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झरना नाला हादसे के छह महीने बाद भी नहीं चेते: यात्रियों की जिंदगी से खिलवाड़ कर रहा विभाग
Sun, 08 Dec 2019 02:58 PM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Sun, 08 Dec 2019 02:58 PM IST
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बस
- फोटो : अमर उजाला
झरना नाला हादसे के बाद परिवहन निगम के अफसरों ने हादसों को रोकने के लिए कदम उठाए थे, लेकिन पांच माह भी नहीं बीते हैं कि गाइड लाइनों की अनदेखी की जाने लगी है। साधारण बसों की हालत खस्ता है। बसों में फॉग लाइट, स्पीड गवर्नर तक नहीं हैं। चालकों की कमी नहीं होने के बाद भी लंबी दूरी की बसों में दो चालकों की ड्यूटी नहीं लगाई जा रही है।
बसों की खस्ता हालत
- फोटो : अमर उजाला
परिक्षेत्र की साधारण बसों की हालत खस्ता है। किसी के टायर घिसे हुए हैं तो किसी की सीटें फटी हुई हैं। बसों के अंदर के लाइट खराब पड़ी है। 20 नवंबर को फोर्ट डिपो की बस का पहिया रास्ते में बर्स्ट हो गया था। लंबी दूरी की बसों में भी स्पीड गवर्नर नहीं लगे हैं। फॉग लाइट तो भूल ही जाइए। रोडवेज चालक सीट बेल्ट भी नहीं बांध रहे हैं। ऐसे में कोहरे में हादसों की आशंका बनी रहती है।
झरना नाले में गिरी बस का फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
आठ जुलाई 2019 को लखनऊ के अवध डिपो की जनरथ बस दिल्ली जाते वक्त यमुना एक्सप्रेसवे पर झरना नाले में जा गिरी थी। हादसे में 29 यात्रियों की मौत हो गई थी और 23 यात्री घायल हुए थे। हादसे में बस चालक की मौत भी हुई थी। हादसे की जांच में साफ हुआ था कि बस चालक के लगातार ड्यूटी करने के कारण उसे झपकी आ गई थी और वह बस से नियंत्रण खो बैठा। इस रूट के एक टीआई को निलंबित भी किया गया था।
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ईदगाह डिपो से बिना चेकिंग निकली बस
- फोटो : अमर उजाला
यह थे दावे: 300 किमी की दूरी से अधिक की बसों में दो चालकों की तैनाती अनिवार्य होगी। हर बस चालक का ब्रीथ एनलाइजर से टेस्ट। रूट पर जाने से पहले, रूट से लौटने पर भी। हर बस जब डिपो से रवाना होगी, उसके पहले बस का टेक्निकल मुआयना किया जाएगा। बसों की चेकिंग दस्ते चेकिंग के दौरान भी चालकों का ब्रीथ एनलाइजर टेस्ट करेंगे।
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एक्सप्रेसवे आगरा
- फोटो : अमर उजाला
यह है हकीकत: हरिद्वार, ऋषिकेश, फिरोजाबाद-दिल्ली, देहरादून रूट की बसों में एक ही चालक की तैनाती है। दो चालक केवल जयपुर सोनोली व
जयपुर रूपेडिहा में है, जोकि हादसे से पहले भी चलते रहे हैं। डिपो में कर्मचारियों की कमी के कारण ब्रीथ एनलाइजर टेस्ट नहीं किया जा रहा है। हर बस को वर्कशाप से चालक, परिचालक लेकर सीधे रूट पर रवाना हो रहे, निरीक्षण नहीं हो रहा। चेकिंग दस्ते भी नहीं कर रहे ब्रीथ एनलाइजर टेस्ट। एक भी चालक नशे में नहीं पकड़ा गया।
जयपुर रूपेडिहा में है, जोकि हादसे से पहले भी चलते रहे हैं। डिपो में कर्मचारियों की कमी के कारण ब्रीथ एनलाइजर टेस्ट नहीं किया जा रहा है। हर बस को वर्कशाप से चालक, परिचालक लेकर सीधे रूट पर रवाना हो रहे, निरीक्षण नहीं हो रहा। चेकिंग दस्ते भी नहीं कर रहे ब्रीथ एनलाइजर टेस्ट। एक भी चालक नशे में नहीं पकड़ा गया।