{"_id":"6a87303533bb58cdd8048546","slug":"students-defrauded-via-fake-website-of-sai-nath-educational-university-2026-08-20","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"साइबर शातिरों का बड़ा खेल: इस यूनिवर्सिटी में तो नहीं लिया एडमिशन, प्रवेश के साथ फर्जी रिजल्ट भी कर दिया जारी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
साइबर शातिरों का बड़ा खेल: इस यूनिवर्सिटी में तो नहीं लिया एडमिशन, प्रवेश के साथ फर्जी रिजल्ट भी कर दिया जारी
Thu, 20 Aug 2026 10:20 PM IST
Arun Parashar
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
Published by: Arun Parashar
Updated Thu, 20 Aug 2026 10:20 PM IST
सार
यूनिवर्सिटी की फर्जी वेबसाइट बनाकर छात्रों से ठगी का मामला सामने आया है। साइबर शातिरों ने न सिर्फ वेबसाइट के जरिए छात्रों का फर्जी एडमिशन लिया, बल्कि परिणाम भी फर्जी जारी कर दिया। पुलिस मामले की जांच में जुटी है।
विज्ञापन
cyber crime cyber fraud
- फोटो : Adobe Stock
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
साइबर अपराधियों ने रांची (झारखंड) में साई नाथ एजुकेशनल के नाम से संचालित निजी यूनिवर्सिटी की फिशिंग वेबसाइट बना दी। उस पर छात्रों को फर्जी प्रवेश दिए और परिणाम भी दर्शाए। संस्थान के ट्रस्टी की शिकायत पर फर्जीवाड़ा का पता चला।
पुलिस की जांच में पता चला है कि धोखाधड़ी के लिए बिहार के किसी वेबसाइट डिजाइनर ने वेबसाइट तैयार की। जिस खाते में रकम जमा हुई, उसकी जानकारी बैंक से निकाली जा रही है। साई नाथ एजुकेशनल ट्रस्ट का मुख्यालय आगरा में है। ट्रस्टी चंद्र प्रकाश अग्रवाल ने पुलिस से शिकायत की। उन्होंने बताया कि यूनिवर्सिटी की आधिकारिक वेबसाइट sainathuniversity.com और sainathuniversity.net हैं।
संस्थान से जुड़ी सभी आधिकारिक सूचनाएं, प्रवेश प्रक्रिया और परिणाम केवल वेबसाइट पर ही जारी किए जाते हैं। हाल ही में एक छात्रा ने शिकायत की, बताया कि उसने 32 हजार रुपये फीस जमा की थी। मगर वह संस्थान के खाते में नहीं आई। इससे उसे परेशानी का सामना करना पड़ा। छानबीन करने पर मिलती जुलती वेबसाइट sainathuniversityresult.com फर्जी तरीके से बनाए जाने की जानकारी हुई। इस वेबसाइट के माध्यम से छात्रों को गुमराह किया जा रहा है। संस्थान की प्रतिष्ठा भी धूमिल की गई। छात्रों का भविष्य खतरे में पड़ गया है। उन्होंने पुलिस से शिकायत कर फर्जी वेबसाइट को बंद कराने की मांग की।
विज्ञापन
विज्ञापन
पुलिस की जांच में पता चला है कि धोखाधड़ी के लिए बिहार के किसी वेबसाइट डिजाइनर ने वेबसाइट तैयार की। जिस खाते में रकम जमा हुई, उसकी जानकारी बैंक से निकाली जा रही है। साई नाथ एजुकेशनल ट्रस्ट का मुख्यालय आगरा में है। ट्रस्टी चंद्र प्रकाश अग्रवाल ने पुलिस से शिकायत की। उन्होंने बताया कि यूनिवर्सिटी की आधिकारिक वेबसाइट sainathuniversity.com और sainathuniversity.net हैं।
विज्ञापन
संस्थान से जुड़ी सभी आधिकारिक सूचनाएं, प्रवेश प्रक्रिया और परिणाम केवल वेबसाइट पर ही जारी किए जाते हैं। हाल ही में एक छात्रा ने शिकायत की, बताया कि उसने 32 हजार रुपये फीस जमा की थी। मगर वह संस्थान के खाते में नहीं आई। इससे उसे परेशानी का सामना करना पड़ा। छानबीन करने पर मिलती जुलती वेबसाइट sainathuniversityresult.com फर्जी तरीके से बनाए जाने की जानकारी हुई। इस वेबसाइट के माध्यम से छात्रों को गुमराह किया जा रहा है। संस्थान की प्रतिष्ठा भी धूमिल की गई। छात्रों का भविष्य खतरे में पड़ गया है। उन्होंने पुलिस से शिकायत कर फर्जी वेबसाइट को बंद कराने की मांग की।
विज्ञापन
बिहार का है वेबसाइट डिजाइनर
डीसीपी साइबर क्राइम आदित्य सिंह ने बताया कि थाने की टीम ने वेबसाइट की जांच की। सामने आया वेबसाइट बिहार के डिजाइनर नीरज मिश्रा ने तैयार की है। इसके माध्यम से एक खाते में रकम जमा कराई गई है। संस्थान के पास फिलहाल एक ही छात्रा ने शिकायत की। अभी और भी पीड़ित सामने आ सकते हैं। प्राथमिकी में सभी पीड़ितों के नाम शामिल किए जाएंगे।
डीसीपी साइबर क्राइम आदित्य सिंह ने बताया कि थाने की टीम ने वेबसाइट की जांच की। सामने आया वेबसाइट बिहार के डिजाइनर नीरज मिश्रा ने तैयार की है। इसके माध्यम से एक खाते में रकम जमा कराई गई है। संस्थान के पास फिलहाल एक ही छात्रा ने शिकायत की। अभी और भी पीड़ित सामने आ सकते हैं। प्राथमिकी में सभी पीड़ितों के नाम शामिल किए जाएंगे।
जानें क्या है फिशिंग
डीसीपी ने बताया कि फिशिंग एक प्रकार का साइबर अपराध है। असली कंपनी, बैंक, सरकारी विभाग के नाम से मिलती जुलती वेबसाइट, ईमेल, मैसेज, लिंक तैयार किए जाते हैं। इसका मकसद आपका पासवर्ड, बैंक खाता नंबर और क्रेडिट, डेबिट कार्ड की जानकारी लेना होता है। इसके साथ ही फर्जी वेबसाइट और लिंक के माध्यम से ठगी की जाती है। असली जैसी होने के कारण लोग ठगी का शिकार हो जाते हैं। ध्यान रखें कि गूगल पर किसी वेबसाइट और ईमेल को खोलने से पहले उसकी आधिकारिक वेबसाइट से मिलान कर लें। उनके नाम में किसी तरह का अंतर होने पर वेबसाइट नहीं खोलनी चाहिए। हमेशा असली और आधिकारिक वेबसाइट को ही खोलें।
ये भी पढ़ें-UP: दूध में तैर रहे थे मक्खी-मच्छर, टैंकर से आ रही थी बदबू; खाद्य विभाग की टीम ने 1998 लीटर कराया नष्ट
डीसीपी ने बताया कि फिशिंग एक प्रकार का साइबर अपराध है। असली कंपनी, बैंक, सरकारी विभाग के नाम से मिलती जुलती वेबसाइट, ईमेल, मैसेज, लिंक तैयार किए जाते हैं। इसका मकसद आपका पासवर्ड, बैंक खाता नंबर और क्रेडिट, डेबिट कार्ड की जानकारी लेना होता है। इसके साथ ही फर्जी वेबसाइट और लिंक के माध्यम से ठगी की जाती है। असली जैसी होने के कारण लोग ठगी का शिकार हो जाते हैं। ध्यान रखें कि गूगल पर किसी वेबसाइट और ईमेल को खोलने से पहले उसकी आधिकारिक वेबसाइट से मिलान कर लें। उनके नाम में किसी तरह का अंतर होने पर वेबसाइट नहीं खोलनी चाहिए। हमेशा असली और आधिकारिक वेबसाइट को ही खोलें।
ये भी पढ़ें-UP: दूध में तैर रहे थे मक्खी-मच्छर, टैंकर से आ रही थी बदबू; खाद्य विभाग की टीम ने 1998 लीटर कराया नष्ट