मकर संक्रांति पर्व पर सोमवार को देवभूमि हिमाचल में हजारों श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाई। कुल्लू में धार्मिक नगरी मणिकर्ण, वशिष्ठ और क्लाथ में कड़ाके की ठंड के बीच हजारों लोगों ने गरम पानी के स्रोत में स्नान किया। वहीं, मंडी में ऋषि जमदग्नि की तपोस्थली तत्तापानी में सोमवार को पांच हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने गरम पानी के चश्मे में डुबकी लगाई।
मकर संक्रांति पर धार्मिक महात्म्य के स्नान के लिए मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर भी तत्तापानी पहुंचे। उन्होंने तत्तापानी के होटल हॉट स्प्रिंग के स्विमिंग पूल में पवित्र डुबकी लगाकर पहली बार जिलास्तरीय मेले का विधिवत शुभारंभ किया। इसके बाद भंडारे में सीएम ने पारंपरिक खिचड़ी का स्वाद चखा। मुख्यमंत्री ने तत्तापानी में प्रसिद्ध नरसिंह मंदिर और शनि देव मंदिर का दौरा किया और पूजा की।
तत्तापानी में बांध बनने से पहले प्राकृतिक गर्म पानी के चश्मे हुआ करते थे, जहां श्रद्धालु स्नान व दान का महत्व मानते थे। प्राकृतिक चश्मे डूब गए हैं, लेकिन आस्था में कोई कमी नहीं हुई है। सरकार व प्रशासन के प्रयासों से जो कृत्रिम चश्मे बनाए गए हैं, अब वहां पर श्रद्धालु आस्था की डुबकी लगाते हैं। मान्यता है कि यहां स्नान करने से ग्रहों की शांति मिलती है। यहां स्नान करने से चर्म रोगों से भी मुक्ति मिलती है। इसके अलावा यहां तोला दान का बड़ा महत्व है। ग्रहों की शांति के लिए यहां दूर-दूर से श्रद्धालु आकर तुलादान करते हैं।
तत्तापानी में गर्म पानी के चश्मों की उत्पत्ति के बारे में तरह-तरह की किंवदंतियां प्रसिद्ध हैं। पुराणविद्धों के अनुसार ततापानी के बारे में एक किंवदंती ये है कि प्राचीनकाल में इस क्षेत्र में परशुराम के पिता ऋषि जमदग्नि तपस्या कर रहे थे।
इस तपोस्थली में गर्म पानी के चश्मे प्रकट किए। एक अन्य किंवदंती ये भी है कि यहां पर जमदग्नि ऋषि के पुत्र परशुराम स्नान कर रहे थे। उन्होंने जब अपने वस्त्र निचोड़े तो यहां पर गर्म पानी हो पैदा हो गया। यहां गंधक के पहाड़ हैं। इनसे गैस बनती है, उनसे भी गर्म पानी निकलता है।