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Women's Day: इन बेटियों ने 'मैदान' फतेह कर देशभर में रोशन किया मथुरा का नाम

Wed, 06 Mar 2019 09:30 AM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा Published by: मुकेश कुमार Updated Wed, 06 Mar 2019 09:30 AM IST
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international women's day mathura girls players successes story
इन बेटियों ने अपने अपने क्षेत्र में फहराया जीत का परचम - फोटो : अमर उजाला
कुश्ती, क्रिकेट, तीरंदाजी, जूडो, बॉक्सिंग और निशानेबाजी समेत कई खेलों में मथुरा की बेटियां नाम कमा रही हैं। इन बेटियों ने खेल के मानचित्र पर कान्हा की नगरी का नाम देशभर में रोशन किया है। इनकी प्रतिभा का लोहा आज सब मान रहे हैं। इन बेटियों ने कई पदक अब तक हासिल कर लिए हैं। बड़ी बाधाओं को पार करके यह विजेता बनीं हैं।
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तीरंदाजी में अंडर 14 में गोल्ड पदक विजेता भावना सिंह
पापा से जिद करके ले लिया था धनुष
तीरंदाजी में अंडर 14 में गोल्ड पदक जीत चुकी भावना सिंह 11वीं की छात्रा है। शुरूआत से ही तीरंदाजी में दिलचस्पी थी। लेकिन धनुष की कीमत करीब ढाई लाख थी। पापा रघुनाथ सिंह से कहा कि धनुष दिलवा दो। अब जाहिर सी बात है कि ढाई लाख रुपये का इंतजाम करना किसी के लिए आसान नहीं है। लेकिन भावना ने पापा से जिद की। रघुनाथ सिंह ने भी बेटी का तीरंदाज बनने का सपना पूरा करने के लिए कंपाउंड धनुष दिलवा दिया। भावना पिछले दो साल से गोल्ड जीत रही हैं और इस साल सीनियर में सिल्वर जीता है। भावना का सपना देश का सबसे बड़ा तीरंदाज बनने का है। गोवर्धन के गांव जचौंदा निवासी भावना का कहना है कि उसके परिवार ने उसका काफी साथ दिया। घर वालों के सहयोग के कारण ही वह लगातार आगे बढ़ती रही है। 
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निशानेबाज स्वेता सिंह
मथुरा की बहू निशानेबाजी में जीत चुकी 187 पदक
निशानेबाजी में स्वेता सिंह ने बड़ी उपलब्धियां हासिल की हैं। वह अब तक 187 पदक हासिल कर चुकी हैं। दिल्ली में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स में तीन गोल्ड हासिल किए थे। साउथ कोरिया में 2014 में हुए एशियन गेम में व्यक्तिगत में उन्होंने कांस्य पदक हासिल किया था। इंटरनेशनल प्रतियोगिताओं में ही वह अब तक 58 पदक जीत चुकी हैं। जिसमें 25 गोल्ड हैं। स्वेता सिंह की ससुराल बलदेव के गांव आघई की है। उनके पति प्रशांत सिंह एक व्यवसायी हैं। वह फरीदाबाद में रह रहे हैं। स्वेता सिंह का कहना है कि पूरा परिवार उनका साथ देता है। शादी के बाद ही उन्होंने 22 पदक जीते हैं। पति भी उनका हौसला बढ़ाने के लिए पूरी मदद करते हैं। 
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बॉक्सर निधिन को सम्मानित करतीं सांसद हेमा मालिनी (फाइल)
कक्षा आठ की छात्रा बन गई बॉक्सर
कक्षा आठ की छात्रा निधि शर्मा छोटी सी उम्र में ही बॉक्सर बन गई हैं। उसने पिछले दिनों पुणे में हुए जूनियर नेशनल बॉक्सिंग में कांस्य पदक जीता है। बाकलपुर स्थित अमर कालोनी निवासी देवेंद्र शर्मा की बेटी निधि पिछले दो साल से बॉक्सिंग प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले रही हैं। वह जिला और प्रदेश स्तरीय कई प्रतियोगिताओं में पदक हासिल कर चुकी हैं। परिवार वालों का कहना है कि निधि में बचपन से ही बॉक्सिंग के प्रति दिलचस्पी थी। वह बच्चों के साथ भी जब खेल खेलती थी तो बॉक्सिंग ही करती थी। स्टेडियम में प्रैक्टिस के लिए जाना शुरू कर दिया और कुछ ही दिनों में प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेनी लगी। देवेंद्र शर्मा का ख्वाब है कि निधि को बड़ा बॉक्सर बनाएंगे।
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जूडो खिलाड़ी कृष्णा फौजदार
जूडो में 20 पदक जीत चुकी हैं कृष्णा
कृष्णा फौजदार जूडो की खिलाड़ी हैं। गोवर्धन रोड पर रोडवेज कालोनी में रहने वाली कृष्णा अब तक 20 पदक हासिल कर चुकी हैं। वह नेशनल और इंटरनेशनल प्रतियोगिताओं में भाग ले चुकी हैं। दो महीने पहले भोपाल में हुए खेलो इंडिया में कृष्णा ने गोल्ड जीता है। अब वह अगली प्रतियोगिता की तैयारी में है। परिवार वालों का कहना है कि कृष्णा पढ़ाई भी कर रही है। आर्मी से रिटायर हरेंद्र कुमार फौजदार अपनी बेटी कृष्णा को जूडो का बड़ा खिलाड़ी बनाना चाहते हैं। उनका कहना है कि बेटी उनका ख्वाब जरूर पूरा करेगी। इसके लिए पूरा परिवार उसका सहयोग करता है।
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