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श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर रंग-गुलाल संग बरसे फूल, अलौकिक होली के साक्षी बने हजारों भक्त
Sat, 07 Mar 2020 11:21 AM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Sat, 07 Mar 2020 11:21 AM IST
सार
बारिश भी नहीं डिगा सकी कान्हा के भक्तों की श्रद्धा
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होली के रंगों में सराबोर होकर नाचे भक्त
- फोटो : Amar Ujala
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मथुरा में रंगभरनी एकादशी पर ब्रजनंदन कान्हा की जन्म स्थली में होली का आनंद बरसा। लीलामंच पर फूलों की होली के साथ गुलाल की होली का आयोजन हुआ। मंदिर प्रांगण गुलाल के रंग में सराबोर हो गया। कान्हा की जन्मस्थली में हुई इस दिव्य होली के दर्शन के लिए देश और विदेश से हजारों श्रद्धालु पहुंचे। बीच-बीच में हुई बारिश भी भक्तों की आस्था को नहीं डिगा सकी। भक्त अपने आराध्य की होली को अपलक देखते हुए आनंद लूटते रहे।
जन्मस्थान पर प्रस्तुति देते कलाकार
- फोटो : अमर उजाला
दोपहर बाद शुरू हुए कार्यक्रमों में कलाकारों ने मेरी चुनरी में लग गयौ दाग री ऐसो चटक रंग डारौ... गीत पर नृत्य किया। चारों धामों से निराला ब्रज धाम के दर्शन कर लेयौ जी और ठाकुर हमरे रमण बिहारी हम हैं रमण बिहारी भजन सुनाकर भक्तों को मंत्रमुग्ध कर दिया। मुंबई की कलाकार मीनल और मनीष शर्मा ने मैं नई नवेली आई फाग में गीत प्रस्तुत किया।
नृत्य की प्रस्तुति देते कलाकार
- फोटो : अमर उजाला
गोवर्धन के राजेश शर्मा के श्याम लोक कला मंच के कलाकारों ने जैसे ही मंच पर आयो रसिया मोर बन आयौ रसिया, बरसाने की मोर कुटी पे मोर बन आयो रसिया गीत पर मयूर नृत्य प्रस्तुत किया तो पूरा पंडाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। वहीं जैसलमेर की मोहनी आदि कलाकारों ने घूमर-काल बेलिया करतब प्रस्तुत किया।
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जन्मस्थान पर झूमते श्रद्घालु
- फोटो : अमर उजाला
दिल्ली के विक्की जुनेजा ने सुन लै वृषभान किशोरी, जो तूने मोते न खेली होरी, तेरी मेरी कुट्टी है जाएगी...पर राधा कृष्ण के स्वरूपों सहित नृत्य किया। राजस्थान के मनोज जाले और दिनेश कुमार सहित कलाकारों ने मेरा दामन सिमादेया ओ बनदी के वीरा प्रस्तुत कर सभी का मन मोह लिया। नृत्य के बीच शालिनी शर्मा शर्मा और रामेश्वर शर्मा ने होली खेलन जाउंगी मेरी पास पड़ोसन जाएं और नेक आगे आ श्याम तोपे रंग डारू नेक आगे आ...गीत प्रस्तुत कर वातावरण को होलीमय बना दिया।
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जन्मस्थान पर प्रस्तुति देते कलाकार
- फोटो : अमर उजाला
चरकुला नृत्य के साथ खुर्जा से आए नीतू सिंह और उनके साथियों ने बंब रसिया की प्रस्तुति दी। अंत में होली के रसिया और गीतों पर कासगंज के सोनू और उनके साथी कलाकारों के साथ राधाकृष्ण के स्वरूपों ने फूलों की होली खेली। इसका भक्तों ने भी जमकर आनंद लिया। रावल एवं श्रीकृष्ण संकीर्तन मंडल के हुरियारे और हुरियारिनों ने लठमार होली खेली। भक्ति के रंग की ऐसी हिलोर उठी कि भक्त भी उसमें रंगे हुए नजर आए। हुरियारिनों की प्रेम पगी लाठियां हुरियारों पर बरसने लगीं। हुरियारिनों की लाठियों से बचने को ढाल लिए घुटने के बल बैठने को मजबूर थे। आसमान से रंग और गुलाल की बरसात हो रही थी। मेघ भी ऐसे बरसे, लगा कि कान्हा के जन्मस्थली में हो रही इस दिव्य होली के साकार दर्शन करने के लिए स्वयं इंद्रदेव पधारे हों। भक्त भी बारिश में नाचकर आनंद ले रहे थे। जन्मस्थान का प्रांगण भगवान कृष्ण के जयकारों से गुंजायमान हो गया।