सात महीने बाद वृंदावन के श्रीबांकेबिहारी मंदिर के पट शनिवार को भक्तों के लिए खोल दिए गए। पहले दिन ही सवा घंटे देरी से मंदिर खोले जाने पर प्रबंधक और सेवायत में विवाद हो गया। प्रबंधक का आरोप है कि सेवायत ने कुछ यजमानों को देहरी पूजा कराई, जिसमें देरी हुई। सेवायत ने आरोप निराधार बताया। दोनों में विवाद बढ़ा तो पुलिस को हस्तक्षेप कर मामला शांत करना पड़ा। मंदिर देरी से खुलने के कारण बाहर लाइन में लगे हजारों भक्तों को ठाकुर जी के दर्शन के लिए काफी इंतजार करना पड़ा। इस दौरान सामाजिक दूरी का नियम तार-तार होता रहा।
बांकेबिहारी मंदिर: खास को दिया प्रवेश, आम भक्तों की लगी कतार, पहले दिन ही विवाद, नियम भी तार-तार
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तय कार्यक्रम के अनुसार शनिवार को प्रात: आठ बजे से भक्तों के लिए दर्शन शुरू होने थे, लेकिन यह प्रक्रिया 9.07 बजे शुरू हो सकी। ठाकुरजी के दर्शन के लिए तड़के से भक्तों की भीड़ उमड़ने लगी। सुबह सात बजे के बाद बांकेबिहारी मंदिर को जाने वाली गलियों में पैर रखने तक जगह नहीं बची। नौ बजे मंदिर के द्वार खुलने से भीड़ और बढ़ती गई। हजारों भक्तों के बीच सामाजिक दूरी का पालन नहीं हो सका। बहुत से श्रद्धालु मास्क लगाकर भी नहीं आए थे।
मंदिर प्रबंधक मुनीष कुमार ने आरोप लगाया कि सेवायत ने आठ बजे खास यजमानों के साथ मंदिर में प्रवेश किया। इस कारण श्रद्धालुओं के लिए मंदिर खोलने में देरी हुई। यजमानों की संख्या को लेकर भी प्रबंधक और सेवायत में विवाद हुआ। बाद में सिर्फ पांच लोगों को ही सेवायत के साथ मंदिर में प्रवेश करने की अनुमति दी गई। मंदिर के पट खुलने के समय पर देहरी पूजन शुरू हो सका, जिसमें करीब एक घंटे से अधिक समय लगा। इससे आम भक्त श्रीबांकेबिहारी की गलियों में दर्शन खुलने का इंतजार करते रहे।
श्रीबांकेबिहारी मंदिर के सेवायत शैलेंद्र गोस्वामी ने कहा कि मैं अकेला सुबह साढ़े पांच बजे मंदिर सेवा के लिए गेट नंबर चार पर आया तो सुरक्षाकर्मी ने रोक दिया। इस पर वापस चले गया, फिर मैं आठ बजे तक बैठा रहा। इसके बाद मुझे प्रवेश दिया गया। कुछ श्रद्धालुओं को पूजा कराने का आरोप गलत है। यहां सभी लोग पूजा करने ही तो आते हैं। मेरे साथ हुए व्यवहार की शिकायत डीएम, एसएसपी और मंदिर के प्रशासक से की जाएगी।
श्रीबांकेबिहारी मंदिर के प्रबंधक मुनीष कुमार शर्मा ने बताया कि शनिवार की मंदिर सेवा के सेवायत शैलेंद्र गोस्वामी ने अपने यजमानों को पूजन कराने के लिए मंदिर के पट निर्धारित समय के बाद खोले हैं। उन्होंने अपने स्वार्थ वश पहले यजमानों को पूजन कराया है। इस दौरान हजारों भक्त दर्शन के लिए लाइन में लगकर इंतजार करते रहे। इसे उचित नहीं कहा जा सकता है।