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असली रावण के 'वध' पर विजयदशमी मनाएंगी ये 'बहादुर युवतियां', दोषियों को सजा का इंतजार

Wed, 09 Oct 2019 04:08 PM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Published by: Abhishek Saxena Updated Wed, 09 Oct 2019 04:08 PM IST
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Acid attack victims Says on Ravan Dahan Agra News in Hindi
एसिड अटैक पीड़िता - फोटो : अमर उजाला
जिस समय ताजनगरी में तमाम स्थानों पर रावण के वध का जश्न मनाया जा रहा था, उस समय शीरोज की एसिड अटैक युवतियां अपनी जिंदगी के असली रावणों के दहन को लेकर मंथन करती दिखाई दीं। बहुतों ने यह उम्मीद ही छोड़ दी है कि जिंदा रहते वह कभी असली रावण का दहन होते देख सकेंगी।
Acid attack victims Says on Ravan Dahan Agra News in Hindi
शीरोज हैंग आउट - फोटो : अमर उजाला
एसिड अटैक पीड़िताओं का मानना है कि उनकी जिंदगी के विषैली सोच के व्यक्ति को जब तक सजा नहीं मिलती, तब तक उनके लिए विजयदशमी मनाने का कोई मतलब नहीं है। व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए जिससे कलयुगी रावणों को जल्द सजा मिल सके। इन युवतियों का कहना है कि जिस दिन कलयुगी रावणों को सजा मिलेगी, उनके लिए वही दिन विजयदशमी होगा। शीरोज के संचालक आशीष शुक्ला का कहना है कि ये लोग आपसी बातचीत में भी आरोपियों को रावण ही बताती हैं। यह सभी अक्सर कहती हैं कि असली रावण वध पर विजयदशमी मनाएंगी। 
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शीरोज की युवतियां - फोटो : अमर उजाला
हाथरस की रहने वाली 22 साल की खुशबू का कहना है कि अन्याय के खिलाफ मैंने आवाज उठाई, तो मेरे पिता ने मेरे चेहरे पर तेजाब फेंक दिया। उस पल के बाद मेरा, पिता के प्रति नजरिया बदल गया। मैं सोचती हूं कि जो पिता अपनी बेटी के चेहरे पर तेजाब फेंक सकता है, वह पिता नहीं, रावण कहने योग्य व्यक्ति है। पिता तो जिस दिन उसके किए की सजा मिलेगी, उस दिन मेरे लिए विजयदशमी होगी। उन्होंने बताया कि पिता ने तीन शादियां कर लीं। समझाया गया। जमीन बेचने लगे। मना किया गया। एक दिन घर पर आए। अचानक मेरे चेहरे पर तेजाब डाल दिया।
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तेजाब हमले के बाद शीरोज में काम करने वाली युवती - फोटो : अमर उजाला
अलीगढ़ की रहने वाली 28 साल की शबनम को उस रावण रूपी ठेकेदार की सजा का इंतजार है, जिसने शबनम के चेहरे पर तेजाब फेंका था। शबनम का मानना है कि हम भले ही सांकेतिक रूप से रावणों का पुतला दहन करें, पर सच्चाई से हम सभी को जुड़ना होगा। किसी के चेहरे पे पर तेजाब फेंकने की कल्पना सिर्फ रावण की विचारधारा वाला ही कर सकता है। फर्क सिर्फ इतना है कि कलयुगी रावणों का संहार होना चाहिए। मेरे लिए ठेकेदार सिर्फ रावण है। उसकी सजा ही मेरे लिए रावण का संहार है। 
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शीरोज कैफे

मधु पर एक सिरफिरे ने सन 1997 में तेजाब फेंका दिया। मधु का कहना है कि बीस साल में इंसाफ नहीं मिल सका है। ऐसे लोग रावण से कम नहीं होते, जो अपनी हरेक जगह सेटिंग निकाल लेते हैं। वक्त से समझौता कर लिया है। अगर कुछ होता नहीं है, तो किसी से कहने का कोई फायदा नहीं है। बीस साल पहले जिस रावण को मैंने पहली बार देखा, वो आज भी मौज की जिंदगी जी रहा है। ऐसे रावण के खिलाफ जब सख्त कार्रवाई होगी, तभी बुराई पर अच्छाई की जीत जैसी सोच आगे बढ़ सकेगी।

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