आगरा की तहसील खेरागढ़ से 2 किमी की दूरी पर बसे गांव कुसियापुर में शुक्रवार को गलियां सूनी पड़ीं थीं। रह-रहकर घरों से महिलाओं की सिसकियों की आवाज सन्नाटे को चीर रही थीं। हर तरफ पसरा मातम लोगों के दर्द को बयां कर रहा था। हर किसी के मुंह से बस एक की बात निकल रही थी कि काश, बच्चे बच जाते। सही सलामत घर वापस आ जाते। लौटकर आने का वादा करके गए थे, मौत उन्हें क्यों खींच ले गई।
शुक्रवार को गांव में अमर उजाला की टीम पहुंची तो यही हाल था। गांव के घरों में एक तरफ अपनों के खोने का गम था तो दूसरी तरफ बेहाल परिजन को संभालते लोग।
2 of 21
विलाप करते परिजन
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
गांव कुसियापुर के मोड़ पर रहने वाले 24 वर्षीय भगवती प्रसाद के पिता मुरारीलाल खेत में बैठकर आंसू बहा रहे थे। अमर उजाला रिपोर्टर ने जब घर में जाने की कोशिश की तो मुरारीलाल आ गए। उनकी आंखों से आंसू बह रहे थे। पूछने पर बताया कि उनके दो बेटे और तीन बेटियां हैं।
3 of 21
विलाप करते परिजन
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
भगवती घर में बड़ा था। छोटा बेटा हरिओम अभी 14 साल का ही है। घर की जिम्मेदारी भगवती पर ही थी। उसकी शादी 14 फरवरी को ही मथुरा की चंचल से हुई थी। बृहस्पतिवार को बेटा दोस्तों के साथ देवी प्रतिमा को विसर्जित करने के लिए घर से निकला था।
4 of 21
गमगीन बैठी महिलाएं
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
इसके बाद उसके डूबने की खबर आ गई। जब तक वो पहुंचे, तब तक कुछ नहीं बचा था। बेटे के वापस आने की आस में वो रातभर उटंगन नदी के किनारे बैठे रहे। मगर कोई कुछ नहीं कर सके। पिता ने बताया कि बेटा खेती करता था। इससे ही घर चलता था। हादसे ने उनका सहारा छीन लिया।
5 of 21
गमगीन बैठी महिलाएं
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
बेटे सचिन को वर्दी पहनाने का सपना रह गया अधूरा
इस हादसे ने गांव के रामवीर की भी खुशियां छीन लीं। उनका 17 वर्षीय बेटा सचिन कक्षा 11 में पढ़ रहा था। पिता ने बताया कि बड़ा बेटा अंकित गाड़ी चलाता है। इस कारण वो छोटे बेटे सचिन को पुलिस और सेना में भर्ती करना चाहते थे। इसके लिए सचिन तैयारी में लगा हुआ था।