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आगरा-मथुरा में हवा-पानी 'खतरनाक', औद्योगिक क्षेत्रों में प्रदूषण की रिपोर्ट में मिला यह स्थान
Sun, 17 Nov 2019 09:36 PM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Sun, 17 Nov 2019 09:36 PM IST
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मास्क पहने पर्यटक
- फोटो : अमर उजाला
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प्रदेश के 13 शहरों के औद्योगिक क्षेत्रों में प्रदूषण की स्थिति बेहद खराब है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा तैयार की गई कांप्रेहेंसिव एनवायरमेंटल पाल्यूशन इंडेक्स (सेपी) की रिपोर्ट में आगरा के औद्योगिक क्षेत्रों में हवा और पानी में जहरीले तत्व पिछली रिपोर्ट के मुकाबले बढ़े हैं। हालांकि मिट्टी की स्थिति में सुधार है। रिपोर्ट में आगरा आठवें नंबर पर है। प्रदेश में मथुरा पहले नंबर पर है। यहां की हवा, पानी और मिट्टी में प्रदूषण बेहद गंभीर स्थिति में है। कानपुर दूसरे और मुरादाबाद तीसरे नंबर पर है।
ताजमहल
- फोटो : अमर उजाला
देश के 88 शहरों के औद्योगिक क्षेत्रों में हवा, पानी और मिट्टी में घुल रहे जहरीले तत्वों में 13 शहर प्रदेश के हैं। साल 2018 के लिए केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने सेपी स्कोर जारी किए गए हैं। जिसके बाद प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव आशीष तिवारी ने क्षेत्रीय अधिकारी को योजना बनाने के लिए कहा है। एनजीटी ने सेपी स्कोर को संज्ञान लेते हुए एक्शन प्लान बनाने के लिए कहा है।
मथुरा रेलवे स्टेशन
- फोटो : अमर उजाला
ताज ट्रिपेजियम जोन में शामिल आगरा मंडल के तीनों जिले आगरा, मथुरा और फिरोजाबाद की हवा, पानी और मिट्टी में प्रदूषण बढ़ने की रिपोर्ट ने हड़कंप मचा दिया है। पहली दो बार की रिपोर्ट में सिंगरौली और गाजियाबाद प्रदेश में सबसे प्रदूषित माने गए थे, लेकिन इस बार मथुरा, आगरा और फिरोजाबाद के औद्योगिक क्षेत्रों में जिस तेजी से प्रदूषण बढ़ा, उससे टीटीजेड अथारिटी की कार्रवाइयों पर भी सवाल खड़े हुए हैं।
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एनजीटी
एनजीटी के आदेश पर सभी जिलों के डीएम को प्रदूषण से निपटने के लिए अलग से डिस्ट्रिक्ट एनवायरमेंटल प्लान बनाना होगा, जो 15 दिसंबर तक प्रदेश सरकार को जमा करना होगा। 15 फरवरी को पर्यावरण मंत्रालय और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 15 फरवरी को एनजीटी में दाखिल किया जाएगा।
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यमुना किनारे गंदगी
- फोटो : अमर उजाला
पानी में प्रदूषण की जो रिपोर्ट जारी की गई है, उसने जल निगम और यमुना एक्शन प्लान पर सवालिया निशान उठा दिए हैं। कैलाश घाट पर मानक से 6 गुना ज्यादा प्रदूषण है तो वहीं ताजमहल के डाउन स्ट्रीम तक पहुंचते-पहुंचते यमुना में 32 गुना ज्यादा प्रदूषण पाया गया है। ताजमहल और मथुरा में वृंदावन, गोकुल के धार्मिक मान्यता के कारण सबसे ज्यादा खर्च यमुना सफाई पर किया गया है, लेकिन यहीं दोनों जगह यमुना नदी पूरे प्रदेश में सबसे गंदी और नाले से भी बदतर हालात में है।