सोशल मीडिया पर अपनी निजी जानकारी साझा नहीं करें। अनजान लोगों की फ्रेंड रिक्वेस्ट स्वीकार नहीं करें। अपनी निजता का पूरा ख्याल रखें। समस्या होने पर पुलिस की मदद लें। आगरा में सोमवार को क्वीन विक्टोरिया गर्ल्स इंटर कॉलेज में महिला सशक्तीकरण पर आयोजित कार्यशाला में सीओ एत्मादपुर अर्चना सिंह ने छात्राओं को इन शब्दों में सोशल मीडिया के खतरों से आगाह करते हुए सुरक्षा, सतर्कता के बारे में जरूरी बातें बताईं। अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से अपराजिता के तहत तेजाब हमले, लिंग समानता और करियर विकास के मुद्दे पर इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। अर्चना सिंह ने सरल अंदाज में छात्राओं से संवाद किया। उन्होंने कहा कि कभी घबराना नहीं चाहिए। नारी शक्ति का पर्याय है।
अपराजिता: छात्राओं को 'सुरक्षा मंत्र', महिला पुलिस अधिकारी ने कहा- मुसीबतों से डरें नहीं, मुकाबला करें
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सीओ अर्चना सिंह ने कहा कि मुसीबत में फंस जाएं तो डरें नहीं, उसका मुकाबला करें। अपना लक्ष्य तय करें। तैयारी करें। सफलता जरूर मिलेगी। मां-बाप की बात हमेशा मानें। कहीं कोई परेशान करे तो उनको बताने से नहीं हिचकें। सीओ ने प्रदेश सरकार के मिशन शक्ति अभियान के बारे में भी बताया। उन्होंने कहा कि हर किसी को स्मार्ट फोन अपने पास रखना चाहिए लेकिन इस्तेमाल में सावधानी जरूरी है। स्मार्ट फोन के जरिये की गई जरा सी गलती साइबर फ्राड का शिकार बना सकती है। फर्जी आईडी बनाकर अपराधी परिचितों से पैसा मांग सकते हैं। फेसबुक या अन्य सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर प्राइवेसी का ऑप्शन ऑन रखें। इसमें फ्रेंड्स ओनली पर क्लिक करें। इससे आपकी निजी जानकारी आपके दोस्तों को ही दिखाई देगी। अनजान लोग नहीं देख पाएंगे।
क्वीन विक्टोरिया गर्ल्स इंटर कालेज की प्राचार्य रीना रॉबर्ट्स ने कहा कि छात्राएं किसी तरह की समस्या होने पर डरें नहीं। अपनी शिक्षिका को बता सकती हैं। वह उनकी पूरी मदद करेंगी। कार्यक्रम का संचालन मेघना रॉबर्ट्स ने किया। इस दौरान शीरोज हैंग आउट कैफे के पब्लिक रिलेशन अजय तोमर, स्कूल की शिक्षिकाएं मौजूद रहीं।
कोई परेशान करे तो 112, 1090 पर करें शिकायत
पुलिस कंट्रोल रूम के 112 नंबर पर कॉल करें। पांच मिनट में पुलिस मदद करेगी। थानों में महिला हेल्प डेस्क पर शिकायत सुनने के लिए महिला कर्मचारी तैनात हैं। महिला हेल्प लाइन नंबर 1090 पर शिकायत कर सकती हैं। घर बैठे पुलिस आपकी सहायता करेगी।
एसिड अटैक पीड़िता एवं शीरोज हैंगआउट कैफे की सदस्य रूपा ने बताया कि उन पर सौतेली मां ने तेजाब फेंक दिया था। तब ऐसा लगा कि जिंदगी खत्म सी हो गई हो। पांच साल तक घर में कैद रहीं लेकिन हारी नहीं। परिवार के कुछ सदस्यों के साथ से अब वह भी अन्य लड़कियों की तरह जी रही हैं। इसलिए किसी तरह की मुसीबत में परेशान न हों। दोस्तों की मदद लेने में हिचकिचाएं नहीं। कैफे की अन्य सदस्य शबनम ने बताया कि उन पर 15 साल की उम्र में तेजाब फेंका गया था। वर्ष 2016 में उन्होंने बेटे को खो दिया। लेकिन संघर्ष करतीं रही। सफलता मिली। अब बेटी का पालन पोषण कर रही हैं। छांव फाउंडेशन के माध्यम से लोगों को जागरूक कर रही हैं।
छांव फाउंडेशन के निदेशक आशीष शुक्ला ने कहा कि वह आठ साल से एसिड अटैक के मुद्दे पर कार्य कर रहे हैं। शीरोज हैंगआउट कैफे का उद्देश्य महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना है। एसिड अटैक पीड़िताओं को समाज की मुख्यधारा से जोड़ना है। जीवन में कई मौकों पर संघर्ष का सामना करना पड़ता है। डटकर मुकाबला करें। एक दिन सफलता जरूर मिलती है।