लोकसभा चुनाव से सवा साल पहले हिमाचल के पहली बार मुख्यमंत्री बने जयराम ठाकुर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भरोसे पर खरा उतरना है। वह ‘अबकी बार फिर चार की चार, एक बार फिर मोदी सरकार’ नारे को बुलंद कर प्रचार का मोर्चा संभाले हुए हैं। चुनाव प्रचार के बीच शिमला में अमर उजाला के मुख्य संवाददाता सुरेश शांडिल्य ने उनसे विशेष बातचीत की। पेश हैं इसके अंश :
साक्षात्कारः हिमाचल के सीएम जयराम ठाकुर बोले, जीत तय है...बस मार्जिन की लड़ाई है
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पिछली बार प्रचंड मोदी लहर थी, अबकी परिस्थितियां अलग हैं। क्या प्रदेश में चारों सीटों पर जीत बरकरार रखना चुनौती नहीं है?
चारों सीटें जीतेंगे। हम रिपीट करेंगे। इस बार जीत के मार्जिन की लड़ाई है। कांग्रेस कहीं नहीं ठहर रही। आम जन चाहते हैं कि मोदी ही दोबारा पीएम बनें। हमारी सरकार ने भी उनके सहयोग से एक साल में खूब काम किए। देश को एक मजबूत प्रधानमंत्री चाहिए। देश उन्हीं के हाथ सुरक्षित है। देश की सुरक्षा बहुत बड़ा मुद्दा है।
पूर्व मुख्यमंत्री एवं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता वीरभद्र सिंह आप पर हमलावर हैं और आप डिफेंसिव। क्या कारण है?
मैं उनकी उम्र के हिसाब से इज्जत करता हूं। वीरभद्र को मुकेश अग्निहोत्री ने उकसाया। बाद में वीरभद्र ने कहा भी कि उन्होंने ऐसा कहां कहा। मेरे बारे में तू-तड़ाक से बात करते अग्निहोत्री जल्दबाजी में हैं और वह इस चक्कर में कहीं अपना नुकसान न कर बैठें।
आप मंडी को ज्यादा वक्त दे रहे हैं, दूसरे नेता अपने हलकों को, पूरा प्रदेश क्यों नहीं?
मैं खुद हर क्षेत्र में हो आया हूं। दो हलके ही बचे हैं। शांता कुमार पर कांगड़ा और प्रेम कुमार धूमल पर हमीरपुर की विशेष जिम्मेवारी है। जैसे-जैसे वक्त मिल रहा है, वह बाहर भी प्रचार कर रहे हैं। भाजपा नेताओं को काम बांटा गया है, उसी हिसाब से प्रचार कर रहे हैं।
शांता के विरोधाभासी बयानों से कोई नुकसान तो नहीं?
शांता जी मजाक करते हैं। वह खुद ही कह चुके हैं कि वह इस बार चुनाव लड़ाने का आनंद ले रहे हैं। वह जमकर प्रचार कर रहे हैं। कांगड़ा के अलावा बाहर भी प्रचाररत हैं।
प्रदेश में सीटों की संभावना तो कांग्रेस खेमे को भी है। क्या कहेंगे?
कांग्रेस की तुलना में प्रचार में भाजपा बहुत आगे है। कांग्रेस शुरू से पिछड़ी है। चाहे नामांकन की बात हो या जनसभाओं की। भाजपा के पक्ष में माहौल है। कांग्रेस में तो यही पता नहीं है कि नेता कौन है। अब वीरभद्र की पहले जैसी पकड़ नहीं। कुलदीप राठौर अपनी लड़ाई लड़ रहे हैं। अग्निहोत्री खुद को नेता माने हुए हैं, जबकि उन्हें कांग्रेस में कोई नहीं मानता।
भाजपा की मंत्रियों और विधायकों की सक्रियता पर नजर है क्या?
- मंत्रियों, विधायकों और तमाम नेताओं को अपनी परफार्मेंस दिखानी होगी। चुनाव के बाद मंत्रिमंडल में भी फेरबदल संभव है। ढील पर पोर्टफोलियो और मंत्री तक बदले जा सकते हैं।
लीड दिलाने वालों को ओहदे देने के प्रलोभन भी दे रहे हैं क्या?
- ये प्रलोभन नहीं। जो बेहतरीन काम करेगा, उसका पार्टी ख्याल तो रखेगी ही। सब प्रमुख नेता अपने-अपने हलकों में काम कर रहे हैं।