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Father's Day 2020: पिता के हौसले से मिली करियर में शोहरत, अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों ने साझा किए भावुक पल
Sun, 21 Jun 2020 02:07 PM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Sun, 21 Jun 2020 02:07 PM IST
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फादर्स डे 2020: अपने पिता के साथ विभिन्न क्षेत्रों के खिलाड़ी
- फोटो : अमर उजाला
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जिंदगी के किसी भी मुकाम पर पहुंचने के लिए पिता का बच्चों के लिए संपूर्ण, अनुशासन और कभी नहीं दिखने वाला प्यार बेटे और बेटी की स्वर्णिम जीवन के लिए सबसे अहम गहने हैं। ताजनगरी के कई होनहार जो अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर शहर का नाम रोशन कर रहे हैं, उनका मानना है कि पिता के हौसले से जो ऊर्जा मिलती है, वो ही करियर में उन्हें शोहरत दिलाती है। खेलों से लेकर चित्रकारी की दुनिया में शहर का नाम रोशन कर रहे इन अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों और चित्रकारों का मानना है कि उन्हें जीवन में जो भी सफलता मिली है, उसमें उनके पिता का बड़ा योगदान रहा है। इसलिए ये कहते हैं, पिता से ही हमारा नाम है, उन्हीं से हमारी शान है।
फादर्स डे 2020: अपने पिता के साथ शहान
- फोटो : अमर उजाला
पापा को देख भर जाता है जोश: शहान (अंतरराष्ट्रीय कार रेसर)
आठ साल की उम्र से जब मैंने कार्ट चलाई, तभी से मेरे पिता शहरू मोहसिन हाथ थामे हुए हैं। मोटर रेस में लाने वाले और साथ ही समय-समय पर सीख देने वाले मेरे पिता हर चैंपियनशिप में मेरा हौसला बढ़ाते हैं। जब-जब में मायूस हुआ, तब-तब उन्होंने मेरे कंधे पर हाथ रखकर फिर मुझे मंजिल पर आगे चलने की प्रेरणा दी है। कई बार बिजनेस का काम छोड़कर मेरा पिता मुझे मोटर रेस की नई जानकारियों को बताते हैं। वह हमेशा मुझे बताते रहते हैं कि जीत के जश्न में यह कभी नहीं भूलना कि हमें अगली मंजिल की ओर बढ़ना है। मेरी आज की सभी कामयाबियों में मेरे पिता ही मेरा आधार हैं।
आठ साल की उम्र से जब मैंने कार्ट चलाई, तभी से मेरे पिता शहरू मोहसिन हाथ थामे हुए हैं। मोटर रेस में लाने वाले और साथ ही समय-समय पर सीख देने वाले मेरे पिता हर चैंपियनशिप में मेरा हौसला बढ़ाते हैं। जब-जब में मायूस हुआ, तब-तब उन्होंने मेरे कंधे पर हाथ रखकर फिर मुझे मंजिल पर आगे चलने की प्रेरणा दी है। कई बार बिजनेस का काम छोड़कर मेरा पिता मुझे मोटर रेस की नई जानकारियों को बताते हैं। वह हमेशा मुझे बताते रहते हैं कि जीत के जश्न में यह कभी नहीं भूलना कि हमें अगली मंजिल की ओर बढ़ना है। मेरी आज की सभी कामयाबियों में मेरे पिता ही मेरा आधार हैं।
फादर्स डे 2020: पिता और बहन के साथ दीपक चाहर
- फोटो : अमर उजाला
मेरे लिए छोड़ी एयरफोर्स की नौकरी: दीपक चाहर (सदस्य, टीम इंडिया)
जिस दिन मेरे पिता लोकेंद्र सिंह चाहर ने मेरे करियर के लिए एयरफोर्स की नौकरी छोड़ी, उस दिन मेरे पिता की तस्वीर मेरे दिमाग में किसी भगवान से कम नहीं थी। उस समय में काफी छोटा था। मुझे लगा कि पापा ने मेरी जिम्मेदारी बढ़ा दी है। जब भी मैं यह सोचता था कि पापा के सपनों को सच नहीं कर पाया, तो पापा का नौकरी छोड़ने का लिया गया फैसला गलत हो जाएगा। मुझे हमेशा उनकी ताकत मिलती रही। जिस दिन मेरा टीम इंडिया में चयन हुआ तो मुझसे ज्यादा खुश मेरे पिता थे। एक पिता से ज्यादा वह मेरे अच्छे दोस्त भी बनकर रहे।
जिस दिन मेरे पिता लोकेंद्र सिंह चाहर ने मेरे करियर के लिए एयरफोर्स की नौकरी छोड़ी, उस दिन मेरे पिता की तस्वीर मेरे दिमाग में किसी भगवान से कम नहीं थी। उस समय में काफी छोटा था। मुझे लगा कि पापा ने मेरी जिम्मेदारी बढ़ा दी है। जब भी मैं यह सोचता था कि पापा के सपनों को सच नहीं कर पाया, तो पापा का नौकरी छोड़ने का लिया गया फैसला गलत हो जाएगा। मुझे हमेशा उनकी ताकत मिलती रही। जिस दिन मेरा टीम इंडिया में चयन हुआ तो मुझसे ज्यादा खुश मेरे पिता थे। एक पिता से ज्यादा वह मेरे अच्छे दोस्त भी बनकर रहे।
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फादर्स डे 2020: अपने पिता के साथ क्रिकेटर दीप्ति शर्मा
- फोटो : अमर उजाला
मेरे शौक को करियर बनाया: दीप्ति शर्मा (सदस्य, इंडियन वुमेंस क्रिकेट टीम)
एक पिता का अपनी बेटी के प्रति इससे बड़ा समर्पण कोई दूसरा नहीं हो सकता, जब लोगों ने यह कहना शुरू किया कि लड़की होकर लड़कों के साथ खेलती है आपकी बेटी। बस, मेरे पिता श्रीभगवान शर्मा को यह बात दिल पर लग गई। मेरे पिता ने मेरे खेल के शौक को ही मेरा करियर बना दिया। आज मैं जो कुछ भी हूं, वह सब कुछ मेरे पिता की देन है। जिस दिन इंडियन वुमेंस क्रिकेट टीम में चयन हुआ, उस दिन शायद इस दुनिया में सबसे ज्यादा खुश मेरे पिता थे। जब कभी भी मैं मायूस हुई, उन्होंने मुझे हमेशा मेरे सिर पर हाथ रखकर आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।
एक पिता का अपनी बेटी के प्रति इससे बड़ा समर्पण कोई दूसरा नहीं हो सकता, जब लोगों ने यह कहना शुरू किया कि लड़की होकर लड़कों के साथ खेलती है आपकी बेटी। बस, मेरे पिता श्रीभगवान शर्मा को यह बात दिल पर लग गई। मेरे पिता ने मेरे खेल के शौक को ही मेरा करियर बना दिया। आज मैं जो कुछ भी हूं, वह सब कुछ मेरे पिता की देन है। जिस दिन इंडियन वुमेंस क्रिकेट टीम में चयन हुआ, उस दिन शायद इस दुनिया में सबसे ज्यादा खुश मेरे पिता थे। जब कभी भी मैं मायूस हुई, उन्होंने मुझे हमेशा मेरे सिर पर हाथ रखकर आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।
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फादर्स डे 2020: पिता के साथ अंतरराष्ट्रीय चित्रकार अलीशा राघव
- फोटो : अमर उजाला
मेरे पिता, मेरी सबसे बड़ी पूंजी: अलीशा राघव (अंतरराष्ट्रीय चित्रकार)
मेरी रचनात्मक दुनिया को मेरे पिता अनिरुद्ध राघव ने पंख लगाए। अंतरराष्ट्रीय स्तर से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक की प्रतियोगिताओं में आज तक मैंने जितने भी अवार्ड हासिल किए, वो मेरे पिता की देन हैं। ‘फादर्स डे’ मेरे लिए तो मानो रोज ही है क्योंकि मेरे पापा मेरी किसी भी इच्छा को पूरा करने के लिए हर पल तैयार रहते हैं। पेंटिंग की दुनिया में मुझे बचपन में आगे बढ़ाने के लिए उन्होंने मेरा एक बार जो हाथ पकड़ा, तो फिर कभी नहीं छोड़ा। पेंटिंग की दुनिया में मेरी हर सफलता के लिए मेरे पापा ही मेरी सबसे बड़ी ताकत हैं। सरल , सजग और स्नेहिल पिता का साया मेरी जिंदगी की सबसे बड़ी पूंजी है।
मेरी रचनात्मक दुनिया को मेरे पिता अनिरुद्ध राघव ने पंख लगाए। अंतरराष्ट्रीय स्तर से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक की प्रतियोगिताओं में आज तक मैंने जितने भी अवार्ड हासिल किए, वो मेरे पिता की देन हैं। ‘फादर्स डे’ मेरे लिए तो मानो रोज ही है क्योंकि मेरे पापा मेरी किसी भी इच्छा को पूरा करने के लिए हर पल तैयार रहते हैं। पेंटिंग की दुनिया में मुझे बचपन में आगे बढ़ाने के लिए उन्होंने मेरा एक बार जो हाथ पकड़ा, तो फिर कभी नहीं छोड़ा। पेंटिंग की दुनिया में मेरी हर सफलता के लिए मेरे पापा ही मेरी सबसे बड़ी ताकत हैं। सरल , सजग और स्नेहिल पिता का साया मेरी जिंदगी की सबसे बड़ी पूंजी है।