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हिमाचल कांग्रेस सरकार: जनता के लिए पैसा नहीं, माननीयों की कोठियों-कार्यालयों पर धनवर्षा, देखें तस्वीरें

Fri, 10 Feb 2023 02:56 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Fri, 10 Feb 2023 02:56 PM IST
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Himachal Congress govt: No money for the public, money showered on the mansions and offices of the honorable
मुख्यमंत्री आवास ओक ओवर में किया जा रहा रंग रोगन। - फोटो : अमर उजाला

सुख की सरकार होने का नारा देने वाली कांग्रेस सरकार ने विधायक निधि के बाद अब विकास कार्यों के लिए उपायुक्तों को मिलने वाला करोड़ों का अनुदान भी रोक दिया है। आर्थिक संकट के कारण श्रीलंका जैसा संकट पैदा होने की बात करने वाली प्रदेश की नई सरकार अब मंत्रियों, कैबिनेट रैंक के नेताओं और सीपीएस की कोठियों पर जिस तरह से करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, उससे तो लग रहा है कि राज्य में कोई आर्थिक संकट नहीं है। ऐसा प्रतीत होता है कि करीब 75 हजार करोड़ रुपये के कर्ज में डूबी सरकार के पास मंत्रियों, सीपीएस की शानो-शौकत और ठाठ-बाट के लिए धन की कोई कमी नहीं है।



सचिवालय के कार्यालय हों या मंत्रियों, कैबिनेट रैंक पर नियुक्त नेताओं की कोठियां हों, महीने भर से इनकी मरम्मत और सजावट का काम चल रहा है। हालांकि, मंत्रियों की कोठियों की हालत ऐसी नहीं थी कि इन पर इतना पैसा बहाया जा सके, लेकिन सरकार साज-सज्जा से कोई समझौता नहीं करना चाहती है। अमर उजाला की टीम ने गुरुवार को पूरा सूरते-हाल जानने के लिए इन दफ्तरों और कोठियों का मुआयना किया तो कथनी और करनी में फर्क साफ नजर आया। 

मंत्रियों, सीपीएस, कैबिनेट रैंक वाले नेताओं व पदाधिकारियों के दफ्तरों और कोठियों में करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं। राज्य सचिवालय में मंत्रियों और मुख्य संसदीय सचिवों (सीपीएस) के दफ्तरों की बात करें तो टीक, पाइन आदि की बेशकीमती लकड़ी दीवारों पर सज रही है या सीलिंग हो रही है। कहीं टाइलें बदली जा रही हैं तो कहीं लकड़ी का काम पूरा होने के बाद रंग-रोगन हो रहा है। मुख्यमंत्री के सरकारी निवास सहित मंत्रियों की कोठियों को भी इसी तरह से चकाचक किया जा रहा है।

Himachal Congress govt: No money for the public, money showered on the mansions and offices of the honorable
मंत्रियों के कमरों में लकड़ी का काम करते मजदूर व मंत्रियों के कमरे के लिए लाया गया सामान। - फोटो : अमर उजाला

कृषि मंत्री चंद्र कुमार की कोठी क्रिस्टन हॉल में रंग रोगन का काम चला हुआ है। यहां अन्य कार्य बीते दिनों पूरे कर लिए गए हैं। स्वास्थ्य मंत्री धनीराम शांडिल की कोठी नंबर सात में छत की मरम्मत की जा रही है। उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री की कोठी में इन दिनों फ्लोर टाइल लगाने का काम चला हुआ है। इस कोठी में अलग से एंट्री के लिए गेट भी बन गया है। पूर्व में यह कोठी मंत्री सुरेश भारद्वाज के पास थी। मुख्यमंत्री के राजनीतिक सलाहकार सुनील कुमार बिट्टू की कोठी याट्स कॉटेज को भी तेजी से सजाने का काम जारी है। यहां छत और दीवारों पर टीक की लकड़ी लगाई जा रही है। मंत्रियों की कोठियों में पार्क को सजाने का काम इन दिनों जोरों पर चला हुआ है।

 

Himachal Congress govt: No money for the public, money showered on the mansions and offices of the honorable
सचिवालय में रंग-रोगन का काम। - फोटो : अमर उजाला

सरकार के सत्ता संभालने के बाद मंत्रियों की कोठियों की कुछ मरम्मत की गई थी। पर कुछ को यह पसंद नहीं आईं तो फिर नए सिरे से काम हो रहे हैं। बिजली की वायरिंग उखाड़ी गई है। पानी के पाइपों को नए सिरे से बिछाया जा रहा है। सबसे ज्यादा उत्साहित कैबिनेट रैंक पर नियुक्त कुछ नेता लग रहे हैं। ऐसे में सवाल यह है कि यह किसको सुख देने वाली सरकार है। सुक्खू सरकार मत्रियों, कैबिनेट स्तर के नेताओं और मुख्य संसदीय सचिवों की शानो-शौकत में कोई कसर नहीं छोड़ना चाह रही है। उनके लिए आवंटित कोठियों और राज्य सचिवालय के सरकारी कार्यालयों में करोड़ों रुपये पानी की तरह बहाए जा रहे हैं।

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Himachal Congress govt: No money for the public, money showered on the mansions and offices of the honorable
उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री की कोठी में लगाई जा रही टाइलें। - फोटो : अमर उजाला

मंत्रियों की पसंदीदा लाइटों से कोठियों की छत सजाई जा रही हैं। दफ्तरों का आकार बढ़ाया जा रहा है। नई कुर्सियां, मैट, सोफों के अलावा खिड़कियों और दरवाजों में पसंदीदा पर्दे लगाए जा रहे हैं। पुराने सामान को कंडम घोषित कर स्टोर में भेजा जा रहा है। एक तरफ सुक्खू सरकार जहां पिछली सरकार पर बार-बार कर्जा डालने के आरोप लगा रही है तो वहीं इस तरह की फिजूलखर्ची को नजरअंदाज करना कुछ और तस्वीर दिखा रही है। जाहिर सी बात है कि मंत्रियों और नेताओं के इस ठाठ-बाट पर खर्च किए गए करोड़ों रुपये का बोझ आम जनता पर ही पड़ने वाला है। मुख्य सचिव प्रबोध सक्सेना से इस संबंध में सरकार का पक्ष जानने के लिए संपर्क किया गया तो उन्होंने इस पर किसी टिप्पणी से इनकार किया।

हेरिटेज भवन के मौलिक ढांचे को नहीं छेड़ सकते, राजभवन के लिए लगाया था पेच
राज्य सचिवालय के जिस एलर्जली भवन में मंत्रियों के कार्यालय हैं या शिमला में जो मंत्रियों की कोठियां हैं, उससे अग्निकांड का खतरा भी होगा। पहले तो हेरिटेज भवनों में निर्माण या मरम्मत कार्यों के नियम यही हैं कि उसके मौलिक रूप को छेड़ा नहीं जा सकता है। इसे पूर्ववत ही जैसे का तैसा बनाना होता है, मगर पुराने ढांचे को बरकरार रखने का भी इसमें कोई ध्यान नहीं रखा गया है। राजभवन के जीर्णोद्धार मामले मेें भी यही पेच आड़े आया था। अभी तक राजभवन को नए सिरे से खड़ा करने का काम अटका पड़ा है।

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Himachal Congress govt: No money for the public, money showered on the mansions and offices of the honorable
उप मुख्यमंत्री कार्यालय के बाहर लगी नेम प्लेट। अ - फोटो : अमर उजाला

उप मुख्यमंत्री की नेम प्लेट मुख्यमंत्री से बड़ी
 राज्य सचिवालय में उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री की नेम प्लेट मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू से बड़ी लगाई गई है। यह नेम प्लेट भी चर्चा का विषय बनी हुई है। मुख्यमंत्री कार्यालय की तर्ज पर उप मुख्यमंत्री का दफ्तर भी बनाया गया है। पहली बार उप मुख्यमंत्री का पद सृजित होने के बाद यह नेम प्लेट लगी है, जबकि सीएम कार्यालय की पहले ही बना दी गई थी।

ऐसे ही तो श्रीलंका बनेगा हिमाचल
बुद्धिजीवी दबे स्वर से कहने लगे हैं कि मंत्रियों और कैबिनेट स्तर के नेताओं की कोठियों और सचिवालय में कमरों पर की तरह की तमाम फिजूलखर्ची को नहीं रोका गया तो हिमाचल प्रदेश के हालात भी श्रीलंका की तरह ही हो सकते हैं। सुक्खू सरकार विकास कार्य करने के बजाय मंत्रियों की कोठियों में पानी की तरह पैसा बहा रही है।

 

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