श्रीकृष्ण जन्माष्मी पर ब्रज में भक्तों का अथाह सागर उमड़ रहा है। मथुरा से लेकर वृंदावन तक राधे-राधे की गूंज सुनाई दे रही है। शुक्रवार को वृंदावन के बांकेबिहारी मंदिर, नंदगांव के नंदभवन और बरसाना में कृष्ण का जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया गया। रात 12 बजे जैसे ही कान्हा का जन्म हुआ, बांकेबिहारी की नगरी लाला के जयकारों से गूंज उठी। रंगबिरंगी रोशनी से सजे मंदिर में रात को बांकेबिहारी का अभिषेक हुआ। चांदी के पालने में जन-जन के आराध्य ने भक्तों को दर्शन दिए और वर्ष में एक बार होने वाली मंगला आरती रात 1:55 बजे हुई।
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बांकेबिहारी मंदिर को जाने वाले रास्ते में भीड़
- फोटो : अमर उजाला
बांकेबिहारी मंदिर में लाला कन्हैया के जन्म की तैयारियों के बीच देश-विदेश से आए भक्तों का मंदिर के बाहर एवं गलियों में सैलाब उमड़ पड़ा। हर कोई भक्त अपने आराध्य के जन्म का साक्षी होने की लालसा लिए कदम आगे बढ़ा रहा था।
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बांकेबिहारी मंदिर के बाहर भक्त
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आधी रात होने पर भी लाखों भक्त ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर की गलियों, चबूतरा पर खड़े होकर मंदिर के पट खुलने का इंतजार कर रहे थे। रात 12 बजे मंदिर के सेवायत मनोज गोस्वामी ने पंचामृत एवं जड़ी बूटियों से ठाकुरजी का अभिषेक किया। इस बीच मंदिर के चबूतरे पर गोस्वामीजन भगवान कृष्ण के जन्म की लीला का भक्तों को श्रवण करा रहे थे।
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बांकेबिहारी मंदिर में भक्तों की भीड़
- फोटो : अमर उजाला
अभिषेक के बाद मंदिर के जगमोहन में चांदी से जड़ित पालने में ठाकुरजी ने भक्तों को दर्शन दिए। कुछ ही समय के पश्चात वर्ष में एक बार होने वाली मंगला आरती रात 155 बजे हुई। इसके बाद रात 2 से 5:30 बजे तक प्रभु ने भक्तों को नयनाभिराम दर्शन दिए। ठाकुरजी ने जड़ेमा पीले रंग की पोशाक व सोने, चांदी, जवाहरात, हीरा मोती के आभूषण धारण कर रखे थे। मंदिर कन्हैया के जयकारों से गूंज उठा।
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वृंदावन के प्रेम मंदिर में भक्तों की भीड़
- फोटो : अमर उजाला
प्रेम मंदिर में रात्रि 12 बजे पुजारियों ने चांदी के पात्रों से दूध, दही, शहर, शक्कर, यमुना जल एवं जड़ी बूटियों से भगवान कृष्ण का महाभिषेक किया। इस दौरान पीले वस्त्र पहने 1 हजार भक्तों ने एक साथ शंख ध्वनि की। शंख ध्वनि से मंदिर गुंजायमान हो गया।