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ताजमहल के पास बना है हाथीखाना, संरक्षित स्थल की बुनियाद हो रही मजबूत, जानिए इसका रोचक इतिहास
Thu, 25 Feb 2021 12:37 PM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Thu, 25 Feb 2021 12:37 PM IST
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हाथी पर चल रहा है संरक्षण का कार्य
- फोटो : अमर उजाला
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ताजमहल पूर्वी गेट के पास ताज टैनरी की ओर हाथीखाना की बुनियाद को मजबूत करने का काम 350 साल बाद शुरू हुआ है। मुगलकाल में ताजमहल के निर्माण के दौरान हाथियों को इसी जगह पर बांधा गया था। दो साल पहले एएसआई ने हाथीखाना को संरक्षित घोषित किया। उससे पहले यह इमारत बेहद जर्जर हो चुकी थी। चार फुट मोटी हाथीखाना की दीवारों में से तीन फुट तक ईंटें निकाल ली गईं, जिन्हें संरक्षण के दौरान लगाया जा रहा है।
हाथीखाना में संरक्षण कार्य करते मजदूर
- फोटो : अमर उजाला
ऐसे पड़ गया नाम हाथीखाना
ताजमहल के गुंबद तक संगमरमर के बड़े-बड़े पत्थरों को पहुंचाने के लिए हाथियों का इस्तेमाल किया गया था। ताज टैनरी के आगे तक मुख्य गुंबद से रैंप बनाई गई थी। ताज टैनरी के पास इन हाथियों को जहां बांधा गया, उस जगह का नाम हाथीखाना पड़ गया। यहां बड़े गुंबद वाली इमारत के पास बड़ा मैदान है, जो ताज टैनरी तक बना हुआ है। हाथीखाना के बाद ही मिट्टी के ऊंचे ऊंचे टीले हैं, जिन्हें ताज के लिए बनाई गई रैंप में इस्तेमाल किया गया था।
ताजमहल के गुंबद तक संगमरमर के बड़े-बड़े पत्थरों को पहुंचाने के लिए हाथियों का इस्तेमाल किया गया था। ताज टैनरी के आगे तक मुख्य गुंबद से रैंप बनाई गई थी। ताज टैनरी के पास इन हाथियों को जहां बांधा गया, उस जगह का नाम हाथीखाना पड़ गया। यहां बड़े गुंबद वाली इमारत के पास बड़ा मैदान है, जो ताज टैनरी तक बना हुआ है। हाथीखाना के बाद ही मिट्टी के ऊंचे ऊंचे टीले हैं, जिन्हें ताज के लिए बनाई गई रैंप में इस्तेमाल किया गया था।
हाथी खाना के संरक्षण का कार्य करते मजदूर
- फोटो : अमर उजाला
दूसरे चरण में होगा छत का काम
हाथीखाना को कुछ समय पहले ही संरक्षित घोषित किया गया है। यह बेहद जीर्ण शीर्ण हालत में था, जिस वजह से इसकी बुनियाद मजबूत करने का काम सबसे पहले करेंगे। जमीन से पांच फीट ऊंचाई तक दीवारों से निकली ईंटों को लगा रहे हैं, फिर दूसरे चरण में छत का काम करेंगे। वसंत कुमार स्वर्णकार, अधीक्षण पुरातत्वविद
हाथीखाना को कुछ समय पहले ही संरक्षित घोषित किया गया है। यह बेहद जीर्ण शीर्ण हालत में था, जिस वजह से इसकी बुनियाद मजबूत करने का काम सबसे पहले करेंगे। जमीन से पांच फीट ऊंचाई तक दीवारों से निकली ईंटों को लगा रहे हैं, फिर दूसरे चरण में छत का काम करेंगे। वसंत कुमार स्वर्णकार, अधीक्षण पुरातत्वविद
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महताब बाग के पास ग्यारह सीढ़ी स्मारक
- फोटो : अमर उजाला
महताब बाग के पास ग्यारह सीढ़ी स्मारक स्थित है। यह एक खगोल वेधशाला का भग्नावशेष है। जोकि मुगल शासक हुमायूं द्वारा बनवाई गई थी। पर्यटक महताब बाग तो आते हैं लेकिन प्रचार-प्रसार के अभाव में यहां तक नहीं पहुंच पाते।
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महताब बाग व्यू प्वाइंट से ताजमहल
- फोटो : अमर उजाला
ताजमहल के पास महताब बाग से पर्यटकों के लिए शरद पूर्णिमा की रात में ताजमहल देखने की व्यवस्था की गई है। यहां बहुत ही कम दरों पर टिकट उपलब्ध हैं।