन व्यतीत किया। पर, वे शुरू से ही मेधावी थे और 2018 में पुलिस में भर्ती हो गए। कानपुर में ही ट्रेनिंग की। वहीं तैनाती भी मिली। वर्तमान में वो बिठूर थाने में तैनात थे। बबलू के ताऊ का पुत्र जितेंद्र भी उसके बाद पीएसी में भर्ती हुआ है जो इस समय फतेहगढ़ में तैनात है।
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शहीद बबलू कुमार की फाइल फोटो
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गांव के राकेश ने बताया कि बबलू मिलनसार होने के साथ पढ़ने में भी होशियार था। दसवीं कक्षा से ही उसने सिपाही बनने की ठान रखी थी। पढ़ाई के साथ सुबह को दौड़ लगाने जाता था। गांव के युवकों के साथ उसने तैयारी की। वो कहता था कि एक दिन गांव का नाम रोशन करूंगा। उसके सिपाही बनने पर पूरे गांव में खुशी मनाई गई थी।