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मेघालय में हुई फौजी की मौत, सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार
Sat, 29 Jun 2019 12:10 AM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कासगंज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कासगंज
Published by: Abhishek Saxena
Updated Sat, 29 Jun 2019 12:10 AM IST
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रविंद्र कुमार (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
जिले के एक फौजी की मेघालय में ड्यूटी के दौरान बीमारी के चलते मौत हो गई। फौजी का शुक्रवार को पूरे सैनिक सम्मान के साथ उसके पैतृक गांव में अंतिम संस्कार कर दिया गया। अधिकारियों ने उन्हें अंतिम सलामी दी।
बीएसएफ जवान को अंतिम सलामी देते प्रशासनिक व पुलिस अधिकारी
- फोटो : अमर उजाला
रविंद्र कुमार पुत्र काली चरन निवासी ग्राम गढ़िया सनौडी सिकंदरपुर वैश्य बीएसएफ में क्लर्क के पद पर तैनात थे। 26 जून को अचानक उनकी तबियत खराब हो गई। उन्हें मेघायल के अस्पताल में भर्ती कराया गया। 27 जून को देर सायं उनकी मौत हो गई। शुक्रवार को सैनिकों की टुकड़ी उसके शव को लेकर पैतृक गांव पहुंची। जहां सैनिकों ने उसे अंतिम सलामी दी। इस मौके पर एसडीएम शिवकुमार सिंह, तहसीलदार तिमराज सिंह, नायव तहसीलदार आसिफ़ अली खान, क्षेत्राधिकारी गवेन्द्रपाल गौतम, थानाध्यक्ष हरि सिंह वर्मा आदि अधिकारियों ने भी उसे अंतिम सलामी दी।
रविंद्र कुमार का फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
फौजी रविंद कुमार होली के त्योहार पर छुट्टी लेकर अपने घर आए थे। वह 23 मार्च को परिजनों से फिर से आने का वादा करके अपनी ड्यूटी पर वापस लौट गए। रविंद्र अपने परिवार में सभी भाइयों में बड़े थे।
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बीएसएफ जवान की पत्नी और बच्ची
- फोटो : अमर उजाला
बीमारी के बाद फौजी को अपनी मौत का अहसास हो गया था। उन्होंने 26 जून को सायं 6 बजे अपनी पत्नी आरती को फोन किया। पत्नी से इकलौती बेटी रश्मि (4) वर्ष का पूरा ध्यान रखने और अच्छी शिक्षा आदि दिलाने, बेटा की तरह पालने के लिए कहा। पति की इस तरह की बात सुनकर पत्नी सन्न रह गई। उसने अपने ससुर कालीचरन तथा सास उर्मिला को भी इस बारे में जानकारी दी। इसके बाद परिजन उनसे मिलने मेघायल जाने के लिए तैयारियां कर रहे थे, लेकिन इसके बाद फौजी की मौत की सूचना मिली।
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सेना की टुकड़ी ने पैतृक गांव पहुंचकर दी अंतिम सलामी
- फोटो : अमर उजाला
फौजी रविंद्र तीन भाइयों में सबसे बड़े थे। उसके दूसरे नबंर का भाई अशोक है। जबकि सबसे छोटे भाई चंद्रशेखर ने स्नातक कर लिया है। वह नौकरी की तलाश में है। बड़े बेटे की मौत से परिजन काफी सदमे में हैं।