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सरकारी योजना के तहत शहरी गरीबों के लिए बने मकानों की हो गई यह हालत, देखें तस्वीरें

Tue, 25 Aug 2020 01:55 PM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Published by: मुकेश कुमार Updated Tue, 25 Aug 2020 01:55 PM IST
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houses of the urban poor families are in poor condition
मकानों की हुई जर्जर हालत - फोटो : अमर उजाला
आगरा में गरीबों के लिए बनाए गए घरों की छत टपक रहीं है तो छज्जे गिरने के कगार पर हैं। पीली ईंटों से बने इन भवनों को रेत से जोड़ा गया है। आवंटन के महज एक साल के अंदर ही बीएसयूपी (बेसिक सर्विसेस फॉर अर्बन पुअर) के मकान खंडहर में बदल गए हैं। शास्त्रीपुरम और कालिंदी विहार में रहने वाले लोग इन भवनों की खस्ता हालत देखते हुए इनमें रहने को अब तैयार नहीं।
houses of the urban poor families are in poor condition
शास्त्रीनगर में बने बीएसयूपी भवन - फोटो : अमर उजाला
शहरी गरीबों को एक ही जगह पर सभी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए साल 2009 में बीएसयूपी भवनों की योजना बनी, जिसमें निर्माण 2014 में शुरू हुआ जो 2018-19 तक बनकर तैयार हो पाए। पिछले साल भवनों का आवंटन हुआ तो लोगों ने रहना शुरू किया है। 
houses of the urban poor families are in poor condition
कालिंदी विहार में बने मकानों की हुई यह हालत - फोटो : अमर उजाला
आगरा विकास प्राधिकरण द्वारा शास्त्रीपुरम में और कालिंदी विहार में आवास विकास परिषद द्वारा बनाए गए भवनों की पहली ही बारिश में पोल खुल गई। बारिश में छतें टपकने लगीं और छज्जे गिरासू हो गए हैं। छत के लिंटर में दरारें आ गई है तो कइयों में चटकन आ गई है। इससे लोगों में घर में रहने में डर लग रहा है।
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एक साल में छूटने लगा प्लास्टर - फोटो : अमर उजाला
लिंटर में नजर आ रही दरार
भवन का छज्जा चटक रहा है। लिंटर में दरार नजर आ रही है। ये कभी भी गिर सकता है। अभी एक साल पहले ही भवन आवंटित हुआ है। - विश्वनाथ शर्मा, शास्त्रीपुरम

एक साल में ही प्लास्टर गिरने लगा
अभी हमें यहां रहे एक साल भी नहीं हुआ और बरसात की वजह से छत टपक रही है। छत का प्लास्टर बार-बार नीचे गिर रहा है। किसी झोपड़ी की तरह पूरे भवन की छत टपक रही है, जिसमें नीचे रहना मुश्किल है। - गुड्डी देवी, शास्त्रीपुरम
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कालिंदी विहार में बने मकानों की हुई यह हालत - फोटो : अमर उजाला
प्लास्टर में रेत ही रेत
किसी एक में नहीं बल्कि सभी ब्लॉक में छत प्लास्टर और छज्जों की यही स्थिति है। पीली ईंटों से मकान बनाए गए हैं जो टूट रहे हैं। प्लास्टर में सिर्फ रेत ही रेत है, जो कभी भी नीचे गिर जाता है। हर पल यहां लोगों की जान खतरे में है। - रंजीत सिंह, शास्त्रीपुरम

'दूर होंगी कमियां'
 बीएसयूपी भवनों में छत टपकने और प्लास्टर गिरने की शिकायतें आ रही है, जिसके लिए मैंने इंजीनियरों से कहा है कि हर ब्लॉक में कमियों को दूर कराएं। लोगों की परेशानी का निदान होना चाहिए। - राजेंद्र प्रसाद त्रिपाठी सचिव
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