जिसने भी यहां चढ़ने की हिम्मत की वो 'पत्थर' बन गया
हमेशा बर्फ से ढके रहने वाले इस पौराणिक पर्वत पर जिसने भी चढ़ने की कोशिश की वह पत्थर बन गया। यकीन मानिए आज भी इस पर्वत की चोटी तक पहुंचने की कोई हिम्मत नहीं जुटा पाया है। जानिए क्या है यहां का सच..
जिसने भी यहां चढ़ने की हिम्मत की वो 'पत्थर' बन गया
जी हां यह पूरी तरह से सच है कि पांच कैलाशों में से एक मणिमहेश पर्वत पर जिसने भी चढ़ने की कोशिश की वह पत्थर बन गया। हालांकि कुछ कैलाशों में पर्वत की चोटी तक यात्रा की जाती है। मगर यहां ऐसा संभव नहीं है।
जिसने भी यहां चढ़ने की हिम्मत की वो 'पत्थर' बन गया
स्थानीय लोगों की मान्यता है कि एक बार गडरिया अपनी भेड़ों के साथ मणिमहेश पर्वत की चोटी पर चढ़ने लगा। मगर जैसे जैसे वह ऊपर की ओर चलता गया, उसकी सभी भेड़ें एक-एक करके पत्थर बनती गईं। इसके बाद भी जब गडरिया नहीं माना तो आखिरकार वह भी शिला में तबदील हो गया।
जिसने भी यहां चढ़ने की हिम्मत की वो 'पत्थर' बन गया
हिमाचल प्रदेश के चंबा जिला के भरमौर में स्थित मणिमहेश को टरकोईज माउंटेन के नाम से भी पुकारा जाता है, जिसका अर्थ है वैदूर्यमणि या नीलमणि। समुद्र तल से 18500 फीट की ऊंचाई पर स्थित मणिमहेश को भगवान शिव और मां पार्वती का निवास स्थान माना जाता है।
जिसने भी यहां चढ़ने की हिम्मत की वो 'पत्थर' बन गया
कहा जाता है कि वर्ष 1968 में भी इस पर्वत पर एक पर्वतारोही ने चढ़ने की कोशिश की मगर वह सफल नहीं हुआ। हालांकि उसके पत्थर बनने के कोई साक्ष्य नहीं मिले हैं। मगर बावजूद इसके आज तक मणिमहेश पर्वत पर चढ़ने की कोई हिम्मत नहीं जुटा पाया है।