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एक्सक्लूसिव: मेट्रो तो मिली लेकिन घट गईं सुविधाएं, जानिए स्टेशन से लेकर क्या-क्या हुआ कम, पढ़िए खबर
Wed, 09 Dec 2020 12:11 PM IST
Abhishek Saxena
देश दीपक तिवारी, अमर उजाला, आगरा
देश दीपक तिवारी, अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Wed, 09 Dec 2020 12:11 PM IST
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आगरा मेट्रो
- फोटो : अमर उजाला
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ताजनगरी को मेट्रो तो मिल गई लेकिन सुविधाएं घटाकर। यात्रियों के लिए तीन स्टेशन कम हुए। अन्य स्टेशनों पर निकास व प्रवेश द्वार भी घटाने पड़े। लिफ्ट व एस्कलेटर भी घटाए। एलाइनमेंट बदलाव से लेकर डिपो में कार्य व सिग्नलिंग सिस्टम तक में आगरा मेट्रो को समझौता करना पड़ा है। तब जाकर 5401 करोड़ लागत में कटौती के बाद आगरा में मेट्रो पर डीपीआर बनने के तीन साल बाद काम शुरू हो सका है।
आगरा मेट्रो: पिलर के लिए मशीन से होती खोदाई
- फोटो : अमर उजाला
केंद्र सरकार की मेट्रो कंसलटेंट कंपनी राइट्स ने 2017 में लोकल नोडल एजेंसी एडीए के साथ मिलकर प्रतिदिन 7.29 लाख सवारियों के आधार पर 13,781 करोड़ रुपये की फाइनल डीपीआर तैयार की थी। दिसंबर 2018 में डीपीआर केंद्र सरकार के पास स्वीकृति के लिए गई। यहां इस डीपीआर में लागत कम करने के निर्देश हुए। फिर जनवरी 2019 में संसोधति डीपीआर 8380 करोड़ की भेजी गई।
फतेहाबाद मार्ग पर हो रहा मेट्रो प्रोजेक्ट का कार्य
- फोटो : अमर उजाला
संसोधित डीपीआर में मेट्रो में सफर करने वाले यात्रियों की संख्या 3.29 लाख घट गई। सभी कार्य व सुविधाएं मिलाकर कुल 5401 करोड़ की कटौती के बाद प्रोजेक्ट को हरी झंडी मिली। जहां राइट्स की डीपीआर के मुताबिक 2025 तक रोज 7.29 लाख यात्रियों को सफर करना था वहीं संशोधित लागत के बाद यह क्षमता 4.01 लाख यात्री प्रतिदिन रह गई है।
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फतेहाबाद मार्ग पर हो रहा मेट्रो प्रोजेक्ट का कार्य
- फोटो : अमर उजाला
ऐसे घटाई परियोजना की लागत
निजी भूमि की जगह प्रोजेक्ट में सरकारी भूमि ली गई।
पहले 7.29 लाख रोज सवारी थी, अब 4.01 लाख प्रतिदिन होगी क्षमता।
30 स्टेशन प्रस्तावित थे फिलहाल 27 मेट्रो स्टेशन ही प्रस्तावित हैं।
हर स्टेशन पर पहले 2-2 प्रवेश व निकास द्वार थे अब एक-एक बनेगा।
मेट्रो स्टेशनों पर पहले 181 एक्सक्लेटर लगने थे अब सिर्फ 88 लगेंगे।
पूरे ट्रैक पर पहले 111 कोच चलाने की योजना थी अब 84 कोच चलेंगे।
मेट्रो स्टेशनों पर पहले 128 लिफ्ट लगाई जानीं थीं अब 88 लगानी हैं।
अब ट्रेन का ऑटोमेटिक फेयर कलेक्शन सिस्टम पीपी मॉडल पर होगा।
निजी भूमि की जगह प्रोजेक्ट में सरकारी भूमि ली गई।
पहले 7.29 लाख रोज सवारी थी, अब 4.01 लाख प्रतिदिन होगी क्षमता।
30 स्टेशन प्रस्तावित थे फिलहाल 27 मेट्रो स्टेशन ही प्रस्तावित हैं।
हर स्टेशन पर पहले 2-2 प्रवेश व निकास द्वार थे अब एक-एक बनेगा।
मेट्रो स्टेशनों पर पहले 181 एक्सक्लेटर लगने थे अब सिर्फ 88 लगेंगे।
पूरे ट्रैक पर पहले 111 कोच चलाने की योजना थी अब 84 कोच चलेंगे।
मेट्रो स्टेशनों पर पहले 128 लिफ्ट लगाई जानीं थीं अब 88 लगानी हैं।
अब ट्रेन का ऑटोमेटिक फेयर कलेक्शन सिस्टम पीपी मॉडल पर होगा।
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आगरा मेट्रो का काम शुरू
- फोटो : अमर उजाला
सवारी क्षमता से बदली लागत
शुरुआत में सवारियों की क्षमता कम होती है। कुल क्षमता की 70 फीसदी रायडरशिप रहेगी। इसलिए कुछ कार्यों में बदलाव किए हैं। लिफ्ट-एस्कलेटर लगेंगे। भविष्य में सभी कार्य होंगे। - कुमार केशव, प्रबंध निदेशक, यूपीएमआरसी
शुरुआत में सवारियों की क्षमता कम होती है। कुल क्षमता की 70 फीसदी रायडरशिप रहेगी। इसलिए कुछ कार्यों में बदलाव किए हैं। लिफ्ट-एस्कलेटर लगेंगे। भविष्य में सभी कार्य होंगे। - कुमार केशव, प्रबंध निदेशक, यूपीएमआरसी