आगरा के श्री पारस अस्पताल में मृत मरीजों के परिजनों ने शुक्रवार को शासन से डॉ. अरिंजय को गिरफ्तार कर जेल भेजने की मांग की है। एक ओर दो मरीजों की मौत के मामले में परिजनों के साथ सिंधू सभा का प्रतिनिधिमंडल उपमुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा से मिला। दूसरी ओर अधिवक्ताओं के प्रतिनिधिमंडल ने उप मुख्यमंत्री से मिलकर मामले की सीबीआई जांच कराने की मांग की है। आईएमए की जांच समिति ने शुक्रवार को डॉ. अरिंजय की एक और कारस्तानी का खुलासा किया है। उनको सौंपी गई 91 मरीजों की सूची में 15 मरीजों को कोविड और नॉन कोविड दोनों में दर्शाया गया है। इस मामले में डीएम के भी सुर बदले हैं। उन्होंने कहा है कि श्री पारस अस्पताल को क्लीन चिट नहीं दी गई है। पुलिस जांच चल रही है। पुलिस कार्रवाई के लिए पूरी तरह स्वतंत्र है।
श्री पारस अस्पताल: पीड़ितों की मांग- डॉ. अरिंजय को भेजें जेल, मृतकों के परिवारों को मिले मुआवजा
डॉ. अरिंजय की गिरफ्तारी की मांग को लेकर भारतीय सिंधू सभा ने शुक्रवार को उपमुख्यमंत्री को सर्किट हाउस में ज्ञापन सौंपा। प्रशासनिक जांच पर रोष व्यक्त करते हुए प्रतिनिधिमंडल ने ज्ञापन सौंपा। 22 मौतों के आरोप में अस्पताल संचालक के विरुद्ध कार्रवाई व पीड़ितों को न्याय दिलाने की गुहार लगाई। 26 अप्रैल को श्री पारस अस्पताल में ऑक्सीजन कमी से सभा के पदाधिकारी वासुदेव चावला व उनकी पुत्रवधू मनीषा चावला की मृत्यु हो गई थी। पीड़ित अशोक चावला ने इसके लिए डॉ. अरिंजय जैन को जिम्मेदार ठहराते हुए गिरफ्तारी की मांग की है।
हत्या और षड्यंत्र की धाराएं बढ़ाएं
इटावा के भरथना निवासी राजू सिंह ने कहा कि वीडियो महत्वपूर्ण साक्ष्य है। उसमें संचालक ने सबकुछ स्वयं कबूला किया है। पुलिस चाहे तो क्या पता नहीं कर सकती। मैंने वीडियो से 17 दिन पहले ही पुलिस कप्तान को शिकायत भेजी थी। उन्होंने जांच नहीं कराई। हत्या व षड्यंत्र की धाराएं बढ़ाने के लिए फिर नया प्रार्थनापत्र दिया है।
पुलिस को गिरफ्तार कर जेल भेजना चाहिए
दहतोरा निवासी प्रियंका सिंह ने कहा कि मेरी मां की ऑक्सीजन छीनकर अस्पताल में मॉकड्रिल की गई। हमारी कोई सुनवाई नहीं हो रही। संचालक को गिरफ्तार कर जेल भेजना चाहिए। दोषी खुले घूमकर साक्ष्य मिटा रहे हैं। पुलिस अपना काम नहीं कर रही।
निष्पक्ष जांच कर मुआवजा दे सरकार
सामाजिक कार्यकर्ता नरेश पारस ने कहा कि सरकार श्री पारस अस्पताल में 26, 27 व 28 अप्रैल के मामले में निष्पक्ष जांच, ऑक्सीजन व डेथ ऑडिट कराए। 22 से ज्यादा मौतें हो सकती हैं। 16 मौतों की रिपोर्ट आई है। बाकी सबकी जांच हो। जो पीड़ितों को न्याय मिले। कोई दोबारा इस तरह खिलवाड़ न कर सके। जरूरतमंद को मुआवजा दिया जाए।