बांग्लादेश के खिलाफ टी-20 सीरिज में रिकॉर्ड तोड़ प्रदर्शन कर आखिरी मैच में मैन ऑफ द मैच और मैन ऑफ द सीरीज चुने गए दीपक चाहर के पिता का कहना है कि उनकी तपस्या का फल अब मिला है। वह बताते हैं कि दीपक ने इस मुकाम पर पहुंचने के लिए नेट पर एक लाख बॉल फेंकी हैं। इसकी शुरुआत आगरा में टर्फ विकेट से हुई थी।
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दीपक चाहर
- फोटो : सोशल मीडिया
लोकेंद्र चाहर ने दीपक को क्रिकेटर बनाने के लिए वायुसेना की नौकरी छोड़ दी थी। दीपक दस साल के ही थे, जब उन्हें जयपुर क्रिकेट एकेडमी में भर्ती करा दिया था। लोकेंद्र बताते हैं कि दीपक ने यह जो जादुई प्रदर्शन किया है, इसके पीछे उसकी कड़ी मेहनत है। उसने बांग्लादेश के खिलाफ 3.2 ओवर में सात रन देकर छह विकेट लिए थे। यह टी-20 के इतिहास में किसी भी बॉलर का अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है। लोकेंद्र कहते हैं, वह खुद को दुनिया का सबसे खुशनसीब पिता महसूस कर रहे हैं। आज लोग उन्हें दीपक के नाम से जानते हैं, एक पिता को और क्या चाहिए।
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दीपक चाहर
- फोटो : अमर उजाला
अमर उजाला से बातचीत में बेटे के रिकॉर्ड के बारे में बताया कि मौसम के मिजाज को देखकर उन्हें इसका आभास हो रहा था कि दीपक कुछ अलग करेगा। दीपक की स्विंग में ओस ने जान जाल दी। दूसरा उसकी समझदारी ने सोने पे सुहागे का काम किया। लोकेंद्र चाहर ने कहा कि जिस दिन नौकरी छोड़ी थी, उसी दिन यह संकल्प भी लिया कि दीपक और राहुल का क्रिकेट में कॅरियर बनाना है। राहुल दीपक के चचेरे भाई हैं।
संकल्प को दोनों ने हमेशा बल दिया। लगातार प्रेक्टिस करने और कभी हार नहीं मानने की आदत दीपक की शुरू से ही रही है। चोट लगने पर भी उसने मैदान पर जाना नहीं छोड़ा।
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क्रिकेटर दीपक चाहर (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
लोकेंद्र चाहर बताते हैं कि आठवीं के बाद दीपक नियमित स्कूल नहीं जा पाए। शुरु में तो दिन के24 घंटे भी कम लगते थे, नेट प्रेक्टिस, जिम, दौड़, उसका पूरा दिन क्रिकेट के लिए समर्पित था। उसमें उस समय जो जुनून था, वह आज भी है। दीपक 27 साल के हैं। पिता का मानना है कि वह सात-आठ साल और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलेगा।