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Chambal River: चंबल में बाढ़ से पहले लहरों को चीरना सीख रहे नन्हें घड़ियाल, रोमांचित करने वाली हैं ये तस्वीरें

Thu, 14 Jul 2022 08:25 PM IST
मुकेश कुमार संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा Published by: मुकेश कुमार Updated Thu, 14 Jul 2022 08:25 PM IST
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alligators swimming with waves before the floods in Chambal River
चंबल में जलक्रीड़ा करते घड़ियाल - फोटो : अमर उजाला

राजस्थान में हो रही बारिश से चंबल नदी का जलस्तर बढ़ रहा है। इससे लहरों संग घड़ियाल शिशुओं की अठखेलियां भी बढ़ गई हैं। वयस्क घड़ियाल की पीठ पर सवार शिशुओं को देखने नदी किनारे के ग्रामीणों की भीड़ भी जुटी रही है। आगरा जिले के बाह क्षेत्र के गांव सिमराई के प्रधान जयवीर सिंह, तासौड़ के प्रधान अजय कौशिक ने बताया कि नदी में घड़ियाल शिशुओं की जलक्रीड़ा ग्रामीणों को रोमांचित कर रही है। रेंजर आरके सिंह राठौड़ ने बताया कि नदी का जल स्तर बढ़ने के साथ ही लहरों संग तैरते घड़ियाल शिशुओं पर वन विभाग नजर रख रहा है।



बता दें कि दुनिया में लुप्त प्राय स्थिति में पहुंचे घड़ियालों के लिए चंबल नदी संजीवनी बनी है। यहां घड़ियालों का संरक्षण वर्ष 1979 से हो रहा है। हर साल नदी में घड़ियालों का कुनबा बढ़ रहा है। जून महीन में करीब 2700 नन्हें घड़ियालों को नदी में छोड़ा गया था। अब इनकी अठखेलियां देखने को मिल रही हैं। 

alligators swimming with waves before the floods in Chambal River
चंबल में छोड़े गए नन्हें घड़ियाल - फोटो : अमर उजाला
रेंजर आरके सिंह राठौड़ ने बताया कि घड़ियाल के शिशुओं का सर्वाइवल (बचने की दर) करीब पांच फीसदी रहता है। बचने वाले घड़ियाल शिशुओं की दर बढ़ाने के लिए हैचिंग के बाद से ही विभाग इनकी देखभाल कर रहा है। 
 
alligators swimming with waves before the floods in Chambal River
चंबल नदी में नन्हें घड़ियाल - फोटो : अमर उजाला
हर साल आने वाली बाढ़ में बहकर शिशुओं की ज्यादा मौत होती है। लेकिन बाढ़ से पहले पानी में लहरों के विरुद्ध तैरने में शिशुओं के अभ्यस्त होने से इनके बचने की संभावना बढ़ गई है। उन्होंने बताया कि राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश से होकर बहने वाली चंबल नदी में 1979 से घड़ियालों का संरक्षण हो रहा है। 
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alligators swimming with waves before the floods in Chambal River
अंडों से निकलते घड़ियाल के बच्चे (फाइल)
मार्च के आखिर से अप्रैल तक चंबल की बालू में घड़ियालों ने 147 नेस्टों में अंडे दिए थे। एक नेस्ट में 25 से 60 अंडे थे। इनसे औसतन 32 बच्चे निकलते हैं। नेस्टिंग के समय पर वन विभाग ने जीपीएस से लोकेशन ट्रेस कर जाली लगाई थी ताकि जानवर अंडों को नष्ट ना कर सकें। 
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alligators swimming with waves before the floods in Chambal River
चंबल नदी में छोड़े गए घड़ियाल (फाइल)
इस बार जून में अंडों से निकलने के बाद 2700 नन्हें घड़ियालों को चंबल नदी में छोड़ा गया। बीते दिनों से राजस्थान और मध्य प्रदेश में हो रही बारिश से चंबल का जलस्तर बढ़ रहा है। बढ़ते जलस्तर के बीच लहरों में नन्हें घड़ियाल तैरने लगे हैं। यह नजारा ग्रामीणों को रोमांचित कर रहा है। 
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