हर रसोई तक गैस पहुंचाने के लिए शुरू की गई केंद्र सरकार की मुहिम महंगाई की भेंट चढ़ गई। गैस के बढ़ते दामों ने प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना का दम निकाल कर रख दिया। एलपीजी की कीमतें लगभग दोगुनी हो जाने से उज्ज्वला कनेक्शन धारक सिलिंडर रिफिल नहीं करवा पा रहे हैं। ऐसे में महिलाओं को बेहतर ईंधन उपलब्ध कराने का सपना अधूरा है। ग्रामीण क्षेत्र में गरीब परिवार चूल्हे पर उपले और लकड़ी के सहारे ही भोजन बनाने को मजबूर हैं। इससे उठने वाला धुआं उनकी सेहत और आंखों को प्रभावित करता है। इसी के चलते वर्ष 2016 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना शुरू की थी। इसके तहत जिले के एक लाख 29 हजार 59 परिवारों को नि:शुल्क गैस कनेक्शन दिए गए। इससे गरीब परिवारों की रसोई तक बेहतर ईंधन पहुंच गया। लेकिन लगातार गैस की बढ़ती कीमतों के चलते एक बार फिर ये परिवार चूल्हे पर धुएं के बीच खाना बनाने के लिए मजबूर हैं।
महंगाई: गैस के दामों ने निकाला उज्जवला योजना का दम, चूल्हा फूंकने को मजबूर महिलाएं
प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना की शुरुआत के दौरान सब्सिडी के रूप में लगभग 40 प्रतिशत धनराशि कनेक्शनधारक के खाते में पहुंचती थी। लेकिन धीरे-धीरे ये धनराशि कम होती चली गई। वर्तमान में बैंक खाते में महज 17 रुपये की धनराशि ही सब्सिडी के तौर पर आ रही है, जो नाकाफी है।
जब प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत गैस कनेक्शन मिला था उसके बाद केवल दो बार ही गैस सिलिंडर दोबारा भरवा पाया। बाद में कीमतें इतनी बढ़ गईं कि गैस से खाना बनाना संभव नहीं रहा। सुनीता देवी, कुसमरा।
लगभग तीन साल पहले प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत कनेक्शन मिला था। तब सिलिंडर भरवाने पर आधे रुपये खाते में वापस आ जाते थे। अब तो पूरे रुपये देने पड़ते हैं, जो दे पाना मुश्किल है। सावित्री देवी, कुसमरा।
हर महीने घरेलू गैस पर दाम बढ़ जाते हैं। पहले खाते में रुपये वापस आ जाते थे, लेकिन अब तो वह भी बंद हो गया है। मजबूरी में लकड़ी से चूल्हे पर ही खाना बनाना पड़ता है। विमला देवी, कुसमरा।
सरकार ने निशुल्क गैस चूल्हा और सिलिंडर तो दे दिया, लेकिन गैस के दाम बहुत ज्यादा बढ़ा दिए। ऐसे में गरीब परिवार गैस सिलिंडर भरवाने की सोच भी नहीं सकते हैं। गुड्डी देवी, कुसमरा।
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