विश्व धरोहर का दर्जा प्राप्त हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले का ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क देश के बहुत ही खूबसूरत नेशनल पार्क में से एक है। शोधकर्ताओं और प्रकृति प्रेमियों के लिए यह पार्क जन्नत से कम नहीं। यहां पर्यटकों की तादात में साल दर साल इजाफा दर्ज किया जा रहा है। वर्तमान में पार्क का दायरा 905.4 वर्ग किलोमीटर तक फैला है। यूनेस्को ने साल 2014 में इस पार्क को विश्व धरोहर स्थल की लिस्ट में शामिल किया है।
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इसका जैव विविधता संरक्षण में बहुत बड़ा योगदान है। वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत जैविक सुरक्षा के खास इंतजाम किए गए हैं। सरकार ने लगभग 10 सालों से यहां शिकार करने पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा रखा है। ब्लू शिप, हिम तेंदुआ, हिमालयन भूरा भालू और कस्तूरी मृग को देखने के लिए पार्क में बड़ी संख्या में पर्यावरण पेमी आ रहे हैं। पेड़-पौधों के लिहाज से भी यहां का वातावरण एकदम अनुकूल है।
पर्यावरणविद् आशीष प्रभात बताते हैं कि यहां ऐसे कई तरह के पेड़-पौधे देखने को मिलेंगे, जिन्हें शायद पहले कभी नहीं देखा होगा। हार्स चेस्टनट से लेकर पाइन के जड़ी-बूटी की भी कई किस्में यहां मौजूद हैं। जैविक विविधता पर अध्ययन कर रहे हैदराबाद निवासी अरविंद मेक ने कहा कि यहां मौजूद पक्षियों व सांपों की कुछ प्रजातियां ऐसी भी हैं, जो दुनिया भर से खत्म होने के कगार पर हैं। पार्क संरक्षण क्षेत्र में एशियाई काला भालू, हिमालयी कस्तूरी मृग, नीली भेड़, हिमालयी ताहर, हिम तेंदुआ, मोनाल पक्षी आदि अनेक जीव प्रजातियां पाई जाती हैं।
पार्क संरक्षण क्षेत्र में जीवानल, सैंज और तीर्थन नदी है। उत्तर-पश्चिम की ओर बहने वाली पार्वती नदी का जल उद्गम शामिल है। पार्क के शमशी के डीएफओ निशांत मंढोत्रा ने बताया कि अक्तूबर से नवंबर के बीच यहां आना ठीक रहता है। इस दौरान हिमालयन इको टूरिज्म टीम की तरफ से ट्रैकिंग शुरू की जाती है। सर्दियों में यहां आने से फरहेज करें क्योंकि उस दौरान यहां बहुत ज्यादा ठंड पड़ती है और बर्फबारी अधिक होती है। पार्क तक पहुंचने के लिए बसों की सुविधा उपलब्ध नहीं है। बसों से सैंज या तीर्थन वैली पहुंचकर पैदल ट्रैक कर पार्क में पहुंच सकते हैं।
जैव विविधता का संरक्षक है नेशनल पार्क
जैव विविधता को देखते हुए यूनेस्को ने ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क को विश्व धरोहर का दर्जा दिया है। पार्क क्षेत्र में जहां पर्यटन गतिविधियां बढ़ी हैं, वहीं राज्य पक्षी जाजुराना का भी संरक्षक बना है। कस्तूरी मृग, बर्फानी तेंदुआ सहित वन्य प्राणियों की 31 प्रजातियों में काला और भूरा भालू, कस्तूरी मृग, हिम तेंदुआ, घोरल, हिमालयन नीली भेड़, हिमालयन थार, हिमालयन विजल के अलावा मुर्गा प्रजाति पार्क में पाई जाती है।
इसके अतिरिक्त दुर्लभ पक्षियों की 209 नस्लों में जाजुराना, मोनाल, कोकलास, शाहिल, चिड फीजेंड और 44 तितलियों की प्रजातियां पार्क में पाई जाती हैं। पार्क एरिया में 832 के विभिन्न प्रजातियों के पौधे हैं।