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तस्वीरें: 378 साल पुरानी परंपरा से आप भी हो जाएं वाकिफ

Wed, 18 Feb 2015 08:57 PM IST
Updated Wed, 18 Feb 2015 08:57 PM IST
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तस्वीरें: 378 साल पुरानी परंपरा से आप भी हो जाएं वाकिफ

International shivratri festival mandi himachal pradesh.

राजदेवता माधोराय की भव्य और शाही अंदाज में निकली जलेब के साथ ही बुधवार को मंडी में अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव शुरू हो गया। देव-मानस मिलन के इस महोत्सव में सवा सौ से ज्यादा देवी-देवता छोटी काशी पहुंचे हैं। पढ़िए क्या है इस महोत्सव का इतिहास? मंडी रियासत का इतिहास सुकेत रियासत की सातवीं पीढ़ी से शुरू हुआ। राजा साहूसेन के छोटे भाई बाहूसेन ने अपने भाई से नाराज होकर बल्ह के हाट में अपनी राजधानी बसाई थी। इसी के साथ मंडी रियासत की स्थापना हुई। 1527 में अजबर सेन ने बाबा भूतनाथ मंदिर के साथ ही मंडी शहर की स्थापना की। इनपुट: भूपेंद्र राणा, फोटो: जय कुमार

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International shivratri festival mandi himachal pradesh.

कालांतर में मंडी शिवरात्रि में शैवमत के साथ लोक देवताओं का जुड़ाव रहा है। पंद्रहवीं शताब्दी में राजा अजबर सेन ने जब बटोहली से अपनी राजधानी ब्यास नदी के उस पार स्थापित की, संभवत: इसी दौरान महाशिवरात्रि के पर्व का शुभारंभ हुआ। इसे दो दिन के लोकोत्सव के रूप में मनाया जाता रहा, जिसमें मंडी जनपद के लोक देवताओं की भागीदारी थी। राजा सूरज सेन का शासन काल 1637-1664 के दौरान रहा है।

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International shivratri festival mandi himachal pradesh.

सूरज सेन की दस रानियां और अट्ठारह पुत्र थे। एक के बाद एक सभी बेटे काल का ग्रास होने पर राजा भयभीत हो उठा। उसे अपना राज्य छीन लिए जाने की आशंका सताने लगी। उसने अपना राज्य भगवान विष्णु के प्रतीक माधोराय को समर्पित कर दिया और स्वयं राज्य का संरक्षक बनकर राजकाज देखने लगा।

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International shivratri festival mandi himachal pradesh.

मंडी के भीमा सुनार ने माधोराय की चांदी की प्रतिमा बनाई जो आज भी मौजूद है। इसे पालकी में रखकर धूमधाम के साथ पड्डल मैदान तक ले जाया जाता है। सूरज सेन ने ही मंडी शिवरात्रि को लोकोत्सव का स्वरूप प्रदान करते हुए जनपद के देवी-दवेताओं को मंडी नगर में आमंत्रित करने और एक सप्ताह तक मंडी नगर में मेहमान बनकर रखने की परंपरा भी डाली थी।

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International shivratri festival mandi himachal pradesh.

बुधवार को परंपरा के अनुसार जलेब में एक दर्जन से अधिक देवी-देवताओं के रथ और देवलु शामिल हुए। यही नहीं, छह साल बाद शिवरात्रि महोत्सव में पहुंचे देव मगरू महादेव ने भी जलेब में शिरकत की।

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