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'खाकी' के साथ निभा रहे इंसानियत का फर्ज, रक्तदान कर बचा रहे दूसरों की जान
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Mon, 12 Oct 2020 12:28 AM IST
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रक्तदान करने वाले पुलिसकर्मी
- फोटो : अमर उजाला
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रक्तदान से बड़ा कोई दान नहीं होता। ढाई साल पहले इसी स्लोगन के साथ उत्तर प्रदेश पुलिस के डायल 112 सेवा पर तैनात आरक्षी सुंदर सिंह ने पुलिस मित्र रक्तदान समूह व्हाट्सएप ग्रुप 25 फरवरी 2018 को बनाया था। इसकी शुरुआत में ग्रुप के मात्र 20 से 25 सदस्य थे। धीरे-धीरे करके ग्रुप के सदस्यों की संख्या बढ़ती चली गई। अब 70 पुलिसकर्मी हो गए हैं। इसके साथ ही 21 आम नागरिक हैं। आगरा के अलावा इस ग्रुप से अलीगढ़, हाथरस, एटा, मथुरा, मैनपुरी और लखनऊ के पुलिसकर्मी जुड़ चुके हैं।
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सिपाही धीरज चाहर
- फोटो : अमर उजाला
पुलिस मित्र रक्तदान समूह के सदस्य सिपाही धीरज चाहर ने बताया कि जिन लोगों को रक्त की जरूरत होती है, उनके नाम, मोबाइल नंबर और ब्लड ग्रुप के साथ व्हाट्सएप ग्रुप पर जानकारी साझा की जाती है। जिसका ब्लड ग्रुप मिलता है, वह खुद जरूरतमंद से संपर्क कर लेता है। ग्रुप के कई सदस्य पांच से 18 बार तक रक्तदान कर चुके हैं। इन सदस्यों को कई संस्थाएं भी सम्मानित कर चुकी हैं।
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सिपाही अंजना चौधरी
- फोटो : अमर उजाला
अभियोजन कार्यालय पर तैनात सिपाही अंजना चौधरी ने कहा कि मैं जरूरतमंद लोगों को रक्तदान कर चुकी हूं। इसमें किसी तरह की समस्या भी नहीं होती है। लोगों को रक्तदान करके काफी अच्छा लगता है। यही अपील करूंगी कि रक्तदान से बड़ा कोई दान नहीं है।
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डायल 112 के सिपाही सुंदर सिंह
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डायल 112 के सिपाही और ग्रुप के एडमिन सुंदर सिंह ने कहा कि हर किसी स्वस्थ व्यक्ति को रक्तदान करना चाहिए। रक्तदान से किसी की जान बचाई जा सकती है। इस उद्देश्य के साथ ही यह ग्रुप बनाया गया है। हम लोग पुलिस कंट्रोल रूम पर कॉल आने पर भी लोगों की मदद के लिए जाते हैं।
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यातायात पुलिस के सिपाही फिरोज अहमद
- फोटो : अमर उजाला
यातायात पुलिस के सिपाही फिरोज अहमद ने कहा कि मैं अब तक आठ बार रक्तदान कर चुका हूं। ग्रुप के माध्यम से जब भी पता चला कि रक्त देना है, मैं देने गया। आगे भी यही प्रयास रहेगा। रक्त देने से किसी तरह की समस्या भी नहीं होती है।
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