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तस्वीरें: सामूहिक विवाह समारोह में 'बिन फेरे, हम तेरे', ताक पर वैवाहिक रस्में
Fri, 18 Jan 2019 06:24 PM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, एटा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, एटा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Fri, 18 Jan 2019 06:24 PM IST
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mukhyamantri samuhik vivah
- फोटो : अमर उजाला
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न हाथों पर मेहंदी और न ही कंगन, न सात फेरे और न ही मांग में सिंदूर। बस आहुतियां दीं और सरकारी प्रमाण पत्र लेकर शादी पूरी हो गई। यह सब हुआ भी तो वहां, जहां जिले के आला अधिकारी मौजूद थे। मौका था एटा महोत्सव के तहत आयोजित मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह समारोह का। यहां तमाम नवदंपतियों ने वैवाहिक रस्मों को निभाया ही नहीं। इस दौरान तमाम वरों ने वधू को सिंदूर तक नहीं भरा और न ही फेरे लिए। ऐसे में आयोजन के दौरान लोग असमंजस में नजर आए। यही नहीं दंपतियों की पात्रता पर भी सवाल खड़े किए गए।
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दरअसल, शुक्रवार को एटा महोत्सव में मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत विवाह समारोह का आयोजन किया गया था। जिले भर से 151 जोड़ों के आवेदन के बाद उनको कार्यक्रम में शामिल किया गया। लेकिन आयोजन के दौरान नवदंपतियों की पात्रता पर सवालिया निशान लग गए।
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समारोह में मंच से पांडित्य वर्ग मंत्रों की गूंज के साथ रस्मों को निभाने के बारे में निर्देश दे रहे थे, मगर तमाम दंपतियों ने रस्में नहीं निभाईं। इस दौरान महज 40 दंपतियों ने फेरे लेकर वचन पूरे किए। जबकि कई युगल सिर्फ खड़े रहे। इसके बाद जब मांग भरने के लिए कहा गया, तो किसी भी युगल ने मांग नहीं भरी।
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दुल्हन के हाथों में मेंहदी और कंगन भी नजर नहीं आए। यह सब देख वहां मौजूद लोगों ने युगलों की पात्रता पर सवाल खड़े करने शुरू कर दिए। जब दंपतियों से बात की गई, तो उन्होंने बात टाल दी। इससे साफ है कि लक्ष्य को पूरा करने के लिए बिन सत्यापन दंपतियोंको योजना का भागीदार बनाकर लाभ दिया जा रहा है। मामले में जिला प्रशासन के अधिकारियों ने भी कुछ बोलने से इनकार कर दिया है।
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शासन से जिले को 1500 शादियां कराने का लक्ष्य मिला है। लेकिन जिले में लाभार्थी ढूंढे नहीं मिल रहे हैं। अब लक्ष्य पूरा करना अधिकारियों के लिए सिर दर्द बन गया है। अंदेशा जताया जा रहा है कि जिम्मेदार लोग लक्ष्य पूरा करने के लिए फर्जी जोड़े बुला रहे हैं। मामले की अगर बारीकी से जांच कराई जाए तो बड़ा खुलासा हो सकता है।