एटा में कोरोना संक्रमण की तीसरी लहर से निपटने के लिए मंगलवार को हुई मॉक ड्रिल में व्यवस्थाओं की पोल खुल गई। मेडिकल कॉलेज के एमसीएच (मदर एंड चाइल्ड) विंग में स्थित पीडियाट्रिक इन्टेंसिव केयर यूनिट (पीकू) में मॉक ड्रिल के दौरान एंबुलेंस फेल रही। आभासी बीमार दो बच्चों को बाइक से लाना पड़ा। जबकि एक बच्चे को एक घंटे में शहर के शांतिनगर से बिना ऑक्सीजन के एंबुलेंस लेकर पहुंची। स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की मॉनिटरिंग के लिए लखनऊ से आए जेडी हेल्थ डॉ. सोमेंद्र नाथ के सामने मॉक ड्रिल हुई थी। उन्होंने नाराजगी जाहिर की।
कोरोना की तीसरी लहर को लेकर होने वाले मॉक ड्रिल के लिए संयुक्त निदेशक स्वास्थ्य मंगलवार सुबह 11 बजे एमसीएच विंग पहुंच गए। स्वास्थ्य विभाग की ओर से मरीज का ही चयन नहीं हो पाया। दोपहर 12.10 बजे शहर के मोहल्ला शांतिनगर निवासी एक स्टाफ नर्स ने अपने 15 वर्षीय बेटे आर्यन को लाने के लिए एंबुलेंस को कॉल किया। दोपहर 1.02 बजे बिना ऑक्सीजन के एंबुलेंस बच्चे को लेकर पहुंची और गेट पर ही उतार दिया।
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मॉक ड्रिल: मरीज को ले जाते स्वास्थ्यकर्मी
- फोटो : अमर उजाला
मरीज को दो मिनट में चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों ने ऑक्सीजन और वेंटिलेटर की सुविधा उपलब्ध कराई। एंबुलेंस व्यवस्था से खफा और दो घंटे तक इंतजार करते रहे संयुक्त निदेशक स्वास्थ्य ने नाराजगी जताई।
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मॉक ड्रिल: मरीज को स्ट्रेचर पर लिटाते स्वास्थ्यकर्मी
- फोटो : अमर उजाला
एंबुलेंस मैनेजर विष्णु यादव को बुलाकर शिकायत की गई। इसके बाद दो और मरीजों को लाकर मॉक ड्रिल होनी थी, लेकिन एंबुलेंस दो घंटे बाद भी नहीं ला सकी, तो बाइक से मरीजों को लाकर रिहर्सल की गई।
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मॉक ड्रिल के दौरान अधिकारी और स्वास्थ्यकर्मी
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संयुक्त निदेशक स्वास्थ्य ने एमसीएच विंग में ऑक्सीजन के सारे प्वाइंट चालू कराकर आपूर्ति क्षमता को देखा। वेंटिलेटर ऑपरेटरों से मरीजों के उपचार को लेकर तमाम सवाल किए। वह स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्थाओं से संतुष्ट नजर आए।
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मॉक ड्रिल: स्वास्थ्यकर्मियों को निर्देश देते जेडी हेल्प
- फोटो : अमर उजाला
संयुक्त निदेशक स्वास्थ्य डॉ. सोमेंद्र नाथ ने बताया कि कोरोना की तीसरी लहर को लेकर एमसीएच विंग में फुल रिहर्सल की गई। एंबुलेंस की व्यवस्थाएं बेहद खराब रही हैं। इसकी शिकायत स्थानीय मैनेजर से की गई है और लखनऊ में भी की जाएगी। ऑक्सीजन, वेंटिलेटर, दवाओं आदि की व्यवस्थाएं ठीक पाई गईं।