करीब 18 हजार फीट ऊंचाई पर स्थित थमसर जोत के बाद आने वाले कांगड़ा जिले के अति दुर्गम गांव बड़ा भंगाल का पैदल रास्ता एक साल बाद बहाल हो गया है। पिछली बरसात के बाद भारी भूस्खलन के चलते बड़ा गांव से बड़ा भंगाल को जाने वाला पैदल रास्ता बंद हो गया था। इससे बड़ा भंगाल देश-दुनिया से कट गया। करीब एक माह पहले दुर्गम घाटी के कुछ लोगों ने सीएम के समक्ष पैदल रास्ते को दुरुस्त करने की मांग रखी थी। इसके बाद डीसी कांगड़ा राकेश प्रजापति ने एक माह के भीतर अति दुर्गम पैदल रास्ते को खुलवा दिया।
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Bara Bhangal
- फोटो : अमर उजाला
प्रशासन की तकनीकी टीम के दिशा-निर्देशों के तहत करीब 24 लोगों की टीम ने रास्ते को पैदल चलते योग्य बनाया। रास्ता बनने के बाद प्रशासन ने खच्चरों पर ढोकर एक साल का राशन बड़ा भंगाल पहुंचाया। पैदल रास्ता क्षतिग्रस्त होने के बाद पिछले वर्ष सरकार ने चॉपर के जरिये राशन बड़ा भंगाल पहुंचाया था। चॉपर से राशन पहुंचाने का खर्चा करीब एक करोड़ रुपये आया था। पैदल रास्ते से राशन पहुंचाने के चलते सरकार का करीब एक करोड़ रुपये बच गया और इमरजेंसी के दौरान बड़ा भंगाल तक पैदल जाने की सहूलियत भी लोगों को मिल गई।
अति दुर्गम गांव बड़ा गांव में वर्तमान में करीब 500 लोग रहते हैं। यहां तक पहुंचने में पैदल रास्ते से करीब दो दिन लगते हैं। इससे पहले बड़ा भंगाल तक संपर्क मार्ग पूरी तरह कट चुका था। क्षतिग्रस्त पैदल रास्ते को दुरुस्त करने में सरकार का करीब 10 से 15 लाख रुपये खर्चा आया है। डीसी कांगड़ा ने बड़ा भंगाल में पिछले कुछ महीने से खराब पड़े सैटेलाइट फोन को भी ठीक करवा दिया है। अब बड़ा भंगाल के लोग सैटेलाइट फोन के जरिये प्रशासन और अपने परिजनों से संपर्क कर सकेंगे।
डीसी कांगड़ा राकेश प्रजापति ने कहा कि सीएम के निर्देश मिलने के बाद एक माह के भीतर पैदल रास्ते को दुरुस्त कर खच्चरों के जरिये राशन बड़ा भंगाल भेजा गया है। पैदल रास्ते से लोगों को इमरजेंसी में भी लाभ मिलेगा।
रास्ते को बहाल करने में बड़ा भंगाल पंचायत के प्रधान और विधायक मुल्खराज प्रेमी का काफी सहयोग मिला। बड़ा भंगाल में बिजली की समस्या के समाधान के लिए जिला प्रशासन सौर यंत्र लगाने पर विचार कर रहा है। लोगों से वार्तालाप के लिए वी सेट लगाने को लेकर भी काम चल रहा है।