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शहादत को सलाम: 24 साल के वीर सपूत को अंतिम विदाई, बेसुध हुए मां-बाप, भावुक कर देंगी तस्वीरें

Sat, 08 Dec 2018 07:11 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला एटा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला एटा Updated Sat, 08 Dec 2018 07:11 PM IST
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funeral of martyr Rajesh Kumar in etah
इकलौते बेटे को देख बिलख पड़ी बूढ़ी मां - फोटो : अमर उजाला
जम्मू कश्मीर के कुपवाड़ा जिले में पाकिस्तान की गोलाबारी में शहीद हुए राजेश कुमार का पार्थिव शरीर शनिवार की सुबह उनके पैतृक गांव नगला केला रेजुआ पहुंचा। शव पहुंचते ही परिजनों के साथ गांव के लोगों में भी कोहराम मच गया। अंतिम यात्रा के दौरान मां-बाप बेसुध हो गए। गर्भवती का रो रोकर बुरा हाल हो गया। हर कोई शहीद बेटे के अंतिम दर्शन को बेताब दिखा। अंतिम दर्शन के बाद राजकीय सम्मान के साथ दोपहर करीब तीन बजे राजेश के चचेरे भाई ने मुखाग्नि दी। 

शहादत को सलाम: 24 साल के वीर सपूत को अंतिम विदाई, बेसुध हुए मां-बाप, भावुक कर देंगी तस्वीरें

funeral of martyr Rajesh Kumar in etah
शहीद की अंतिम यात्रा - फोटो : अमर उजाला
शहीद राजेश कुमार अपने परिवार में इकलौते बेटे थे। परिवार को उनकी शहादत पर गर्व है तो उन्हें खोने का गम भी। पिछले दो दिनों से नगला केला के लोग शहीद राजेश के पार्थिव शरीर के आने का इंतजार कर रहे थे। पार्थिव शरीर शुक्रवार को ही आना था, लेकिन विषम परिस्थितियों के चलते नहीं आ सका। शनिवार सेना के जवान एंबुलेंस से पार्थिव शरीर लेकर नगला केला रेजुआ आ रहे थे। लेकिन वो नगला केला से करीब सात किमी पहले ही ताबूत लेकर उतर गए। इसके बाद का सफर उन्होंने पैदल ही तय किया। 

शहादत को सलाम: 24 साल के वीर सपूत को अंतिम विदाई, बेसुध हुए मां-बाप, भावुक कर देंगी तस्वीरें

funeral of martyr Rajesh Kumar in etah
शहीद की अंतिम यात्रा - फोटो : अमर उजाला
सेना के जवान जिस रास्ते, जिस गांव से गुजरते उस गांव के लोग भारत माता की जय बोलते हुए उनके साथ हो लेते। सुबह करीब साढ़े दस बजे जब पार्थिव शरीर गांव नगला केला रेजुआ पहुंचा तो हजारों लोगों का विशाल रैला भी उसके साथ था। शव घर पहुंचते ही कोहराम मच गया। मां, पत्नी और बहनों के साथ ही ग्रामीणों की आंखों में भी शहीद के लिए आंखों में आंसू थे। 
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शहादत को सलाम: 24 साल के वीर सपूत को अंतिम विदाई, बेसुध हुए मां-बाप, भावुक कर देंगी तस्वीरें

funeral of martyr Rajesh Kumar in etah
शहीद की अंतिम यात्रा - फोटो : अमर उजाला
अधिक भीड़ होने की वजह से राजेश के पार्थिव शरीर को गांव से बाहर एक खेत में अंतिम दर्शन के लिए रखा गया। इस दौरान राजनैतिक लोगों के साथ ही अधिकारियों आदि ने राजेश को श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके बाद दोपहर करीब तीन बजे राजेश को राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। इसके बाद राजेश के चचेरे भाई वीकेंद्र ने मुखाग्नि दी। 
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शहीद की अंतिम यात्रा - फोटो : अमर उजाला
राजेश के पिता नेम सिंह बड़े हिम्मत वाले थे। उनके सामने उनका कलेजे का टुकड़ा था, जो शहीद हो चुका था। लेकिन वह हिम्मत डांटे खड़े थे। आंखें नम तो थीं लेकिन चेहरे पर फख्र भी था। अंतिम संस्कार की ज्यादातर विधियां हो गई। उसी दौरान अचानक राजेश के पिता बेहोश हो गए। होश आया तो बिलख पड़े। परिजनों ने आगे आकर उन्हें संभाला और ढांढस बंधाया। 
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