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तस्वीरें: 210 किमी तक विचरण करते हैं चंबल के घड़ियाल, शोध में सामने आई रोचक जानकारी
Fri, 20 Nov 2020 12:08 AM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बाह (आगरा)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बाह (आगरा)
Published by: मुकेश कुमार
Updated Fri, 20 Nov 2020 12:08 AM IST
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चंबल नदी में घड़ियाल
- फोटो : अमर उजाला
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चंबल के घड़ियाल 200 किमी से ज्यादा का सफर कर अपने ठिकाने पर लौट आए हैं। इन घड़ियालों ने चंबल की बाढ़ में बसई डांग (धौलपुर, राजस्थान) से भरेह (इटावा) तक करीब 210 किमी का सफर तय किया। मद्रास क्रोकाडाइल बैंक ट्रस्ट के शोधार्थियों ने रेडियो सिग्नल के जरिये उनकी गतिविधियों को ट्रैक किया है।
घड़ियाल की पूंछ में लगा यंत्र
- फोटो : अमर उजाला
चंबल नदी में वर्ष 1979 से घड़ियालों का संरक्षण हो रहा है। डॉ. जैफ्री लैंग के नेतृत्व में ट्रस्ट के शोधार्थी पंकज कुमार, जैलाबुद्दीन, दीपू मिश्रा, आंनद कुमार घड़ियाल इकोलॉजी प्रोजेक्ट पर 10 साल से अध्ययन कर रहे है। उन्होंने दिसंबर में 14 घडियालों की पूंछ को टैग किया था। 1,339 दिन तक रेडियो सिग्नल के साथ एक घड़ियाल के लिए 652 स्थान दर्ज किए गए।
चंबल नदी के किनारे खड़े शोधार्थी
- फोटो : अमर उजाला
शोधार्थी जैलाबुद्दीन ने बताया कि बडे़ मादा घड़ियाल बाढ़ के दौरान बाह के नंदगवां से भरेह इटावा तक पहुंच गए थे। अपस्ट्रीम में बसई डांग धौलपुर तक विचरण दर्ज किया गया। उन्होंने बताया कि 2021-22 में घड़ियालों को पकड़कर बरौली अपस्ट्रीम में सेटेलाइट टैग लगाने की योजना है।
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चंबल नदी में घड़ियाल
- फोटो : अमर उजाला
छोटे घड़ियालों का 10 किमी का विचरण
ड्रोन से ली गई तस्वीर में बाह के नंदगवां घाट पर टैग किए गए 4 घड़ियालों में से 3 घड़ियाल दिखे। शोधार्थियों के मुताबिक छोटे घड़ियालों का मूवमेंट 5 से 10 किमी के बीच दर्ज किया गया है।
ड्रोन से ली गई तस्वीर में बाह के नंदगवां घाट पर टैग किए गए 4 घड़ियालों में से 3 घड़ियाल दिखे। शोधार्थियों के मुताबिक छोटे घड़ियालों का मूवमेंट 5 से 10 किमी के बीच दर्ज किया गया है।
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चंबल नदी में घड़ियाल
- फोटो : अमर उजाला
घड़ियालों की 80 फीसदी आबादी चंबल में
दुनियाभर में घड़ियालों की आबादी संकट में है। घड़ियालों की 80 फीसदी आबादी चंबल में मौजूद है। हर साल इनकी संख्या बढ़ रही है। पिछले साल गणना में 1,876 घड़ियाल मिले थे।
दुनियाभर में घड़ियालों की आबादी संकट में है। घड़ियालों की 80 फीसदी आबादी चंबल में मौजूद है। हर साल इनकी संख्या बढ़ रही है। पिछले साल गणना में 1,876 घड़ियाल मिले थे।