फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

कानपुर मुठभेड़: डेढ़ साल में ही बिखर गए शहीद बबलू के परिवार के सपने, पिता हैं राजमिस्री

Sat, 04 Jul 2020 12:28 PM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Published by: मुकेश कुमार Updated Sat, 04 Jul 2020 12:28 PM IST
विज्ञापन
Kanpur encounter: financial condition of martyr cop bablu kumar's family in not good
शहीद बबलू कुमार के रोते बिलखते परिजन - फोटो : अमर उजाला
कानपुर जिले के बिकरू गांव में हुई पुलिस मुठभेड़ में बदमाशों की गोली से शहीद हुए फतेहाबाद के गांव पोखर पांडेय निवासी सिपाही बबलू कुमार की मौत से परिवार के साथ गांव और रिश्तेदार भी सदमे में हैं। बबलू के सिपाही बनने के बाद परिवार की आर्थिक स्थिति सुधरने की उम्मीद जगी थी, लेकिन डेढ़ साल की नौकरी के बाद ही वो दुनिया से ही चले गए। उनके साथ परिवार के सारे सपने बिखर गए।  
Kanpur encounter: financial condition of martyr cop bablu kumar's family in not good
बबलू कुमार के परिजन - फोटो : अमर उजाला
बबलू के परिवार की आर्थिक स्थित अच्छी नहीं है। उनके पिता छोटे लाल के पास खेत नहीं हैं। चार भाइयों में बबलू तीसरे नंबर का था। पिता राजमिस्त्री का काम करते हैं। बबलू के बड़े भाई दिनेश भी उनके साथ ही काम करते हैं।
Kanpur encounter: financial condition of martyr cop bablu kumar's family in not good
शहीद बबलू कुमार का पार्थिव शरीर घर आने पर विलाप करते परिजन - फोटो : अमर उजाला
शहीद के छोटे भाई उमेश ने इस वर्ष 12वीं की परीक्षा पास की है। बबलू की पांच बहनें हैं। ग्रामीणों ने बताया कि बबलू की पुलिस में नौकरी लगने के बाद परिवार में उम्मीद की किरण जागी थी, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। शुक्रवार की सुबह बबलू की शहीद होने की खबर मिली तो पूरा गांव गमगीन हो गया। 
विज्ञापन
विज्ञापन
Kanpur encounter: financial condition of martyr cop bablu kumar's family in not good
शहीद सिपाही बबलू कुमार - फोटो : अमर उजाला
मुठभेड़ में शहीद हुए सिपाही बबलू कुमार ने अभाव में जीवन व्यतीत किया। पर, वे शुरू से ही मेधावी थे और 2018 में पुलिस में भर्ती हो गए। कानपुर में ही ट्रेनिंग की। वहीं तैनाती भी मिली। वर्तमान में वो बिठूर थाने में तैनात थे। बबलू के ताऊ का पुत्र जितेंद्र भी उसके बाद पीएसी में भर्ती हुआ है जो इस समय फतेहगढ़ में तैनात है।
विज्ञापन
Kanpur encounter: financial condition of martyr cop bablu kumar's family in not good
शहीद बबलू कुमार की फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
गांव के राकेश ने बताया कि बबलू मिलनसार होने के साथ पढ़ने में भी होशियार था। दसवीं कक्षा से ही उसने सिपाही बनने की ठान रखी थी। पढ़ाई के साथ सुबह को दौड़ लगाने जाता था। गांव के युवकों के साथ उसने तैयारी की। वो कहता था कि एक दिन गांव का नाम रोशन करूंगा। उसके सिपाही बनने पर पूरे गांव में खुशी मनाई गई थी।
अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed