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इस मंदिर में 5 दिन लगातार जलेंगे 101 दीपक, पुत्र प्राप्ति और भीष्म पितामह से जुड़ी है मान्यता

Thu, 22 Nov 2018 11:43 AM IST
विभू शर्मा, अमर उजाला, ज्वालामुखी
विभू शर्मा, अमर उजाला, ज्वालामुखी Updated Thu, 22 Nov 2018 11:43 AM IST
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Panch Bhishma festival in Jwalamukhi Himachal Pradesh

शक्तिपीठ ज्वालामुखी के मुरली मनोहर मंदिर में पंच भीष्म मेले शुरू हो गए हैं। मंदिर में 101 दीपक पांच दिन तक दिन रात जलाए जाएंगे। स्थानीय निवासी और मंदिर पुजारी इन दीपकों में दिन-रात तेल का दान करते हैं। वर्षो से इस मंदिर में दीप दान किया जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस मंदिर में पंच भीष्म के दिनों में दर्शन करने से पुत्र प्राप्ति होती है तथा दीप दान से पितृ दोष भी समाप्त होता है।

Panch Bhishma festival in Jwalamukhi Himachal Pradesh

मुरली मनोहर मंदिर के पुजारी डिंपल शर्मा ने बताया कि पंच भीष्म मनाने के दो कारण हैं। एक तो माता तुलसी का विवाह मुरली मनोहर से इसी दिन हुआ था और महाभारत काल में जब भीष्म पितामह बाणों की शैय्या पर लेटे थे, तब उन्होंने पांडवों को पांच दिन तक ज्ञान दिया था। इसी उपलक्ष्य में पंच भीष्म मनाए जाते हैं।

Panch Bhishma festival in Jwalamukhi Himachal Pradesh

पंच भीष्म का हिंदू धर्म में बड़ा महत्व है। पुराणों तथा हिंदू धर्म ग्रंथों में कार्तिक माह में ‘भीष्म पंचक’ व्रत का विशेष महत्व बताया गया है। यह व्रत कार्तिक माह में शुक्ल पक्ष की एकादशी से आरंभ होता है तथा पूर्णिमा तक चलता है। भीष्म पंचक को ‘पंच भीखू’ के नाम से भी जाना जाता है। धर्म ग्रंथों में कार्तिक स्नान को बहुत महत्व दिया गया है। कार्तिक स्नान करने वाले सभी लोग इस व्रत को करते हैं। भीष्म पितामह ने इस व्रत को किया था। इसलिए यह ‘भीष्म पंचक’ नाम से भी प्रसिद्ध हुआ।

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Panch Bhishma festival in Jwalamukhi Himachal Pradesh

महाभारत युद्ध के बाद पांडवों की जीत हुई तब श्रीकृष्ण पांडवों को भीष्म पितामह के पास ले गए और उनसे अनुरोध किया कि वह पांडवों को ज्ञान प्रदान करें। शैया पर लेटे हुए सूर्य के उत्तरायण होने की प्रतीक्षा कर रहे भीष्म ने कृष्ण के अनुरोध पर कृष्ण सहित पांडवों को राज धर्म, वर्ण धर्म एवं मोक्ष धर्म का ज्ञान दिया।

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Panch Bhishma festival in Jwalamukhi Himachal Pradesh

ज्ञान देने का क्रम एकादशी से लेकर पूर्णिमा तिथि यानी पांच दिनों तक चलता रहा। भीष्म ने जब पूरा ज्ञान दे दिया, तब श्रीकृष्ण ने कहा कि आपने जो पांच दिनों में ज्ञान दिया है। यह पांच दिन आज से अति मंगलकारी हो गए हैं।

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