मकर संक्रांति पर देशभर में भले ही करोड़ों लोगों ने आस्था की डुबकी लगाई हो, लेकिन इस पवित्र स्थल पर सिर्फ एक शख्स ही डुबकी लगाने की हिम्मत दिखा पाया। बाकी सभी बिना स्नान किए ही वापस लौट गए। कई लोगों ने कोशिश भी की लेकिन पानी में उतरने से पहले ही उनकी हिम्मत जवाब दे गई। आइए जानते हैं क्यों-
बर्फ से लकदक बौद्ध बहुल इलाके में चंद्रा-भागा के संगम स्थली तांदी में जेबीटी अध्यापक अरुण ने माइनस 17 डिग्री तापमान में तैरते बर्फ के बीच आस्था की डुबकी लगाकर पुण्य कमाया। डुबकी लगाने की हसरत लिए कई श्रद्धालु सुबह तांदी संगम पहुंचे, लेकिन खून जमा देनी वाली ठंड में कोई भी डुबकी लगाने का साहस नहीं जुटा पाया।
नालडा गांव के अरुण ने भोलेनाथ के जयकारों के साथ संगम में डुबकी लगाकर सब को हैरत में डाल दिया। इसी साल विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक सिंघल की अस्थियों को भी यहीं प्रवाहित किया गया था। इधर, वरिष्ठ डॉ. पीडी लाल का कहना है कि इतने कम तापमान में अधिक देर तक रहने से हाइपोथर्मिया हो सकता है। इससे इनसान के शरीर में खून का बहाव रुक जाता है।
उधर, मकर संक्रांति पर स्नान के लिए प्रदेश के तीर्थ स्थलों पर श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ पड़ा। शिमला से सटे मंडी के तत्तापानी, कुल्लू के मणिकर्ण और बिलासपुर के मार्कंडेय मंदिर में हजारों भक्तों ने पवित्र स्नान किया और तुलादान करवाया। धार्मिक नगरी मणिकर्ण, वशिष्ठ, क्लाथ तथा पार्वती ब्यास संगम जिया में श्रद्धालुओं ने भारी ठंड के बीच पवित्र स्नान किया।
मणिकर्ण में तड़के ही पवित्र स्नान का सिलसिला शुरू हो गया था। प्रसिद्ध तीर्थ स्थल मार्कंडेय में मकर संक्रांति पर शनिवार को करीब 15 हजार श्रद्धालुओं ने पवित्र स्नान किया। श्रद्धालुओं ने ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर मंदिर में माथा टेका। श्रद्धालुओं की सुविधा को लेकर मंदिर कमेटी ने विशेष प्रबंध किए थे। तीर्थ स्थल तत्तापानी का पूर्व स्वरूप भले ही डूब गया हो, लेकिन लोगों की आस्था अभी भी इस तीर्थ स्थल से जुड़ी हुई है।