समूचा ब्रज होली के रंगों में सराबोर है। बरसाना, नंदगांव, मथुरा और वृंदावन में होली का रंग बरस रहा है। ऐसे में कान्हा का गांव गोकुल कैसे पीछे रहने वाला। शनिवार को गोकुल में सतरंगी छटा बिखरी। गोकुल में छड़ीमार होली का आयोजन हुआ। इस अनूठी होली को देखने के लिए देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु पहुंचे।
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ठाकुरजी का डोला
- फोटो : Amar Ujala
शनिवार दोपहर को सबसे पहले श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप को फूलों से सजीधजी पालकी में विराजमान कर शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा में श्रद्धालु होली के गीतों पर नाचते-गाते हुए चल रहे थे। गोकुल की गलियों से होकर निकले डोले का पुष्प वर्षा कर स्वागत किया गया।
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होली 2020
- फोटो : Amar Ujala
दोपहर बाद ठाकुर जी का डोला मुरलीधरघाट पर पहुंचा। यहां सोलह शृंगार कर तैयार गोपियां हाथों में छड़ी लेकर कान्हा का इंतजार कर रहीं थीं। कान्हा के सखा बाल ग्वाल भी अपनी पारंपरिक वेशभूषा में पहुंचे। ठाकुरजी से अनुमति लेने के साथ ही गोपियों ने बाल गोपाल के साथ छड़ी मार होली खेली।
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होली 2020
- फोटो : Amar Ujala
गोस्वामी समाज ने श्रद्धालुओं पर ठाकुरजी का प्रसादी रंग, गुलाल-अबीर डाला तो श्रद्धालु रंगों से सराबोर हो गए। गोकुल में देश-विदेश से आए श्रद्धालुओं की भीड़ थी। हर कोई गोकुल की गलियों में बरस रहे रंग में सराबोर होने की चाह में पहुंचा।
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होली 2020
- फोटो : Amar Ujala
भगवान श्रीकृष्ण का जन्म मथुरा में हुआ और उनका बचपन गोकुल में बीता। गोकुल में भगवान कृष्ण के साथ लाड़ लड़ाया जाता है, यही कारण है कि उनके बाल स्वरूप के साथ होली खेली जाती है। भक्ति भाव के साथ गोकुल में छड़ी मार होली खेली गई। गोकुल की गलियां रंग, गुलाल और अबीर से रंगीन हो गईं।