न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Sat, 12 Oct 2019 12:22 AM IST
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गोल्डन गर्ल आकांक्षा सिंह
- फोटो : PTI
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आगरा के डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के 85वें दीक्षांत समारोह में एक बार फिर बेटियों का दबदबा रहा। छात्राओं पर एक तरह से पदकों की बरसात हुई। 81 फीसदी पदकों पर उन्होंने कब्जा किया। छात्र महज 19 फीसदी पदक ही पा सके। हरियाणा की डॉक्टर आकांक्षा ने पहला स्थान हासिल किया। उन्हें 11 पदक मिले। संयुक्त रूप से दूसरे स्थान पर आगरा की मनिंदर कौर और मथुरा की चंचल रहीं।
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छात्रा को गोल्ड मेडल प्रदान करतीं राज्यपाल आनंदीबेन पटेल
- फोटो : अमर उजाला
दीक्षांत समारोह में 81 फीसदी पदक छात्राओं को मिलने पर मुख्य अतिथि राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने खुशी जाहिर की। राज्यपाल ने छात्राओं को स्वस्थ और सशक्त बनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जब तक बेटियां स्वस्थ नहीं होंगी, तब तक देश कुपोषण मुक्त नहीं हो सकता।
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पदक मिलने के बाद खुशी जाहिर करतीं छात्राएं
- फोटो : अमर उजाला
शुक्रवार को दीक्षांत समारोह में 121 मेडल बांटे गए। इसमें से 98 मेडल बेटियों के खाते में आए, 85 स्वर्ण और 13 रजत। छात्रों को 23 मेडल मिले, 20 स्वर्ण और तीन रजत पदक। 84वें दीक्षांत समारोह में भी छात्राओें ने बाजी मारी थी। 125 मेडल में से 106 छात्राओं को और 19 छात्रों को मिले थे। यानि पदक पाने वालों में 85 फीसदी छात्राएं और 15 फीसदी छात्र रहे थे।
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दीक्षांत समारोह में छात्राएं
- फोटो : अमर उजाला
83वें दीक्षांत समारोह में पदक पाने वालों में 83 फीसदी छात्राएं और 17 फीसदी छात्र रहे। 85वें दीक्षांत समारोह में पीएचडी और एमफिल की उपाधि पाने वालों में भी छात्राएं आगे रहीं। पीएचडी में 33 छात्रों को उपाधि मिली तो छात्राओं की संख्या 38 रही। एमफिल में 50 छात्रों को तो 77 छात्राओं को उपाधि मिली।
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आकांक्षा सिंह को सबसे अधिक 11 पदक मिले
- फोटो : PTI
11 मेडल पाने वाली डॉ. आकांक्षा हरियाणा के जिले महेंद्रगढ़ के कनीना कस्बे की रहने वाली हैं। गोल्डन गर्ल कहती हैं कि सेना, पुलिस, राजनीति, खेलों में महिलाओं का दबदबा है। वे हिमालय की चोटी से अंतरिक्ष तक पहुंच चुकी हैं। फिर भी बेटियां बोझ समझी जाती हैं। यह जानकर बहुत दुख होता है कि अभी भी बेटियों को कोख में मारा जा रहा है।
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