'मां' के इस रूप की उपासना, हर तंत्र से मिलेगी निजात
मां बगलामुखी दशमहाविद्याओं में आठवीं महाविद्या है।
इन्हें पीताबंरा भी कहते हैं। आज मां बगलामुखी जयंती है। इस दिन मां की
उपासना से हर प्रकार के तंत्र से निजात मिलती है।
'मां' के इस रूप की उपासना, हर तंत्र से मिलेगी निजात
माता 'बगलामुखी दसमहाविद्या में आठवीं महाविद्या हैं। इन्हें मां पीताम्बरा भी कहते हैं। ये स्तम्भन की देवी हैं। सारे ब्रह्माण्ड की शक्ति मिल कर भी इनका मुकाबला नहीं कर सकती।
'मां' के इस रूप की उपासना, हर तंत्र से मिलेगी निजात
शत्रुनाश, वाकसिद्धि, वाद विवाद में विजय के लिए इनकी उपासना की जाती है। इनकी उपासना से शत्रुओं का स्तम्भन होता है तथा जातक का जीवन निष्कंटक हो जाता है। आज मां बगलामुखी जयंती है। इस मौके पर मां की उपासना करने से विशेष कृपा प्राप्त होती है और दुश्मनों द्वारा किए गए किसी भी प्रकार के तंत्र मंत्र से निजात मिलती है।
'मां' के इस रूप की उपासना, हर तंत्र से मिलेगी निजात
किसी छोटे कार्य के लिए 10000 तथा असाध्य से लगाने वाले कार्य के लिए एक लाख मंत्र का जाप करना चाहिए। बगलामुखी मंत्र के जाप से पूर्व बगलामुखी कवच का पाठ अवश्य करना चाहिए। यहदेवभूमि हिमाचल के कांगड़ा में स्थित मां बगलामुखी की अलौकिक प्रतिमा। आज यहां मां बगलामुखी जयंती धूमधाम से मनाई जाएगी।
'मां' के इस रूप की उपासना, हर तंत्र से मिलेगी निजात
भारत में माँ बगलामुखी के तीन ही प्रमुख ऐतिहासिक मंदिर माने गए हैं जो क्रमश: दतिया (मध्यप्रदेश), कांगड़ा (हिमाचल) तथा नलखेड़ा जिला शाजापुर (मध्यप्रदेश) में हैं। तीनों का अपना अलग-अलग महत्व है। मां बगलामुखी का मूल मंत्र इस प्रकार है।
''ह्मीं बगलामुखी सर्व दुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तम्भय जिह्वां कीलम बुद्धिं विनाशय ह्मीं ॐ स्वाहा।''