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Shimla News: शिमला में सील्ड रोड पर नियमों की अनदेखी पर हाईकोर्ट सख्त, सरकार से मांगा जवाब

Thu, 10 Sep 2026 11:55 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Thu, 10 Sep 2026 11:55 PM IST
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high court news shimla
दूरदराज के निवासियों को दिए गए 362 व्हीकल परमिट, हाईकोर्ट ने जताई कड़ी नाराजगी
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स्थानीय निवासियों का अधिकार प्राथमिकता पर हो
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने राजधानी शिमला की सील्ड और प्रतिबंधित सड़कों पर वीआईपी वाहनों की आवाजाही को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने पाया कि शिमला की सील्ड सड़कों पर ऐसे लोगों को भारी संख्या में वाहन परमिट बांट दिए गए हैं, जो उन इलाकों के आसपास रहते भी नहीं हैं और बहुत दूर निवास करते हैं। कोर्ट ने कहा कि इन रास्तों पर गाड़ियों की संख्या कम की जानी चाहिए और परमिट का असली फायदा केवल वहां के मूल निवासियों को मिलना चाहिए।
मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने संभव मामले की सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को इस व्यवस्था में सुधार करने के निर्देश दिया है।सुनवाई के दौरान प्रदेश सरकार के विशेष सचिव (गृह) की ओर से अदालत में एक हलफनामा पेश किया गया। हलफनामे के अनुसार शैलेडे स्कूल, सिल्ली चौक से छोटा शिमला क्लब वाले प्रतिबंधित मार्ग के लिए कुल 362 परमिट जारी किए गए हैं। इनमें से 318 परमिटों का नवीनीकरण किया गया है और 44 नए परमिट जारी किए गए हैं। यह पूरा हिस्सा शिमला रोड यूजर्स एंड पेडेस्ट्रियन (पब्लिक सेफ्टी एंड कन्वीनियंस) एक्ट,2007 के तहत पूरी तरह सील (एस-1 श्रेणी) मार्ग है, जहां गाड़ियों की आवाजाही पर सख्त पाबंदी है।
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कोर्ट ने पाया कि सूची में शामिल एक बड़ी आबादी उन वीआईपी या रसूखदार लोगों की है जो शहर के सुदूर इलाकों में रहते हैं, लेकिन वे इस सील मार्ग का फायदा उठा रहे हैं। कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि इस वीआईपी संस्कृति के कारण उन स्थानीय आम नागरिकों को परेशान नहीं किया जाना चाहिए, जिनके घरों तक पहुंचने का एकमात्र रास्ता ही यह सील सड़क है।स्थानीय लोगों को बिना किसी रुकावट के उनके वाहनों के लिए पास मिलने चाहिए ताकि वे अपने घरों तक आसानी से पहुंच सकें। कोर्ट ने इस बात पर भी नाराजगी जताई कि सरकार के हलफनामे में यह नहीं बताया गया है कि इस प्रतिबंधित मार्ग पर पहले कितने परमिट जारी थे, जिससे तुलना की जा सके। सरकार ने आश्वासन दिया कि वे इस सील मार्ग पर गाड़ियों के दबाव को और कम करने के लिए आवश्यक कदम उठाएंगे और नियमों की समीक्षा करेंगे। अदालत ने सरकार को नई कसरत करने की मोहलत देते हुए मामले की अगली सुनवाई 17 नवंबर 2026 तय की है।
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