देश में होली पर ब्रज का रंग चढ़ने जा रहा है। होली के लिए मथुरा जिले में तैयार हो रहे रंग और गुलाल की आपूर्ति कई राज्यों में हो रही है। त्योहार से दो माह पहले से ही यहां के गांव-शहरी क्षेत्रो में गुलाल बनाया जा रहा है। यहां तक कि खेतों और घरों की छतों पर भी रंग और गुलाल सुखाए जा रहे हैं। इस बार ब्रज की माटी में बना गुलाल देशभर में अपनी रंगीनियत बिखेरेगा।
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
ब्रज की होली देश और दुनिया में प्रख्यात है। यहां बरसाना की होली को देखने के लिए तो विदेशी पर्यटक भी आते हैं। श्रीकृष्ण जन्मस्थान, श्रीबांकेबिहारी मंदिर पर होली के रंग में रंगने लाखों श्रद्धालु आते हैं, लेकिन अब इस पवित्र भूमि पर बन रहे गुलाल के प्रति आकर्षण देखने को मिल रहा है। यहां होली के त्योहार को खास बनाने के लिए मथुरा की 50 से अधिक फैक्टरियों में रंग और गुलाल बनाए जा रहे हैं। यहां बने गुलाल के प्रति पवित्रता का भाव भी लोगों को अपनी ओर आकर्षित करता है।
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गुलाल बनाने में जुटीं महिलाएं
- फोटो : अमर उजाला
रंगों के कारोबार से जुड़े संजय मित्तल ने बताया कि रंग-गुलाल के कारोबार में पड़ोसी जिला हाथरस के साथ मथुरा का बड़ा नाम है। सालभर में करीब 1 हजार टन गुलाल बनता है। इसका कारोबार करीब 35 से 50 करोड़ तक पहुंच जाता है। यहां बना गुलाल दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, पंजाब, महाराष्ट्र, गुजरात, पश्चिम बंगाल और बिहार तक जाता है।
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गुलाल बनाने में जुटीं महिलाएं
- फोटो : अमर उजाला
मथुरा के कारोबारी हर्बल गुलाल अधिक बनाते हैं। यह गुलाल अरारोट से बनता है। बरसाना और नंदगांव की होली से लेकर फिल्म इंडस्ट्री तक मथुरा में बना यही इस्तेमाल होता है। सतीश अग्रवान ने बताया कि इस हर्बल गुलाल में रसायनों का प्रयोग नहीं किया जाता है। यही कारण है कि इस गुलाल से कोई एलर्जी नहीं होती है। हालांकि हर्बल गुलाल मार्बल पाउडर के गुलाल से पांच गुना महंगा होता है।
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मथुरा में बनाया जा रहा गुलाल
मथुरा के नेशनल हाईवे स्थित राधावैली के समीप, ट्रांसपोर्ट नगर, आजमपुर, छटीकरा के समीप, चैतन्य बिहार कालोनी, गांव तेहरा, अल्हेपुर, राया में होली के लिए गुलाल बनाया जा रहा है।