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निर्भया केस: अधिवक्ता बोले- दरिंदों को फांसी देने में देरी न हो, कानून में किया जाए संशोधन

Fri, 07 Feb 2020 12:15 AM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Published by: मुकेश कुमार Updated Fri, 07 Feb 2020 12:15 AM IST
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Aparajita 100 Million Smiles advocates Samvad For Nirbhaya Justice
संवाद कार्यक्रम में अधिवक्ता - फोटो : अमर उजाला
निर्भया कांड के दरिंदों को फांसी देने में देरी नहीं होनी चाहिए। संसद ऐसा कानून बनाए जिससे ऐसे सभी दरिंदों को जल्द से जल्द फांसी मिले। अगर एक केस में एक से ज्यादा अपराधी हैं तो दया याचिका का अधिकार सबको अलग-अलग नहीं मिलना चाहिए...। यह कहना है आगरा के अधिवक्ताओं का। 
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अपराजिता अभियान के तहत अमर उजाला कार्यालय में बृहस्पतिवार को आयोजित संवाद कार्यक्रम में अधिवक्ताओं ने एक सुर में कहा कि दुष्कर्म के मामलों में इंसाफ में देरी नाइंसाफी है। जिस केस में सुप्रीम कोर्ट तक सजा सुना चुका हो और राष्ट्रपति दया याचिका खारिज कर चुके हों, उसमें अपील का अधिकार नहीं होना चाहिए।
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'कानून में संशोधन किया जाए'

दुष्कर्मियों की फांसी को टालने के लिए जो भी याचिका की गई, वो कानून के तहत की गई। इसलिए जरूरी है कि कानून में संशोधन किया जाए। दरिंदों को फांसी मिलेगी, तो पूरे देश में अच्छा संदेश जाएगा।-  विमलेश आनंद, विशेष लोक अभियोजक (पॉक्सो एक्ट)
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इंसाफ में देरी नाइंसाफी के बराबर है। सात साल का इंतजार हो चुका है। अब और न हो। दुष्कर्म के मामलों में जल्द से जल्द सजा दिलाने वाला कानून बनना चाहिए।-  मधु शर्मा, एडीजीसी, क्राइम

'ऐसा कानून बने, जिससे जल्द फांसी मिले'

निर्भया कांड के बाद कानून बदला, उससे कई अपराधियों को सजा मिली। अब ऐसा कानून बनना चाहिए जिससे फांसी दिए जाने में देरी न होने पाए।-  मंजू द्विवेदी, सदस्य एडवोकेट आगरा एसोसिएशन

निर्भया केस में जेलर को ध्यान देना चाहिए था कि सुप्रीम कोर्ट से फांसी की सजा होते ही सभी दरिंदों की दया याचिका एक साथ और जल्दी की जाती। कानून में भी इसकी व्यवस्था होनी चाहिए कि जब एफआईआर एक है, चार्जशीट एक है, तो दया याचिका अलग-अलग करने का अधिकार न हो।- अधिवक्ता श्रेष्ठा मिश्रा, सदस्य एडवोकेट आगरा एसोसिएशन

यह सिर्फ एक मामला नहीं है, न जाने कितनी निर्भयाओं के दरिंदों को सजा-ए-मौत की सजा हो जाने के बाद भी फांसी नहीं मिली है। इंसाफ में देरी से भरोसा टूटता है।-  रेनू प्रजापति, सदस्य एडवोकेट आगरा एसोसिएशन

आगरा में भी कई ऐसे मामले हुए हैं। बच्चियों के साथ दरिंदगी हुई है। निर्भया केस में फांसी मिलेगी तो दरिंदों में भय पैदा होगा। देरी होने से उनका दुस्साहस बढ़ता है।- सरोज यादव, सदस्य एडवोकेट आगरा एसोसिएशन 

'दुष्कर्म के मामले कम नहीं हुए'

निर्भया कांड के बाद देश में दुष्कर्म के मामले कम नहीं हुए। ये तभी कम हो सकते हैं जब फांसी की सजा जल्द से जल्द मिले। -  धनंजय, सदस्य एडवोकेट आगरा एसोसिएशन

इंसाफ वही है जो जल्द मिले। पीड़ित को चक्कर क्यों लगाने पड़ें? निर्भया के मां से पूछो, उन पर क्या गुजर रही है।- दीपिका, सदस्यग्रेटर बार आगरा 

जिन दरिंदों ने निर्ममता की हदें पार कर दीं, उन पर दया कैसी? उन्हें दया याचिका अधिकार ही क्यों दिया जाए? बार बार दया याचिका का प्रावधान कानून में ही नहीं होना चाहिए।- रोहन सिंह , सदस्य ग्रेटर बार आगरा 

फांसी जल्द देनी चाहिए
दिल्ली हाईकोर्ट ने आदेश दिया है कि सभी याचिकाएं सात दिन में निपटा दी जाएं। उम्मीद जगी है कि पूरा देश जिस फांसी का इंतजार कर रहा है, वह अब जल्द दे दी जाएगी।- केसी शर्मा, अध्यक्ष एडवोकेट आगरा एसोसिएशन
 

'फांसी होने से अन्य मामलों में होगा इंसाफ'

फांसी में देरी से गलत संदेश जा रहा है। इस केस में फांसी होगी, तो इस तरह के अन्य मामलों में इंसाफ का रास्ता खुलेगा।-  बीएस फौजदार, सदस्य ग्रेटर बार आगरा

कानून में फांसी टालने का रास्ता है, इसे दरिंदे अपना रहे हैं। कानून में संशोधन कर इस रास्ते को बंद करना चाहिए ताकि भविष्य में कोई इसका इस्तेमाल न कर सके।- चौधरी अजय सिंह, संयोजक जनमंच

कानून में संशोधन किया जाए। ऐसे मामलों को जल्द से जल्द निपटाने की व्यवस्था की जाए। अपराधियों को सजा मिलने से ही समाज में सुरक्षा का संदेश जाता है।-  आरएस यादव, सचिव, एडवोकेट आगरा एसोसिएशन
 
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